Explore

Search

Saturday, April 5, 2025, 1:55 am

Saturday, April 5, 2025, 1:55 am

LATEST NEWS
Lifestyle

नाचीज बीकानेरी की राजस्थान दिवस तक रोज पढिए एक कविता

Share This Post

(नाचीज बीकानेरी वरिष्ठ साहित्यकार हैं। आप बीकानेर निवासी हैं और बीकानेर में रहकर इन दिनों साहित्य साधना कर रहे हैं। आपकी रचनाएं देश की प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती है। आपकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है और कई सम्मान भी मिल चुके हैं। आप राजस्थान दिवस 30 मार्च तक रोज राइजिंग भास्कर के लिए कविताएं लिखा रहे हैं। आज प्रस्तुत हैं म्हें राजस्थान हूं…।)

म्हैं राजस्थान हूं

म्हैं राजस्थान हूं
राखूं म्हारी पहचाण हूं
आ ‘ धरती घणी जूनी हैं
मानव सभ्यता रो जलम अठै ।

अरावली इय्यै री साख भरै
पुष्कर तीरथ अ ‘री पुष्टि करै
ऋग्वेद री ऋचावां भी कैवै
सुरसती नदी बैवै म्हांरे अठै ।

भाषा री उतपति इण धरा माथै
बा ‘ मीठी मायड़ भाषा महताऊ
वैभव री सुवास आखै मुलकां
साहित्य रो अखूट खजानों अठै ।

आ ‘ भोम टणकी घणी है
जिण में जलमी पद्मण – मीरां
सोवणी – मोवणी लागै आ ‘ धरा
वीर – धीर- पीर -भगत हुया जैठै ।

धोरां री इय्यै धरा रा रूंख
प्रकृति अर संस्कृति में गाइजै
रुंखां री रिछया सारू वीरांगना
करमां – गोरां याद आवै अठै ।

भारत री सीमा रो रक्षक म्हैं हूं
देस री आण – बाण म्हारै ताण
तीज -तिवांरा हिळ – मिळ गावां
सगळै धरमा रा धाम म्हारै अठै

म्हैं राजस्थान हूं ।
राखूं म्हारी पहचाण हूं ।।

“”””””””””””””””””‘””””””””””””””””””
मईनुदीन कोहरी”नाचीज बीकानेरी”
मो- 9680868028

Rising Bhaskar
Author: Rising Bhaskar


Share This Post

Leave a Comment