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Sunday, August 23, 2026, 12:14 pm

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Lifestyle

एक पूर्णिका : एनडी निम्बावत सागर

कंसों का राज है, रावण है चहुं ओर

आंख में शर्म नहीं, कैसा आया दौर
रहा न मात-पिता का, संतानों पर जोर

सभी तरफ समस्याएं ही समस्याएं
क्या करे इंसान, है ईश्वर हाथ डोर

जहां मिले शांति, ढूंढ़ रहे हैं वो जगह
भीड़ भरे बाजार, सड़कों पे है शोर

करेंगे यहां सभी, आदर्श की बातें
लेकिन छुपा बैठा, सबके मन में चोर

टूट रहे हैं अब तो, सब रिश्ते-नाते
प्रेम का धागा क्यों, हो गया कमजोर

क्या करे कोई “सागर”,आखिर यहाँ पर
कंसों का राज है, रावण है चहुंओर

पूर्णिकाकार
एड एन डी निम्बावत “सागर”
जोधपुर (राज.)

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor