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Thursday, July 9, 2026, 1:53 am

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डॉक्टर्स डे पर विशेष आलेख : डॉक्टर इस धरती पर भगवान का दूसरा रूप है

डॉक्टर्स डे पर ये आलेख पॉजिटिव भावना से लिखा गया है, बावजूद इसके कि आज इस पेशे में लालच और बुराइयाँ आ गई है और डॉक्टर भी माफिया से कम नहीं है, मगर हम ये लेख उन हजारों डॉक्टर्स को समर्पित करते हैं जो वाकई धरती के भगवान हैं…

डी के पुरोहित. जोधपुर

“डॉक्टर” शब्द सुनते ही मन में एक सम्मान और श्रद्धा की भावना जन्म लेती है। यह कोई साधारण पेशा नहीं, बल्कि सेवा, त्याग, समर्पण और मानवीय संवेदनाओं का संगम है। हर साल 1 जुलाई को भारत में डॉक्टर्स डे (Doctors’ Day) मनाया जाता है, जो न केवल चिकित्सा क्षेत्र के लोगों के योगदान को सराहने का दिन है, बल्कि यह दिन हमें यह समझाने का भी अवसर देता है कि कैसे डॉक्टर इस धरती पर भगवान का दूसरा रूप माने जाते हैं।

यह दिन भारत के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. बिधान चंद्र रॉय की याद में मनाया जाता है, जो एक महान डॉक्टर, स्वतंत्रता सेनानी और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री भी रहे। उनका जन्म और निधन दोनों 1 जुलाई को हुआ था, जिसे ही राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस के रूप में चुना गया।


डॉक्टर: जीवनदाता और रक्षक

डॉक्टर वह होता है जो दूसरों की पीड़ा को अपनी प्राथमिकता बनाता है। जब कोई व्यक्ति बीमार होता है, दर्द से कराहता है या जीवन के संघर्ष में हार मानने लगता है, तब डॉक्टर न केवल इलाज करता है, बल्कि उम्मीद की एक नई किरण भी देता है।

बीमारी में आशा का दीपक

जब परिवारजन थक-हार जाते हैं और रोगी उम्मीद खो देता है, तब डॉक्टर की मुस्कान और उसके आत्मविश्वास से भरे शब्द जीवन में नया संबल भर देते हैं। एक अच्छा डॉक्टर मरीज की नब्ज ही नहीं, उसकी भावनाओं को भी समझता है। उसकी चिकित्सा में विज्ञान के साथ-साथ संवेदना भी होती है।

प्राकृतिक आपदाओं और महामारी में अग्रिम योद्धा

कोरोना महामारी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। जब लोग अपने घरों में बंद थे, जब दुनिया भय और निराशा से जूझ रही थी, तब डॉक्टरों ने दिन-रात बिना थके मरीजों की सेवा की। अपने परिवार से दूर रहकर, अपने जीवन को जोखिम में डालकर उन्होंने लाखों जिंदगियाँ बचाईं। उन्हें ‘Corona Warriors’ कहा गया, लेकिन सच्चाई यह है कि वे हर समय ऐसे ही वॉरियर्स होते हैं – महामारी हो या साधारण बुखार।


डॉक्टर और भगवान में समानता

भारतीय संस्कृति में भगवान को सृष्टि का रचयिता, पालक और संहारक माना गया है। डॉक्टर भी एक मायने में जीवन देता है, उसकी रक्षा करता है और मृत्यु से लड़ता है। यही कारण है कि भारतीय समाज में डॉक्टर को ‘धरती का देवता’, ‘जीवित ईश्वर’ और ‘जीवनदाता’ कहा जाता है।

भगवान जीवन देता है, डॉक्टर जीवन बचाता है

भगवान ने हमें यह शरीर और जीवन दिया है, लेकिन जब यह जीवन संकट में पड़ता है, तब डॉक्टर ही होता है जो उसे बचाता है। ऑपरेशन थिएटर एक ऐसा मंदिर बन जाता है, जहां डॉक्टर का हर निर्णय जीवन-मृत्यु का निर्णय बन जाता है।

भगवान अदृश्य होते हैं, डॉक्टर दृश्य

भगवान को हमने कभी देखा नहीं, लेकिन डॉक्टर हमारे सामने होता है। जब बच्चा जन्म लेता है, तो सबसे पहले डॉक्टर उसे अपनी गोद में उठाता है। जब हम जीवन के किसी संकट में होते हैं, तब डॉक्टर ही सबसे पहले हमारा सहारा बनता है।

भगवान चमत्कार करते हैं, डॉक्टर विज्ञान का चमत्कार

भगवान चमत्कारों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन डॉक्टर अपने ज्ञान और विज्ञान से असंभव को संभव बना देता है। दिल के ऑपरेशन से लेकर अंग प्रत्यारोपण तक, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने डॉक्टरों के माध्यम से कई बार नया जीवन देने का काम किया है।


डॉक्टर का जीवन: सेवा नहीं, तपस्या है

बहुत लोग यह मानते हैं कि डॉक्टर बनना एक सम्मानजनक करियर है, पर वे यह भूल जाते हैं कि यह सबसे कठिन और सबसे संवेदनशील पेशा है।

शिक्षा और प्रशिक्षण की लंबी राह

एक डॉक्टर बनने के लिए एक युवा को लगभग 8 से 10 वर्षों की कठिन पढ़ाई, इंटर्नशिप और प्रशिक्षण से गुजरना होता है। इसके बाद भी उसका सीखना कभी बंद नहीं होता, क्योंकि हर दिन नई बीमारियाँ, नए शोध और नए उपचार सामने आते रहते हैं।

तनावपूर्ण जीवनशैली

डॉक्टर का कोई निश्चित समय नहीं होता। आधी रात में, छुट्टियों में, त्यौहारों में – वह हमेशा तैयार रहता है। इमरजेंसी में उसे नींद, भूख, थकान – सब कुछ भूल जाना होता है। यह पेशा केवल दिमाग से नहीं, दिल और आत्मा से निभाया जाता है।

भावनात्मक चुनौतियाँ

हर मरीज को बचा पाना संभव नहीं होता। डॉक्टर के सामने कई बार ऐसी स्थितियाँ आती हैं, जहां उसे मरीज को खोना पड़ता है। ऐसे क्षण डॉक्टर के लिए भावनात्मक रूप से बहुत कठिन होते हैं। फिर भी वह अपने चेहरे पर धैर्य का भाव रखता है, ताकि परिवार को सहारा दे सके।


आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और डॉक्टर की भूमिका

आज चिकित्सा विज्ञान जिस स्तर तक पहुंचा है, उसका श्रेय शोधकर्ताओं के साथ-साथ डॉक्टरों को भी जाता है, जिन्होंने नई विधियों को अपनाया और मानवता के कल्याण के लिए उन्हें लागू किया।

टेक्नोलॉजी और डॉक्टर का सहयोग

AI, रोबोटिक सर्जरी, टेलीमेडिसिन, न्यूरोसाइंस, जेनेटिक इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में डॉक्टरों की भूमिका सिर्फ रोगी से मिलकर दवा देने तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब वे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जीवन को समझने और सुधारने में भी भागीदार बन गए हैं।

मानवता की सेवा के नए आयाम

ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा, स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन, NGO के साथ मिलकर मुफ्त चिकित्सा सुविधा देना – ये सब आज के डॉक्टरों का ही कार्य है। डॉक्टर अब सिर्फ अस्पताल तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के हर स्तर तक पहुँच बना चुका है।


डॉक्टर के प्रति समाज का दायित्व

डॉक्टर हमारी सेवा करते हैं, पर हमें भी उनका आदर और समर्थन करना चाहिए।

सम्मान और विश्वास दें

डॉक्टर पर संदेह करने या हिंसा करने की घटनाएँ समाज के लिए शर्मनाक हैं। हमें यह समझना होगा कि डॉक्टर भी इंसान हैं, और वे अपनी ओर से पूरी कोशिश करते हैं। उनका सम्मान करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।

सरकारी और सामाजिक सहयोग जरूरी

चिकित्सा व्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए सरकार को डॉक्टरों को बेहतर संसाधन, सुरक्षित कार्य वातावरण और पर्याप्त वेतन देना चाहिए। वहीं समाज को भी डॉक्टरों के कार्य का सही मूल्यांकन करना चाहिए।


उदाहरण: कुछ प्रेरणादायक डॉक्टर

  1. डॉ. देवी शेट्टी – जिनकी हार्ट सर्जरी तकनीकें भारत के साथ-साथ विदेशों में भी प्रसिद्ध हैं और जो गरीबों के लिए सस्ती चिकित्सा उपलब्ध कराने में लगे हुए हैं।
  2. डॉ. संदीप आहूजा, डॉ. नरेश त्रेहन, डॉ. गोविंद राठी – ऐसे कई नाम हैं जिन्होंने चिकित्सा को सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि मिशन बनाया है।
  3.  डॉ. रमाकांत पांडा, डॉ. अशोक सेठ, और डॉ. अजय कौल। ये सभी डॉक्टर अपने-अपने क्षेत्रों में विशेषज्ञ हैं.

डॉक्टर केवल एक पेशेवर नहीं, बल्कि एक संवेदनशील आत्मा है जो दूसरों की पीड़ा में खुद को समर्पित कर देता है। वह न केवल शरीर का इलाज करता है, बल्कि मन को भी आश्वस्त करता है। इसीलिए सही कहा गया है कि – “डॉक्टर इस धरती पर भगवान का दूसरा रूप है।”

डॉक्टर्स डे हमें यह याद दिलाता है कि हमें अपने जीवन के इन सच्चे नायकों का सम्मान करना चाहिए। उनका योगदान शब्दों में नहीं, बल्कि श्रद्धा और आभार में व्यक्त होना चाहिए।


 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor