सावन का महीना, जब आसमान रिमझिम प्रेम बरसाता है और हर दिशा “हर-हर महादेव” से गूंजती है, सोमवार का अपना अनूठा महत्व है-आध्यात्मिक रूप से यह साधना का समय है, शिवालयों में रौनक देखते ही बनती है, उज्जैन के महाकाल में सावन के सोमवार को शिवभक्तों की अपार भीड़ रहती है और पैर रखने को जगह नहीं मिलती…देश भर में सावन के सोमवार मनाने की तैयारियां शुरू हो चुकी है
राइजिंग भास्कर डेस्क. नई दिल्ली
सावन यानी श्रावण मास का नाम आते ही मन में हरियाली, भक्ति, व्रत, व्रतधारियों की कतार, शिवालयों की घंटियां, जलाभिषेक और ‘ॐ नमः शिवाय’ की गूंज स्वतः उठने लगती है। यह महीना न केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत देता है, बल्कि आत्मिक ऊर्जा, तप और आराधना का पर्व भी है। विशेषकर सावन के सोमवार शिवभक्तों के लिए सर्वाधिक पावन और पुण्यदायक माने जाते हैं। वर्ष 2025 में सावन के चार सोमवार होंगे, जिनमें भोलेनाथ की आराधना का विशेष महत्व है।
2025 में सावन के सोमवार की तिथियां:
| सोमवार | तारीख | दिन |
|---|---|---|
| पहला | 14 जुलाई | सोमवार |
| दूसरा | 21 जुलाई | सोमवार |
| तीसरा | 28 जुलाई | सोमवार |
| चौथा | 4 अगस्त | सोमवार |
इन चारों सोमवारों को भारतभर के शिवालयों में आस्था की उमंग दिखाई देगी। कांवड़िए गंगाजल लेकर शिवलिंग का अभिषेक करेंगे, महिलाएं व्रत रखेंगी, युवा श्रद्धालु रुद्राभिषेक में भाग लेंगे और मंदिरों में रुद्राष्टाध्यायी, शिव चालीसा और महामृत्युंजय जाप गूंजेंगे।
सावन का माह और भगवान शिव का संबंध
क्यों सावन में होती है शिव की आराधना?
सावन भगवान शिव का प्रिय मास माना गया है। पौराणिक मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान जब विष (हलाहल) निकला, तब देवताओं और दानवों को विनाश से बचाने के लिए भगवान शिव ने उसे पी लिया। यह घटना श्रावण मास में घटी थी। उस विष की तपिश को शांत करने के लिए देवताओं ने शिवजी का गंगाजल से अभिषेक किया। तभी से श्रावण मास में शिवलिंग पर जल, बिल्वपत्र, धतूरा, भांग आदि चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है।
सावन सोमवार का महत्व
- धार्मिक महत्व: इन सोमवारों को व्रत, जाप, ध्यान और शिवलिंग पर जलाभिषेक से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। विशेष रूप से कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति, और विवाहित महिलाएं अपने सुहाग की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं।
- आध्यात्मिक महत्व: सावन सोमवार आत्मा की शुद्धि, तप और साधना का समय है। इस मास में शिव साधना से काल दोष, राहु-केतु और शनि के दुष्प्रभाव भी शांत होते हैं।
- वैज्ञानिक पक्ष: वर्षा ऋतु में व्रत और फलाहार से शरीर का पाचन तंत्र बेहतर होता है। जलाभिषेक और शिव मंदिरों में जाने से मन में ध्यान और एकाग्रता की भावना विकसित होती है।
सावन सोमवार की पूजा विधि: कैसे करें शिव आराधना?
प्रातः काल उठकर स्नान कर लें
- स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- घर या मंदिर में स्थित शिवलिंग को गंगाजल से स्नान कराएं।
पूजन सामग्री रखें तैयार
- गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी, शक्कर (पंचामृत)
- बिल्वपत्र (त्रिदल), धतूरा, भांग, सफेद फूल, भस्म, अक्षत
- दीपक, धूप, रुद्राक्ष की माला, शुद्ध जल
पूजा की विधि
- शिवलिंग पर गंगाजल से अभिषेक करें
- पंचामृत से स्नान कराएं
- बिल्वपत्र और धतूरा अर्पित करें
- “ॐ नमः शिवाय” का 108 बार जाप करें
- शिव चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र, रुद्राष्टक का पाठ करें
- अंत में आरती करें और व्रत कथा पढ़ें
शिव से जुड़े प्रमुख श्लोक और मंत्र
1. महामृत्युंजय मंत्र:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
यह मंत्र मृत्यु के भय को दूर करता है और जीवन में अमृत-तत्व की वृद्धि करता है।
2. रुद्राष्टक स्तोत्र :
नमामीशमीशान निर्वाण रूपं
विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपम्।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं
चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम्॥
3. शिव पंचाक्षर मंत्र:
ॐ नमः शिवाय — यह पंचाक्षरी मंत्र आत्मा की गहराई तक जाकर शिव से एकत्व की भावना उत्पन्न करता है।
भारत भर में मनाया जाने वाला पर्व
भारत में सावन सोमवार की धूम हर राज्य में अलग अंदाज में दिखती है।
- उत्तर भारत (उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड): महिलाएं उपवास करती हैं और लोकगीत गाकर शिव-पार्वती की आराधना करती हैं।
- राजस्थान में गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा की जाती है।
- मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में नीलकंठ महादेव मंदिरों में हजारों की संख्या में भक्त जुटते हैं। उज्जैन के महाकाल मंदिर में विशिष्ट आराधना की जाती है। इस दिन मंदिर में पैर रखने की जगह नहीं मिलती।
- हरिद्वार से कांवड़ लाकर श्रद्धालु पैदल यात्रा कर शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं।
कांवड़ यात्रा: भक्ति का उत्सव
सावन का सबसे पवित्र दृश्य होता है कांवड़ियों की यात्रा।
- हजारों शिवभक्त गंगा से जल लेकर पैदल मीलों चलते हैं
- गाते हुए “बोल बम” के नारे लगाते हैं
- जल लेकर अपने गांव या शहर के शिव मंदिर में अर्पण करते हैं
- यह यात्रा त्याग, तपस्या और भक्ति का जीवंत उदाहरण बन जाती है
सावन सोमवार की पौराणिक कथाएं
कथा: शिव और सती का पुनर्मिलन
पौराणिक मान्यता के अनुसार, सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में आत्मदाह कर लिया। इसके पश्चात वे पार्वती रूप में पुनर्जन्म लेती हैं और कठोर तप कर शिव को फिर से पति रूप में प्राप्त करती हैं। यह तप सावन माह में किया गया था। अतः इस मास में कन्याएं शिव से उत्तम वर की कामना करती हैं।
शिव की भक्ति से मिलती है मुक्ति
भगवान शिव को भोलेनाथ भी कहा जाता है क्योंकि वे भक्तों से थोड़ी सी भक्ति पर भी प्रसन्न हो जाते हैं। वे तीनों लोकों के स्वामी, समय और मृत्यु के अधिपति, योगियों के गुरु हैं। उनके नाम का जाप जीवन को दिशा देता है।
सावन सोमवार के दौरान क्या करें – क्या न करें?
करें:
- रुद्राभिषेक
- व्रत और फलाहार
- शिव चालीसा और मंत्र जाप
- संयम, ब्रह्मचर्य, सेवा कार्य
न करें:
- मांसाहार, शराब
- क्रोध, कटु वचन
- तामसिक भोजन
- अनावश्यक वाद-विवाद
नारी मन और सावन
सावन में महिलाएं मेंहदी रचाती हैं, झूले झूलती हैं, लोकगीत गाती हैं और शिव-पार्वती की पूजा कर पारिवारिक सुख-शांति की कामना करती हैं। यही वजह है कि सावन को नारी मन का सबसे प्रिय मास माना गया है।
सावन है शिव का सान्निध्य पाने का अवसर
सावन न केवल ऋतुओं का एक मोड़ है, बल्कि आत्मिक उन्नयन, भक्ति और ध्यान का उत्सव है। चार सोमवारों का यह श्रृंगार चार पग हैं— मोक्ष की ओर। इस बार सावन में जब 14 जुलाई को पहला सोमवार आएगा, देशभर में ‘हर-हर महादेव’ की गूंज शिव की कृपा का आह्वान करेगी।




