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Thursday, July 9, 2026, 4:09 am

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Lifestyle

शुभा अवस्थी की कविताएं

कवयित्री : शुभा अवस्थी

………समय नहीं है????…… 

12 घंटे का सफर
4 घंटे में सिमट गया,
फिर भी व्यक्ति कहता है समय नहीं है……

12 लोगों का परिवार
दो लोगों में सिमट गया
फिर भी व्यक्ति कहता है समय नहीं है…..

जो संदेश 4 सप्ताह में मिलता था
अब 4 सेकंड में मिलता है,
फिर भी व्यक्ति कहता है समय नहीं है…..

कभी दूर बैठे व्यक्ति का चेहरा देखने में
1 साल लग जाता था,
आज वह सेकंड में दिख जाता है,
फिर भी व्यक्ति कहता है समय नहीं है………

जो व्यक्ति पहले बैंक की कतार मे
घंटों खड़ा रहता था,
अब वह अपने फोन से सेकंड में लेनदेन कर लेता है,
फिर भी व्यक्ति कहता है समय नहीं…….

स्वास्थ जांच जो पहले कई दिनों में होती थी,
अब घंटे में होती है, सेकंडो में होती है,
फिर भी व्यक्ति कहता है समय नहीं है…….

एक्टिवा चलाते समय
एक हाथ में हैंडल
दूसरे में आईफोन,
क्योंकि उसे रख कर बात करने का समय नहीं है……

जब ट्रैफिक जाम होता है, तो हम दो लाइन क्रॉस करके
तीसरी लाइन बना लेते हैं,
क्योंकि रुकने का समय नहीं है….

माता-पिता से बात करने का, फोन करने का आजकल लोगों को समय नहीं है….
प्रकृति का आनंद लेने का समय नहीं है…..

लेकिन………
आईपीएल के लिए समय है,
नेटफ्लिक्स के लिए समय,
फालतू की रील्स के लिए समय है,
राजनीति पर चर्चा करने के लिए समय हैं,
लेकिन न समाज के लिए समय है ना खुद के लिए समय है….

दुनिया आसान हो गई है,
दूरियां मिट गई,
सुविधा बढ़ गई हैं,
अवसर बढ़ गए हैं, लेकिन व्यक्ति के पास समय नहीं है

कहकर स्वयं को उसने, अपने आप को सबसे दूर कर लिया है……..

चुपचाप बैठकर
स्वयं से बात करने का,
स्वयं को समझने का,
आज पल भर भी समय नहीं….

जीवन में स्वार्थ सिद्ध करने का समय है,
आज दूसरों को परेशान करने का इतना समय है,………
दूसरों से बेमतलब जलन, घृणा, ईर्ष्या , द्वेष रखने का समय है…….
कि खुद के घर में क्या हो रहा है वह देखने का ही समय नहीं है……

और फिर एक दिन…..
समय यूं ही बीत जाता है,
आखिरी पल में हमें आभास होता है,
समय था लेकिन हमारे पास समय नहीं है कहते-कहते समय ही निकल गया……..

तो आज ही निश्चय कर लो,
कुछ समय अपने लिए,
कुछ समय परिवार को दो, कुछ समय समाज को दो,

क्योंकि………………..
समय नहीं है…………
यह सत्य नहीं है…….
यह बस एक आदत बन गई है,
और इसे बदलने की आवश्यकता हैl

000

खूबसूरत सा एक पल…

खूबसूरत सा एक पल…
किस्सा बन जाता है….
जाने कौन कब जिंदगी का…
हिस्सा बन जाता है….
कुछ लोग जिंदगी में….
मिलते हैं ऐसे…..
जिनसे कभी न टूटने वाला…
रिश्ता बन जाता है…
जहां पर अहंकार स्वार्थ नहीं होता…
वहां पर खूबसूरत सा रिश्ता बन जाता है………
दिल से जब रिश्ता निभाया जाता है
वह हमेशा कायम रहता है…..
जिंदगी है इतनी छोटी सी….
इंसान क्यों जलन ईर्ष्या में उलझा रहता है…..
कितना अच्छा होता…
जहां सब मिलजुल कर रहते…
खुद भी आराम से रहते…
वह दूसरों को भी आराम से रहने देते…।

000

 

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor