कवयित्री : शुभा अवस्थी
जो लफ्जों के घावों को भर दे…
जो लफ्जों के घावो को भर दे…..
ऐसा कोई अनुसंधान नहीं है…
मन निर्मल और वचन में मधुरता रखना ही….
सिर्फ एक विधान नहीं है…
किसी का मजाक उड़ना,उसको दबाना
और दोस्ती करने का सोचना…
किसी भी प्रकार संभव ही नहीं है….
उम्र से मैच्योरिटी नहीं आती….
जो परिस्थितियों से बाहर होकर निकलता है…..
चीजों को समझता है वह मेच्योर व्यक्ति होता है…..
शब्दों में धार नहीं आधार होना चाहिए…
जिन शब्दों में धार होती है..
वह व्यक्ति को नहीं जोड़ते..
मन को काटते हैं….
दूरियां बढ़ाते हैं, रिश्ते हमेशा के लिए खत्म कर देते हैं……
जिन शब्दों में आधार होता है….
वह मन को जीत लेते हैं….
और रिश्ते भी बनाए रखते हैं…




