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Thursday, July 9, 2026, 7:48 am

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“गौ माता की राजनीति या गौ मांस का व्यापार? वायरल वीडियो से मोदी सरकार घिरी सवालों में”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रीति-नीति पर उठे सवाल…बृज बिहारी सरकार के वायरल वीडियो से देश में मचा बवाल

डीके पुरोहित. जोधपुर 

भारत में गाय एक धार्मिक प्रतीक रही है। सनातन परंपरा में ‘गौ माता’ का स्थान मां के समान माना जाता है। बीजेपी, विशेषकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ने सत्ता में आने से पहले और बाद में बार-बार यह वादा किया कि देशभर में गौ मांस (बीफ) पर सख्त रोक लगाई जाएगी और गौवंश की रक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। परंतु हाल ही में वायरल हो रहे एक वीडियो ने न केवल भाजपा की नीति और नीयत पर प्रश्न खड़े कर दिए हैं, बल्कि एक बार फिर यह बहस शुरू कर दी है कि क्या ‘गौ माता’ के नाम पर सिर्फ राजनीति हो रही है और व्यावहारिक स्तर पर कुछ और ही एजेंडा चल रहा है?

वायरल वीडियो: बृज बिहारी सरकार का बयान या भाजपा की पोल-पट्टी?
बृज बिहारी सरकार – का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वे कहते सुने जा रहे हैं:

“मोदी जी ने जब सरकार बनाई थी तब वादा किया था कि भारत से गौ मांस का व्यापार बंद होगा। लेकिन आप खुद देखिए, पहले भारत 9वें नंबर पर था बीफ एक्सपोर्ट में, अब हम दुनिया में दूसरे नंबर पर आ गए हैं। ये है असली हिंदुत्व?” ये वीडियो कब का है और कहां का है? इस बारे में जानकारी नहीं मिल पाई है। जब बृज बिहारी सरकार से 6260864950 मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया तो बात नहीं हो पाई।

यह बयान जैसे ही वायरल हुआ, विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला बोल दिया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी और यहां तक कि कई हिंदू संगठनों ने भी इस पर सवाल उठाए कि क्या भाजपा ‘गौ माता’ के नाम पर सिर्फ भावनात्मक वोट बटोरती है जबकि उसके शासनकाल में गौ मांस का व्यापार दोगुना हो गया?

गौ मांस एक्सपोर्ट के आंकड़े: क्या कहते हैं सरकारी दस्तावेज?
अगर हम सरकारी वाणिज्य मंत्रालय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संगठनों के आंकड़ों पर नज़र डालें तो भारत, वर्ष 2013 में विश्व में बीफ (जिसमें भैंस का मांस भी शामिल है) निर्यात में 9वें स्थान पर था। वहीं 2023 तक आते-आते भारत बीफ एक्सपोर्ट में ब्राजील के बाद दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक बन गया।

यहां यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि भारत से ‘बीफ’ के रूप में ज्यादातर ‘भैंस’ का मांस निर्यात होता है, गाय का नहीं – परंतु भारत में यह अंतर सामाजिक और धार्मिक दृष्टिकोण से हर बार साफ नहीं किया जाता।

विरोधाभास: हिन्दुत्व की राजनीति और बीफ निर्यात में वृद्धि
बीजेपी और नरेंद्र मोदी का सत्ता में आने का एक मुख्य आधार रहा है – हिंदुत्व। उनके हर चुनावी भाषण में ‘गौ माता की रक्षा’, ‘बीफ बैन’ और ‘गोशालाओं के विकास’ की बात होती रही है। परंतु यदि जमीनी स्तर पर देखें, तो:

  • उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा जैसे भाजपा-शासित राज्यों में कई बीफ प्रोसेसिंग यूनिट्स चालू हैं।
  • गुजरात में ही, जहां गोरक्षा की भावना बहुत मजबूत मानी जाती है, वहां से भी वॉटर बफेलो मांस का निर्यात होता है।
  • कई बीजेपी सांसदों और नेताओं के खुद के मांस व्यापार से जुड़े होने की खबरें पहले भी आती रही हैं।

विपक्ष का आरोप है कि भाजपा एक तरफ जनता को ‘गौरक्षक’ बना कर मोब लिंचिंग को हवा देती है और दूसरी ओर बैकडोर से बीफ एक्सपोर्ट को बढ़ावा देती है।

कांग्रेस का पलटवार: “पाखंड की पराकाष्ठा”
कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने कहा:

“यह पाखंड की पराकाष्ठा है। भाजपा जनता को गाय के नाम पर लड़वाती है, हत्याएं करवाती है और खुद व्यापार में मुनाफा कमाती है। यह सरकार न गोभक्त है, न राष्ट्रभक्त – यह सिर्फ सत्ता भोगी है।”

राहुल गांधी ने कहा:

“मोदी जी, क्या अब भी आप गौरक्षा का ढोंग जारी रखेंगे जबकि आपके शासन में भारत बीफ एक्सपोर्ट में टॉप पर पहुंच गया है?”

सनातन धर्म और गौ माता का स्थान: आस्था बनाम आंकड़े
सनातन संस्कृति में गाय को ‘कामधेनु’ कहा गया है – वह जो सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती है। भारत में करोड़ों लोग आज भी गौमूत्र और गोबर को औषधीय मानते हैं। गांवों में आज भी ‘गौ माता’ की पूजा होती है।

लेकिन आंकड़े यह दिखा रहे हैं कि पिछले एक दशक में:

  • गोशालाओं की संख्या कम हुई है।
  • बेसहारा गौवंश की संख्या में वृद्धि हुई है।
  • गौ तस्करी के मामलों में वृद्धि हुई है।
  • और सबसे महत्वपूर्ण – बीफ एक्सपोर्ट में भारत का रैंकिंग ऊंचा हो गया है।

राजनीतिक विश्लेषण: हिंदुत्व केवल चुनावी मोहरा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने गाय के नाम पर एक भावनात्मक नैरेटिव तैयार किया है। कई कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि :

“गाय भाजपा की राजनीति का सबसे मजबूत भावनात्मक कार्ड है। परंतु सरकार की नीतियों में कहीं भी स्पष्ट रूप से गोवंश को संरक्षित करने की नीति लागू होती नहीं दिखती।”

सामाजिक विडंबना: गौरक्षा के नाम पर हिंसा और गौमांस का व्यापार दोनों साथ-साथ?
2014 से 2022 तक के आंकड़ों पर नज़र डालें तो गौरक्षा के नाम पर भीड़ द्वारा की गई हत्याओं (Mob Lynching) की घटनाएं तेज़ी से बढ़ीं। परंतु वहीं दूसरी ओर सरकार ने बीफ निर्यात पर कोई ठोस प्रतिबंध नहीं लगाया। यह दोहरा रवैया अब सवालों के घेरे में है।

सरकार का पक्ष: “गाय और भैंस में फर्क समझें”
भाजपा नेताओं ने इस पर सफाई दी है कि सरकार ने गाय की हत्या पर पहले से ही कई राज्यों में रोक लगाई है और जो मांस निर्यात हो रहा है, वह भैंस का है। उत्तर प्रदेश के एक मंत्री ने कहा:

“हमने गाय की हत्या पर रोक लगाई है। लेकिन भैंसों का मांस वैश्विक बाजार में मांग रखता है और इससे करोड़ों लोगों को रोज़गार मिलता है।”

हालांकि यह तर्क विपक्ष और जनता के बड़े हिस्से को संतोषजनक नहीं लगता, क्योंकि प्रचार और जमीन पर नीतियों के बीच फर्क साफ झलकता है।

निष्कर्ष: गौ माता का भविष्य राजनीति के हवाले?
भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में धार्मिक आस्था और आर्थिक नीति के बीच संतुलन बनाना सरकारों के लिए हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। लेकिन जब एक ही सरकार ‘गौरक्षा’ को सर्वोच्च प्राथमिकता बताती है और उसी कालखंड में देश बीफ एक्सपोर्ट में विश्व पटल पर शीर्ष पर पहुंचता है – तो यह निश्चित रूप से एक बड़े नैतिक और राजनीतिक सवाल को जन्म देता है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor