राइजिंग भास्कर. नागौर
“नज़र नहीं तो क्या हुआ, इरादे तो बुलंद हैं,
मंज़िल मिले या न मिले, हौसले हमारे बुलंद हैं।”
कहते हैं कि हौसलों की उड़ान को कोई सीमा रोक नहीं सकती। इसे सच कर दिखाया है राजस्थान के नागौर जिले के दृष्टिबाधित खिलाड़ी, बीरदाराम सियोल ने। जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में 18 से 20 अगस्त 2025 तक आयोजित हो रही प्रतियोगिताओं में इस युवा सितारे ने अपनी प्रतिभा का ऐसा परचम लहराया कि हर कोई दंग रह गया। बीरदाराम ने तीन अलग-अलग स्पर्धाओं में *तीन स्वर्ण पदक* जीतकर इतिहास रच दिया है।
कक्षा 12 में पढ़ रहे बीरदाराम की यह जीत महज़ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि उन सभी युवाओं के लिए एक प्रेरणा है जो अपनी बाधाओं को अपनी ताकत बनाना चाहते हैं। उन्होंने इन तीनों स्वर्ण पदकों को डिस्कस थ्रो, लॉन्ग जंप और शॉट पुट जैसी कठिन स्पर्धाओं में प्राप्त किया है। उनकी यह सफलता उनकी खुद की मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प का परिणाम है, क्योंकि उन्होंने इन प्रतियोगिताओं के लिए स्वयं तैयारी की थी।
जूडो प्रतियोगिता में भी नेशनल मेडल जीत चुके हैं
यह पहला मौका नहीं है जब बीरदाराम ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इससे पहले वह जूडो प्रतियोगिता में भी नेशनल मेडल जीत चुके हैं। उनकी असाधारण प्रतिभा को देखते हुए उनका चयन एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए भी हुआ था, लेकिन शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के कारण वे परीक्षाओं की वजह से उस प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पाए। यह दर्शाता है कि बीरदाराम खेलों के साथ-साथ अपनी पढ़ाई को भी समान महत्व देते हैं।
“सपनों की उड़ान भरने वालों को आसमान भी छोटा लगता है,
जो दिल से ठान लेते हैं, उनके लिए हर मुश्किल रास्ता आसान लगता है।”
बीरदाराम सियोल की यह शानदार जीत न केवल उनके परिवार और गुरुजनों के लिए, बल्कि पूरे नागौर जिले और राजस्थान के लिए गर्व का विषय है। उनकी कहानी हमें यह सिखाती है कि सच्ची लगन और अटूट विश्वास के आगे हर चुनौती घुटने टेक देती है।





