-दो से ढाई घंटे चले कार्यक्रम में अधिकतर समय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ही बोले- उन्होंने विद्या भारती, एकेडमी, शिक्षा नीति, ऑपरेशन सिंदूर, वसुधैव कुटुंबकम, वीर धरा राजस्थान और भारत की परंपराओं का बखान किया।
-केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री ने संक्षिप्त उद्बोधन में रक्षा मंत्री का स्वागत करते हुए एकेडमी के निर्माण की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने दानदाताओं का आभार जताया।
-विद्या भारती अ.भा. सह संगठन मंत्री यतींद्र शर्मा ने विद्या भारती के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 15 हजार मातृ सम्मेलन होंगे, जिसमें 50 लाख से अधिक माताएं भाग लेंगी।
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को आर.के. दम्मानी राष्ट्रीय पुनरुत्थान और शिक्षा केंद्र लालसागर की ओर से आदर्श डिफेन्स एवं स्पोर्ट्स एकेडमी के नवनिर्मित भवन का भव्य लोकार्पण किया। उन्होंने फीता काटा और बाद में नारियल फोड़ कर मंत्रोच्चार के बीच एकेडमी समर्पित की। राजनाथ सिंह ने कहा कि राजस्थान वीरों की धरती है। इस वीर भूमि को मैं नमन करता हूं। यह वह धरती है जिन्हें सब वंदना करते हैंं। यहां की मिट्टी में शौर्य है, पराक्रम है, मान-सम्मान-स्वाभिमान भी है। हमें बचपन से ही राजस्थान के वीरों की अद्भुत कहानियां सुनाई गई। वीर दुर्गादास, महाराणा प्रताप, पन्नाधाय… यह धरती रणबांकुरों की धरती है।
शक्ति-भक्ति-युक्ति-सपंत्ति का संगम :
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि राजस्थान की धरती में शक्ति-भक्ति, युक्ति और संपत्ति का संगम है। यहां राणा की शक्ति है, मीरा की भक्ति है और पन्ना की युक्ति के साथ भामाशाह ही संपत्ति है। शक्ति-भक्ति का संगम ही राजस्थान की पहचान है। राजस्थान की वीर भूमि ने कभी पराधीनता स्वीकार नहीं की। इस धरा के बेटे-बेटियों ने देश के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। तिरंगे की रक्षा में यहां के सपूत कभी पीछे नहीं रहे। उन्होंने विद्या भारती का आभार जताया जिनकी बदौलत उन्हें राजस्थान की वीर धरा पर इस एकेडमी के लोकार्पण का मौका मिला। उन्होंने कहा कि यहां की धरती ने सेना के जवानों के रूप में खूब सेवा की। मैं चाहता हूं कि यहां के युवा देश की सेना में बड़े अफसरों के पदों तक भी पहुंचे। राजनाथ सिंह ने कहा कि विद्या भारती से उनका जुड़ाव लंबे समय है। परंतु अब समयाभाव के कारण समय नहीं दे पाते। विद्या भारती शिक्षा के क्षेत्र में जागरण का जीता जागता उदाहरण है।
विद्या भारती विद्यार्थियों को अच्छा नागरिक बनाने की शिक्षा देती है :
राजनाथ सिंह ने कहा कि विद्या भारती विद्यार्थियों को अच्छा नागरिक बनाने की शिक्षा देती है। विद्या भारती का मानना है कि शिक्षा केवल परीक्षा तक सीमित नहीे है। यहां शिक्षा के साथ-साथ शारीरिक शिक्षा, योग, अध्यात्म, संस्कृत, संस्कृति कई फैक्टर काम करते हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने जो सपना देखा था उसे साकार करने में विद्या भारती लगी हुई है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय चाहते थे कि हर व्यक्ति का समग्र विकास हो। वे चाहते थे कि हर व्यक्ति का तन-मन-धन-अध्यात्म की दृष्टि से विकास हो। विद्या भारती की शिक्षा प्रणाली ऐसी है जिसमें भौतिक के साथ आध्यात्मिक विकास पर जोर दिया जाता है।
शिक्षा सर्वाधिक बदलाव चाहती है :
राजनाथ सिंह ने कहा कि शिक्षा सर्वाधिक बदलाव चाहती है। शिक्षा में अध्यात्मक तत्व का समावेश भी होना चाहिए। प्रोग्रेसिव लोग उन्हें पसंद नहीं करते। मगर मेरा यह मानना है कि शिक्षा का अर्थ केवल भौतिक विकास ना होकर आध्यात्मिक विकास भी है। शिक्षा में अब बदलाव आया है। अब एक विषय दूसरे विषय से अलग नहीं है, बल्कि सभी विषय एक दूसरे से लिंक है। स्टूडेंट्स के पढ़ने के लिए तरीकों में भी बदलाव आया है। हमारे जमाने में ब्लैक बोर्ड पर चित्र बनाकर समझाया जाता था। जबकि आज का बच्चा इंटरनेट पर ग्रह-उपग्रहों की तह तक पहुंच जाता है। हमारे जमाने में किताबों की प्रिंटिंग भी इतनी अच्छी नहीं होती थी। तब लैब होना बड़ी बात होती थी। मगर अब तो लैब के बगैर पढ़ाई अधूरी है। आज का बच्चा जानता है कि ग्लोब में कौनसा देश कहां और किस महाद्वीप में है। यह परिवर्तन दशकों की मेहनत का परिणाम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उन्होंने आभार जताया जिनके प्रयासों से बदलाव दृष्टिगोचर हो रहे हैं।
शिक्षा मंत्री के समय के अपने अनुभव साझा किए :
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जब वे शिक्षा मंत्री थे तब उन्होंने नकल पर नकैल कसने के प्रयास किए थे। उन्होंने तब के अनुभव साझा किए और कहा कि जब वे शिक्षा मंत्री बने थे तब नकल का बोलबाला था और 60 प्रतिशत परिणाम आम बात थी। मगर उन्होंने नकल के खिलाफ कानून बनाया तो 42.2 प्रतिशत रिजल्ट रहने लगा। नकल से प्रतिभाओं के साथ अन्याय होता है।
भारत की परंपराओं का बखान किया :
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत आदि काल से ही हर क्षेत्र में आगे रहा है। जब सभ्यता लिखना सीख रही थी तब हमारे यहां नाट्यशास्त्र लिखे गए। मंचों पर अभिनय के बारे में बहुत पहले बता दिया गया। जब लोग बीमारी के बारे में शोध कर रहे थे तब हमारे आयुर्वेद में चरक और श्रुश्रुत आदि ने रोगों को डायग्नोस कर लियाा। हल्दी, अश्वगंधा, नीम आदि से हमारे यहां प्राचीन समय से इलाज हो रहा है।
डिफेंस एकेडमी परियोजना से शिक्षा व देशभक्ति का मिलन होगा :
राजनाथ सिंह ने कहा कि आदर्श डिफेंस एवं स्पोर्ट्स एकेडमी परियोजना से शिक्षा व देशभक्ति का मिलन होगा। कोचिंग, शिक्षा, खेल को एक जगह आत्मसात किया जा सकेगा। इसका विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। इससे विद्यार्थियों में चरित्र और देशभक्ति की भावना बढ़ेगी। साइंस और टेक्नोलॉजी से खिलाड़ी तैयार होंगे। यह विद्या भारती की महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगी। विद्या भारती पूरे भारत में गौरव और प्रेरणा का प्रतीक बनेगा। इस परियोजना की शुरुआत हो रही है। मैं लोगों से कहना चाहूंगा कि हम जो धन अर्जित करते हैं अपने परिवार और समाज के लिए अर्जित करते हैं। इतना ही नहीं यह धन हम देश के लिए भी अर्जित करते हैं। इसलिए हमारे द्वारा जो धन अर्जित किया जाता है उसे देश के विकास पर भी खर्च करने की भावना हमारे मन में होनी चाहिए। हमें यह भी सोचना होगा कि हम केवल अपने समाज का भला नहीं कर हर समाज की भलाई की बात सोचें। उन्होंने कहा कि रक्षा और शिक्षा दोनों से देश मजबूत होता है। रक्षा और खेल का भी अनूठा मिलन है। अनूठा संगम है। रक्षा और खेल का पुराना नाता है। अतीत में हाथ से भाला चलाया जाता था ताकि व्यक्ति अपनी सुरक्षा कर सके। तलवारबाजी और तीरंदाजी भी की जाती थी। यही बाद में खेलों का हिस्सा बना। सेना में भी खेलों का बड़ा महत्व है।
ऑपरेशन सिंदूर पर बोले- कहा, हमने धर्म नहीं कर्म देखकर मारा
रक्षा मंत्री ने कहा कि जब आतंकवादियों ने पहलगाम में निर्दोषों को धर्म पूछकर मारा तो देश गुस्से में था। लोग चाहते थे भारत की सेना जवाब दे। मैंने तीनों सेना के चीफ की बैठक बुलाई। तीनों सेना के चीफ ने कहा- सर आप जो कदम उठाएंगे हम तैयार हैं। हम हर ऑपरेशन के लिए तैयार हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि हमने टारगेट तय किए। सेना ने सटीक और अचूक वार किए। उन्होंने धर्म देखकर मारा था पर हमने धर्म नहीं कर्म देखकर मारा। राजनाथ सिंह ने इस मौके पर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री और जोधपुर सांसद गजेंद्रसिंह शेखावत की भी प्रशंसा की और कहा कि वे और उनकी टीम सीमावर्ती क्षेत्रों में जागरण का अच्छा कार्य कर रही है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को बधाई दी।
परमानंद की कोई सीमा या मेडिसिन नहीं, हम वसुधैव कुटुंबकम को आदर्श मानते हैंं
राजनाथ सिंह ने कहा कि हम वसुधैव कुटुंबकम को आदर्श मानने वाले हैं। पूरा संसार ही हमारा परिवार है। हम भौतिक सुखों के पीछे नहीं भागते। उन्होंने कहा कि सुख की कोई निश्चित परिभाषा नहीं होती। परमानंद की कोई सीमा या मेडिसिन नहीं है। आरंभ में उन्होंने कहा कि कई महीनों के बाद राजस्थान की धरती पर आया हूं। मुझे लगता है कि करीब एक साल बाद आया हूं।
विद्या भारती मौलिक शिक्षा और मौलिक विचारों की पक्षधर : यतींद्र शर्मा
विद्या भारती अ.भा सह संगठन मंत्री यतींद्र शर्मा ने बतौर मुख्य वक्ता कहा कि जब विद्या भारती का इतिहास लिखा जाएगा लालसागर को भी याद किया जाएगा। विद्या भारती हिंदुत्व, सनातन, संस्कृति, मानवता और शाश्वत सत्य के विचारों को आत्मसात कर कार्य कर रही है। विश्व कल्याण की भावना विद्या भारती की आत्मा में है। विद्या भारती भारत के चिंतन को लेकर चलती है। मौलिक शिक्षा और मौलिक विचारों की विद्या भारती पक्षधर है। भारत भूमि पर शिक्षा, विचार और समाज में परिवर्तन की भावना से विद्या भारती कार्य कर रही है। शिक्षा में परिवर्तन की भावना को लेकर विद्या भारती जन जातीय, पर्वतीय, आदिवासी आदि क्षेत्रों मे एक विचार को लेकर कार्य कर रही है। विद्या भारती के कई प्रकल्प चल रहे हैं।
विद्या भारती के 100 वर्ष पूरे होने पर कई अभियान चलाए जाएंगे :
यतींद्र शर्मा ने कहा कि विद्या भारती के 100 वर्ष पूरे होने पर देश भर में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। देश भर में समाज परिवर्तन की मुहिम के तहत माताओं के लिए 15 हजार सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इसमें 50 लाख से अधिक माताएं भाग लेंगी। इसके पीछे यही भावना है कि माताएं परिवार में परिवर्तन आरंभ करें। इसी संकल्प के साथ 100 वर्ष पूरा होने के उपलक्ष्य में कार्यक्रम होंगे।
एकेडमी का प्रथम चरण देश के विकास में मील का पत्थर साबित होगा : शेखावत
कार्यक्रम में बतौर अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री और जोधपुर सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि एकेडमी का प्रथम चरण पूरा हो चुका है। यह एकेडमी देश के विकास में मील का पत्थर साबित होगी। आर्थिक संग्रह हमारे सामने चुनौती थी। मगर दानदाताओं का मैं अभिनंदन करना चाहता हूं जिनकी बदौलत हमारा यह सपना साकार हुआ। इससे राष्ट्र सुरक्षा के द्वार खुले हैं। शेखावत ने कहा कि वे आरके दम्मानी जी से मिले थे और उन्होंने एम्स में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के रुकने के लिए भवन की आवश्यकता जताई तो दम्मानी जी ने कहा कि चाहे 100 करोड़ खर्च हो जाएं पर मैं काम करूंगा। शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षा नीति बनाई। इस शिक्षा नीति में विद्या भारती जैसे संस्थान अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। विद्या भारती सात-आठ दशक से शिक्षा को अध्यात्म के साथ उपलब्ध करवा रहा है। हम चाहते हैं कि जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर आदि स्थानों पर हॉस्टल बने और विद्यार्थियों को शिक्षा उपलब्ध करवाई जाए।
भामाशाहों का सम्मान किया :
प्रकाश जीरावला की देखरेख में कई भामाशाहों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में राधाकृष्ण दम्मानी की सुपुत्री मधु चांडक को सम्मानित किया गया। मधु चांडक ने कहा कि यह जो परियोजना शुरू की गई है इसके लिए मैं शुभकामना देती हूं। शिक्षा और स्पोर्ट्स से स्टूडेंट्स को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। हमारे बच्चो में देशभक्ति का जुनून पैदा होगा। मेरे पिताजी की ओर से आप सबका आभार व्यक्त करती हूं। इस एकेडमी के खुलने से सीमावर्ती गांवों के बच्चों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। उनके मजबूत इरादों को बल मिलेगा। भविष्य में वीर योद्धा भारत की सेवा के लिए तैयार होंगे। यह एकेडमी मैं सरस्वती देवी और शिवकिशन दम्मानी की स्मृति में समर्पित करती हूं।
इनका भी हुआ सम्मान : रमाकांत बाहेती, सुशील जालानी, सुरेश गांधी (आए नहीं), ओमप्रकाश सोनी, गौरव जैन, लीला देवी मूंदड़ा, माधवदास मोदी, पप्पूराम डारा, होडल सिंह चौधरी, श्रीमाल लोढ़ा, नरेश जाजड़ा, महावीर लूणिया (आए नहीं), देवेंद्र जोशी सूरसागर विधायक, प्रेमप्रकाश जालानी, लादूराम विश्नोई, सूरज विश्नोई, डॉ. आनंद गोयल, गणपत सालेचा के पुत्र उत्तम सालेचा, जितेश दवे, अशोक चौहान, एनके जैन, विधायक अतुल भंसाली, एसएन भार्गव, जयंती प्रजापति, किशन प्रजापति, पीयूष (उदयपुर)। कार्यक्रम में शहर के प्रतिष्ठित बिजनेसमैन और वरिष्ठ समाजसेवी सुरेश राठी, शिवनारायण मूंदड़ा और श्याम बाहेती भी मौजूद थे।
डॉ. निर्मल गहलोत ने आभार जताया :
समिति के अध्यक्ष डॉ. निर्मल गहलोत ने कहा कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत वर्ष 2015 में हुई थी। पहले चरण में 400 विद्यार्थियों की क्षमता वाला छात्रावास तैयार कर लिया गया है और वर्तमान में यह पूर्ण क्षमता के साथ संचालित हो रहा है। इसमें अब तक 200 विद्यार्थी रक्षा क्षेत्र (NDA आदि) और 200 विद्यार्थी खेल व अन्य क्षेत्रों में राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं हेतु तैयार किए जाएंगे। परियोजना का लक्ष्य आने वाले समय में जोधपुर को शिक्षा और प्रशिक्षण का ऐसा केंद्र बनाना है, जहां से न केवल पश्चिमी राजस्थान बल्कि पूरे देश को योग्य, अनुशासित और राष्ट्रसेवी युवा मिलें। परियोजना के अंतर्गत संचालित विद्यालय को एक उत्कृष्ट मॉडल विद्यालय के रूप में बदलने की योजना है। इसके तहत आधुनिक शैक्षणिक व भौतिक संसाधनों से लैस संस्थान तैयार होगा, जिससे विद्यार्थियों को उच्चस्तरीय शिक्षा और प्रशिक्षण उपलब्ध हो सके।
परियोजना के प्रमुख बिंदु –
400 विद्यार्थियों के लिए छात्रावास की व्यवस्था
रक्षा (NDA आदि) एवं खेल क्षेत्र हेतु विशेष प्रशिक्षण केंद्र
आचार्य प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना
भारत के गौरवशाली इतिहास पर आधारित प्रदर्शनी कक्ष
कौशल विकास के माध्यम से रोजगार सृजन हेतु प्रशिक्षण केंद्र
प्रशासनिक सेवा परीक्षाओं की तैयारी हेतु प्रशिक्षण केंद्र
CBSE/ICSE बोर्ड स्तर पर शोध एवं अनुसंधान आधारित विद्यालय। डॉ. निर्मल गहलोत ने सभी अतिथियों का आभार जताया। इस मौके पर मौजूद स्टूडेंट्स, शहरवासियों, गणमान्य लोगों, दानदाताओं और भैया-बहनों के साथ शिक्षकों का भी डॉ. निर्मल गहलोत ने आभार जताया। कोषाध्यक्ष के रूप में प्रकाश जीरावला और सचिव के पद पर शम्भूसिंह चारण ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम के दौरान तरुण गहलोत, चंद्रशेखर, मंगलाराम, खीमाराम, धन्नाराम, ओपी माहेश्वरी, डॉ. लालसिंह राजपुरोहित, संदीप काबरा, नरपतसिंह, जोगाराम, राजेंद्र गहलोत, पीपी चौधरी, कैलाश चौधरी, जसवंत सिंह विश्नोई, रामनारायण सहित शहर के कई प्रतिष्ठित नागरिक, भैया-बहन, स्टूडेंट्स, खिलाड़ी, दानदाता और बिजनेसमैन, शिक्षाविद और विचारकों के साथ समाजसेवी मौजूद थे। कार्यक्रम में आरंभ में घोषवादन के साथ अतिथियों का स्वागत किया गया। सभी मेहमानों का तिलक आरती उतारकर द्वार पर बहनों द्वारा अभिवादन किया गया।
कार्यक्रम के आरंभ में एकेडमी और विद्या भारती की डॉक्युमेंटरी दिखाई :
कार्यक्रम आरंभ होने से पहले विद्या भारती और एकेडमी से संबंधित डॉक्युमेंटरी भी दिखाई गई। बताया गया कि 1952 में गोरखपुर से सरस्वती शिशु मंदिर के रूप में पौध लगाई गई। 1977 में विद्या भारती का गठन हुआ। आज देश भर में 14 हजार स्कूलों में 1 लाख से अधिक शिक्षक 32 लाख भैया-बहनों को पढ़ा रहे हैं। 88 हजार से अधिक अभावग्रस्त विद्यार्थी भी पढ़ रहे हैं। जोधपुर में 10 परिसर में 17 आदर्श विद्या मंदिर स्कूल संचालित हो रहे हैं। 1964 में पहला स्कूल सरदारपुरा में किराए की बिल्डिंग में शुरू किया गया था।
सदस्य मंडल
सदस्य मंडल में महेन्द्र दवे, अतुल भंसाली (विधायक), देवेंद्र सालेचा, रतनलाल डागा, प्रेमसिंह देवड़ा, गंगाविष्णु विश्नोई, मिश्रीलाल प्रजापति, योगेश बिड़ला (CA), विपिन पंवार सहित कई दिग्गज शामिल किए गए हैं।















