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Thursday, July 9, 2026, 6:26 pm

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन राजस्थान की जनता में भरेगा नव उल्लास : कल से गांवों-शहरों में शुरू होंगे शिविर, फिर जगी उम्मीद

राइजिंग भास्कर कॉलम : दिलीप कुमार पुरोहित

शिविरों को शुरू करने का निर्णय अच्छा…पर इसके लिए जमीनी तैयारी कितनी? अफसर कितने तैयार? कितना होमवर्क किया, राह की अड़चनों को कैसे दूर किया जाएगा? विवादों का निपटारा कैसे होगा? आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए एनजीओ की दादागीरी कैसे रौकी जाएगी? एनीमल संस्थाओं से कैसे पार पाया जाएगा? इस पर गौर करना जरूरी…कहीं ऐसा नहीं हो कि वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान की तरह यह अभियान भी दम तोड़ दे…

17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म दिन है। सबसे पहले हम प्रधानमंत्री जी को बधाई और शुभकामनाएं देते हैं और भगवान से प्रार्थना करते हैं कि वे दीर्घायु हों और हिन्दुस्तान का ऐसे ही नेतृत्व करते रहें। उनके नेतृत्व में भारत फले-फूले। राजस्थान में प्रधानमंत्री मोदीजी के जन्मदिन के साथ ही एक एक ऐसे अभियान की शुरुआत होने जा रही है, जिसकी जरूरत थी। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी ऐसे शिविर शुरू किए थे। जिनका कुछ लाभ भी मिला, लेकिन अधिकतर वे शिविर राजनीति की भेंट चढ़ गए। लोग आज भी शिकायतें लेकर भटक रहे हैं। तो 17 सितंबर 2025 से प्रदेशभर में आयोजित हो रहे सेवा शिविर वास्तव में केवल सरकारी योजनाओं की औपचारिकता भर नहीं हैं, बल्कि इन्हें सामाजिक परिवर्तन और जनकल्याण के लिए एक मजबूत कड़ी माना जाना चाहिए। जिस प्रकार से ग्रामीण और शहरी दोनों स्तरों पर इन शिविरों की योजना बनाई गई है, उससे स्पष्ट है कि सरकार “अंत्योदय” की भावना को व्यवहार में उतारने के लिए कटिबद्ध है। लेकिन देखना यह है कि इसके लिए जमीनी तैयारी कितनी है? अफसर कितने तैयार हैं? कितना होमवर्क किया गया है? राह की अड़चनों को कैसे दूर किया जाएगा? विवादों का निपटारा कैसे होगा? आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए एनजीओ और एनीमल संगठनों की दादागिरी पर कैसे पार पाया जाएगा?

हालांकि शिविरों में न केवल प्रशासनिक कार्यों को सरल बनाने का प्रयास है, बल्कि इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, सड़क-बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ नागरिक अधिकारों के दस्तावेज़ उपलब्ध कराने पर भी खास ध्यान दिया गया है। ग्रामीण और शहरी दोनों स्तरों पर नागरिकों की समस्याओं को उनके ही गांव या मोहल्ले में सुलझाना एक बड़ा सुधार है।

ग्रामीण सेवा शिविर: गांव की आत्मा को सशक्त बनाना

1. सड़क, बिजली और नामांकन की दिशा में क्रांतिकारी कदम

ग्रामीण इलाकों में शिविरों का पहला लक्ष्य है – बुनियादी ढांचे की मजबूती। सड़क खोलना, आपसी सहमति से विभागीय नामांतरण, भूमि रिकॉर्ड का निस्तारण, लम्बित नोटिसों और फार्म रजिस्ट्रेशन का निपटारा – ये सब उस सोच को दर्शाता है कि सरकार गांवों को आधुनिक भारत के साथ जोड़ना चाहती है।

2. पहचान और प्रमाणपत्रों की सरल उपलब्धता

गांवों में जन्म प्रमाण-पत्र, जाति प्रमाण-पत्र, निवास पत्र जैसी बुनियादी चीजें प्राप्त करने के लिए वर्षों चक्कर लगाने पड़ते थे। अब शिविरों में ही यह सब उपलब्ध कराया जा रहा है। यह कदम न केवल पारदर्शिता लाएगा बल्कि ग्रामीणों का विश्वास प्रशासन पर मजबूत करेगा।

3. गरीबी उन्मूलन और सामाजिक सुरक्षा

10 हज़ार और उससे अधिक गांवों में दीनदयाल अंत्योदय गरीब ग्राम योजना, पीएमजेडीवाई, पीएमजेजेबीवाई, पीएमएसबीवाई, अटल पेंशन योजना जैसी कई सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का प्रचार-प्रसार और कार्ड वितरण किया जाएगा। इससे ग्रामीण समाज में सुरक्षा और आत्मविश्वास बढ़ेगा।

4. शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष जोर

शिविरों में विद्यालयों की मरम्मत, छात्राओं हेतु सड़क सुरक्षा उपाय, नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण और आयुष्मान कार्ड वितरण जैसी गतिविधियाँ दर्शाती हैं कि सरकार ग्रामीण भारत की सबसे कमजोर कड़ी को सुदृढ़ करना चाहती है।

5. किसानों और पशुपालकों के लिए राहत

पशुओं की जांच, इलाज और टीकाकरण; एनएफएसए अंतर्गत जीवित पात्रता का निस्तारण; किसानों के ई-मित्र समाधान – ये सब ग्रामीण आजीविका की रीढ़ को मजबूत करने के प्रयास हैं।

शहरी सेवा शिविर: शहरों की समस्याओं का जमीनी समाधान

1. स्वच्छता और प्रकाश व्यवस्था में सुधार

शहरी शिविरों का पहला उद्देश्य है शहरों को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना। बंद पड़ी स्ट्रीट लाइट्स को चालू करना, सफाई व्यवस्था दुरुस्त करना और सार्वजनिक स्थलों की मरम्मत करवाना नागरिकों को प्रत्यक्ष राहत देगा।

2. प्रशासनिक सेवाओं की आसान उपलब्धता

जन्म, मृत्यु, विवाह पंजीयन, फायर एनओसी, ट्रेड लाइसेंस, साइनेज लाइसेंस, सीवर कनेक्शन, ओएफसी-मोबाइल टॉवर एनओसी, ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र आदि जारी करना। – ये सब अब शिविर में ही उपलब्ध होंगे। इससे न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा बल्कि नागरिकों को घर-आंगन के पास ही सुविधाएं मिलेंगी।

3. आधारभूत ढांचे का कायाकल्प

नाले-नालियों की मरम्मत, सीवर व्यवस्था दुरुस्त करना, फव्वारे और पार्कों का विकास, आवारा पशुओं की रोकथाम, मैनहोल का नवीनीकरण – ये सब शहरों की छवि को नई ऊंचाई देंगे।

4. जनकल्याण योजनाओं का लाभ

पीएम और सीएम स्वनिधि योजना के तहत आवेदन प्रापत करना। लंबित प्रकरणों को ऋण वितरण करना। अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, वृद्धावस्था, विधवा एवं विकलांग पेंशन आदि। – इन सभी योजनाओं का लाभ सीधे शिविरों में उपलब्ध होगा। इससे नागरिकों को न केवल राहत मिलेगी बल्कि “अधिकार आधारित समाज” की नींव भी रखी जाएगी। लीज होलड से फ्री होल्ड पट्‌टे (आंवटन नीति, कच्ची बस्ती, स्टेट ग्रांट के पट्‌टे, नियम 1974 के नियम 18 से 19 में आवंटित भूमि को छोड़कर)।

5. आवारा पशुओं को पकड़ना  

शहरी शिविरों के तहत आवारा पशुओं को पकड़ा जाएगा। अगर वाकई इसमें सफलता मिलती है तो राजस्थान की जनता को बड़ी राहत मिलेगी। क्योंकि आवारा पशुओं की वजह से आए दिन दुर्घटनाएं होती है। राह चलते आवारा पशुओं की वजह से किसी को भी चोट लग सकती है। आवारा कुत्ते तो कभी भी किसी को काट लेते हैं। लेकिन इसके लिए अभी जमीनी तैयारी नहीं हो पाई है। शिविरों में सबसे बड़ी समस्या आवारा पशुओं को पकड़ने की ही रहेगी। यही सबसे बड़ा मुद्दा खड़ा होने वाला है।

शिविर: नागरिक और प्रशासन के बीच पुल

शिविरों का सबसे बड़ा महत्व यह है कि ये नागरिक और प्रशासन के बीच एक विश्वास का पुल बनाते हैं। अब लोगों को दफ्तर-दर-दफ्तर भटकने की बजाय उनके ही क्षेत्र में समाधान मिलेगा। इससे शासन की छवि “लालफीताशाही से सेवा-प्रधान” की ओर परिवर्तित होगी।

सामाजिक दृष्टिकोण से महत्व

1. समानता की स्थापना – गाँव और शहर दोनों को बराबर तवज्जो।

2. नागरिक भागीदारी – शिविरों में आमजन को भी अपनी समस्याएँ रखने और तुरंत समाधान पाने का अवसर।

3. पारदर्शिता और जवाबदेही – हर काम खुले मंच पर होगा, जिससे गड़बड़ी की संभावना कम होगी।

4. समावेशी विकास – गरीब, पिछड़े, महिलाएँ, बुजुर्ग और दिव्यांग सभी को योजनाओं का लाभ।

भविष्य की संभावनाएं

अगर ये शिविर लगातार और नियमित रूप से आयोजित होते रहे तो:

गांव-शहर का फर्क घटेगा।

नागरिकों में सरकार के प्रति भरोसा बढ़ेगा।

योजनाओं का वास्तविक लाभ ज़रूरतमंद तक पहुंचेगा।

भ्रष्टाचार और देरी जैसी पुरानी समस्याएं कम होंगी।

“नए भारत” का सपना व्यवहारिक रूप लेगा।

लोकतंत्र की जड़ों को महत्वपूर्ण करने का अभियान 

शिविर केवल एक सरकारी आयोजन नहीं हैं, ये लोकतंत्र की जड़ों को मज़बूत करने का अभियान हैं। ग्रामीण शिविर गांव की आत्मा को सशक्त बनाएंगे और शहरी शिविर शहरों की धड़कन को व्यवस्थित करेंगे।

इन शिविरों के माध्यम से शासन जनता के द्वार पर पहुंचेगा। यही असली लोकतंत्र है – जब सरकार केवल आदेश देने वाली संस्था न रहकर सेवा करने वाली व्यवस्था में बदल जाए।

आज के संदर्भ में कहा जा सकता है कि ये शिविर “नए भारत” के निर्माण में आधुनिक पंचायतें बनकर उभरेंगे और जहां नागरिक की आवाज़ सुनी जाएगी और समाधान तुरंत मिलेगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो पिछली सरकारों की तरह ये शिविर भी रस्म अदायगी बनकर रह जाएंगे।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor