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Thursday, July 9, 2026, 8:36 am

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शारदीय नवरात्रा कल से…शक्ति की उपासना और नारी सशक्तिकरण का महापर्व

स्त्री केवल मां नहीं, बल्कि शक्ति स्वरूपा है। उसका सम्मान, उसकी साधना और उसकी शक्ति की रक्षा ही संसार को गतिशील और ऊर्जावान बनाए रख सकती है…
आलेख : दिलीप कुमार पुरोहित, ग्रुप एडिटर राइजिंग भास्कर

भारतीय संस्कृति में पर्व-त्योहार केवल उत्सव नहीं होते, बल्कि वे जीवन के गहन दार्शनिक और आध्यात्मिक संदेश अपने भीतर समेटे होते हैं। इन्हीं में से एक है शारदीय नवरात्रा, जो इस बार 22 सितंबर 2025 से प्रारंभ हो रहे हैं। नवरात्रा वर्ष में आने वाले दो प्रमुख नवरात्रों में से एक हैं। चैत्र नवरात्रा जहां नवसंवत्सर और प्रकृति के नवजीवन का प्रतीक होते हैं, वहीं शारदीय नवरात्रा शरद ऋतु की पवित्रता, शक्ति की जागृति और आध्यात्मिक साधना का प्रतीक हैं।

नवरात्रा का शाब्दिक अर्थ है – नौ रातें। यह नौ दिन-रातें शक्ति की उपासना, देवी मां के नौ स्वरूपों की साधना और आत्मशुद्धि का पर्व हैं। यह पर्व हमें बताता है कि स्त्री केवल मां नहीं, बल्कि शक्ति स्वरूपा है। उसका सम्मान, उसकी साधना और उसकी शक्ति की रक्षा ही संसार को गतिशील और ऊर्जावान बनाए रख सकती है।

शक्ति उपासना का दर्शन

भारतीय मनीषा ने जगत की सृष्टि में पुरुष और प्रकृति दोनों की भूमिका स्वीकार की है। जहां पुरुष तत्व स्थिर, साक्षी और चेतना का प्रतीक है, वहीं प्रकृति ही वह शक्ति है, जो सृष्टि को गति देती है। देवी महात्म्य और दुर्गा सप्तशती के अनुसार, जब-जब संसार में असुरता हावी होती है, तब-तब यही शक्ति विभिन्न रूप धारण कर धर्म और सत्य की रक्षा करती है।

नवरात्रा की साधना केवल देवी के पूजन तक सीमित नहीं है। यह साधना हमें यह स्मरण कराती है कि हमारे भीतर भी वही शक्ति है। हमें उसे पहचानना है, जागृत करना है और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उसका प्रयोग करना है।

नौ देवियों का महत्त्व और संदेश

नवरात्रा में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। प्रत्येक स्वरूप मानव जीवन को एक विशेष संदेश देता है। ये नौ रूप वास्तव में जीवन के नौ चरणों और मानवीय गुणों का प्रतीक हैं।

  1. शैलपुत्री – हिमालय पुत्री, स्थिरता और धैर्य की प्रतिमूर्ति।
    संदेश: जीवन में ऊंचाई प्राप्त करने के लिए दृढ़ता और धैर्य आवश्यक है।

  2. ब्रह्मचारिणी – तप, संयम और साधना का प्रतीक।
    संदेश: आत्मानुशासन ही महान उपलब्धियों का आधार है।

  3. चंद्रघंटा – साहस और वीरता का स्वरूप।
    संदेश: भय और अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े होना ही सच्चा साहस है।

  4. कूष्मांडा – ब्रह्मांड सृजन की शक्ति।
    संदेश: सृजनशीलता ही जीवन को अर्थपूर्ण और समाज को समृद्ध बनाती है।

  5. स्कंदमाता – मातृत्व, ममता और करुणा का प्रतीक।
    संदेश: प्रेम और करुणा ही मानवता का मूल आधार है।

  6. कात्यायनी – युद्ध और न्याय की देवी।
    संदेश: अन्याय और अधर्म के विरुद्ध संघर्ष ही धर्म है।

  7. कालरात्रि – अंधकार का नाश करने वाली।
    संदेश: जीवन के अंधकार को केवल ज्ञान और विश्वास से ही दूर किया जा सकता है।

  8. महागौरी – शांति, तपस्या और पवित्रता की देवी।
    संदेश: आत्मशुद्धि और सरलता ही दिव्यता की ओर ले जाती है।

  9. सिद्धिदात्री – सिद्धि और पूर्णता की अधिष्ठात्री।
    संदेश: आत्मसिद्धि ही जीवन का परम लक्ष्य है।

इन नौ देवियों के स्वरूप वास्तव में मानव जीवन के नौ गुणों की साधना हैं। यदि हम इन्हें आत्मसात करें, तो जीवन में समृद्धि, शक्ति और शांति तीनों ही प्राप्त हो सकते हैं।

नारी शक्ति और सशक्तिकरण का संदेश

नवरात्रा का सबसे बड़ा संदेश है – नारी ही शक्ति है। जिस प्रकार ब्रह्मांड की गति शक्ति के बिना संभव नहीं, उसी प्रकार समाज की गति भी स्त्री शक्ति के बिना असंभव है।

इतिहास गवाह है कि जब-जब स्त्री का सम्मान हुआ है, तब-तब समाज ने प्रगति की है। और जब स्त्री का अपमान हुआ है, तब-तब समाज पतन की ओर गया है। नवरात्रा हमें याद दिलाता है कि स्त्री को केवल देवी मानकर पूजना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यवहार में भी उसका सम्मान और अधिकार सुरक्षित करना आवश्यक है।

आज नारी शिक्षा, रोजगार और सामाजिक नेतृत्व के क्षेत्र में अग्रसर हो रही है। यह नवरात्रा हमें यह संकल्प लेने का अवसर देता है कि हम नारी शक्ति की उपेक्षा नहीं करेंगे, बल्कि उसे उसका उचित स्थान देंगे।

सुपर पॉवर के रूप में नौ देवियां

आधुनिक समय में हम ‘सुपर पावर’ शब्द का प्रयोग विज्ञान और तकनीक के लिए करते हैं। किंतु भारतीय संस्कृति में यह ‘सुपर पावर’ सदियों पहले ही परिभाषित हो चुकी थी – नौ देवियों के रूप में।

  • शैलपुत्री हमें स्थिरता का सुपर पावर देती हैं।

  • ब्रह्मचारिणी हमें आत्मबल का सुपर पावर देती हैं।

  • चंद्रघंटा हमें वीरता का सुपर पावर देती हैं।

  • कूष्मांडा हमें सृजन का सुपर पावर देती हैं।

  • स्कंदमाता हमें करुणा का सुपर पावर देती हैं।

  • कात्यायनी हमें न्याय का सुपर पावर देती हैं।

  • कालरात्रि हमें भयमुक्ति का सुपर पावर देती हैं।

  • महागौरी हमें पवित्रता का सुपर पावर देती हैं।

  • सिद्धिदात्री हमें पूर्णता का सुपर पावर देती हैं।

इन सुपर पावर्स की उपेक्षा करना अपने जीवन और समाज को असंतुलन की ओर धकेलना है। यह पर्व हमें चेतावनी भी देता है कि यदि हमने शक्ति का सम्मान नहीं किया, तो उसके विनाशकारी परिणाम होंगे।

नवरात्रा और साधना का महत्व

नवरात्रा केवल उत्सव नहीं है, बल्कि यह आत्मशक्ति जागरण का अवसर है। उपवास, जप, ध्यान और पूजन के माध्यम से साधक अपनी आत्मा को शुद्ध करता है। उपवास केवल भोजन का त्याग नहीं, बल्कि वासनाओं और बुराइयों का त्याग है।

इस अवधि में साधक अपने मन को एकाग्र कर आत्मावलोकन करता है। दीप जलाना अंधकार में प्रकाश का प्रतीक है, तो गरबा और डांडिया जैसे सामूहिक नृत्य शक्ति के आनंद का उत्सव हैं।

आधुनिक संदर्भ में नवरात्रा

आज का युग भौतिकता और तकनीक का है। लोग व्यस्तता में आध्यात्मिकता को भूलते जा रहे हैं। ऐसे में नवरात्रा हमें यह याद दिलाता है कि असली शक्ति भीतर है।

  • यदि समाज स्त्री शक्ति का सम्मान करेगा तो वह संतुलित रहेगा।

  • यदि परिवार स्त्री को समान अधिकार देगा तो वह मजबूत रहेगा।

  • और यदि व्यक्ति अपने भीतर की शक्ति को पहचानेगा, तभी वह सफल और सुखी रहेगा।

नवरात्रा का यह पर्व हमें व्यक्तिगत और सामूहिक दोनों स्तरों पर शक्ति का महत्व सिखाता है।

सृष्टि की मूल आधार शक्ति है और इस शक्ति का सम्मान ही प्रगति का मार्ग है

शारदीय नवरात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, यह जीवन दर्शन है। यह हमें बताता है कि सृष्टि की मूल आधार शक्ति है, और इस शक्ति का सम्मान ही प्रगति का मार्ग है।

नौ देवियों के स्वरूप हमें यह सिखाते हैं कि जीवन में धैर्य, संयम, साहस, सृजनशीलता, करुणा, न्याय, ज्ञान, पवित्रता और सिद्धि – ये नौ गुण आवश्यक हैं। यही गुण हमें सच्चा मनुष्य बनाते हैं।

आज जब समाज स्त्री के सम्मान और अधिकार पर चर्चा कर रहा है, तब नवरात्रा हमें यह स्पष्ट संदेश देता है कि नारी ही शक्ति है, नारी ही सृष्टि है और नारी ही भविष्य है।

अतः आइए, इस नवरात्रा में हम संकल्प लें –

  • शक्ति का सम्मान करेंगे,

  • नारी का आदर करेंगे,

  • और अपने जीवन में नौ देवियों के गुणों को आत्मसात करेंगे।

यही इस पर्व का वास्तविक संदेश है और यही हमारी संस्कृति की आत्मा भी।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor