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Thursday, July 9, 2026, 6:38 am

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उम्मीद की एक किरण है- हेल्पिंग पीपल ट्रस्ट : राष्ट्रीय अध्यक्ष पूनम पोहानी बोलीं- धन ही नहीं समय दान करके भी खुशियां बांटी जा सकती हैं

एक ऐसी संस्था जो 365 दिन सेवा कार्य करती हैं…छोटे-छोटे कार्यों के माध्यम से वंचित वर्ग, जरूरतमंद बच्चों और बुजुर्गों के चेहरों को खुशियों से रोशन कर रही हैं…संस्था की सोच है- छोटी मदद, छोटी पहल, हर समस्याओं का है हल
दिलीप कुमार पुरोहित. राखी पुरोहित. जोधपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

संस्थाएं बनती है और कुछ साल चलकर बंद भी हो जाती है या निष्क्रिय भी हो जाती है। लेकिन हेल्पिंग पीपल ट्रस्ट- उम्मीद की एक किरण का गठन रुकने के लिए नहीं हुआ है। इसकी राष्ट्रीय अध्यक्ष पूनम पोहानी ने संकल्प लिया है कि वह 365 दिन नई ऊर्जा के साथ सेवा कार्य करेंगी। इसके लिए वे अपनी व्यस्त दिनचर्या में समय निकाल कर और संतुलन बिठाकर रोज जुनून के साथ सेवा कार्य करती हैं। आगामी 10 दिसंबर को संस्था की ओर से 51 जोड़ों का सामूहिक विवाह भी करवाया जाएगा, जिसकी तैयारी चल रही हैं। हेल्पिंग पीपल ट्रस्ट राष्ट्रीय स्तर का संस्थान है और निस्वार्थ सेवा की भावना से कार्य कर रहा है। राइजिंग भास्कर ने संस्थान की राष्ट्रीय अध्यक्ष पूनम पोहानी से विशेष बातचीत की। यहां प्रस्तुत है बातचीत के संपादित अंश :

राइजिंग भास्कर : हेल्पिंग पीपल ट्रस्ट-उम्मीद की एक किरण की स्थापना का मूल उद्देश्य क्या था?

पूनम पोहानी : हैल्पिंग पीपल ट्रस्ट उम्मीद की एक किरण संस्था का मूल उद्देश्य सभी जरूरतमंद मनुष्यों और मूक पशु पक्षियों के लिये भोजन, रोजगार, शिक्षा और महिलाओं को सशक्त बनाना है।

राइजिंग भास्कर : आपको इस सेवा कार्य से जुड़ने की प्रेरणा कहां से मिली?
पूनम पोहानी : इस सेवा कार्य से जुड़ने की प्रेरणा मुझे अपने परिवार से मिली।
राइजिंग भास्कर : संस्था किस प्रकार जरूरतमंद और वंचित वर्ग के जीवन में बदलाव लाने का प्रयास कर रही हैं? 

पूनम पोहानी : संस्था द्वारा ऐसे परिवारों और बच्चों को मदद मिल रही है जो कि बेसहारा है।

राइजिंग भास्कर : गरीब कन्याओं के सामूहिक विवाह से समाज में क्या बदलाव आ सकता है? 

पूनम पोहानी : गरीब कन्याओं के सामूहिक विवाह से फिजूलखर्च बचेगा और काफी महिलाओं और बेटियों को रोजगार भी मिल सकता है।

राइजिंग भास्कर : वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के साथ समय बिताने और उनके मनोरंजन की पहल के पीछे आपकी सोच क्या रही है? 

पूनम पोहानी : वृद्धाश्रम में जो बुजुर्ग रहते हैं वो अपनी व्यथा सुनाते हैं । आज की पीढ़ी अपने माता पिता को बोझ समझती है। उनके लिए वृद्धाश्रम सबसे अच्छी जगह है। देखभाल के साथ मनोरंजन भी उन्हें वहां मिलता है काफी अलग अलग संस्थाएं उनका सहयोग भी करती हैं । जिससे उन्हें एक सपोर्ट मिलता है।

राइजिंग भास्कर :  संस्था अब तक कितने सेवा प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक कर चुकी है? कौनसा कार्य आपको सबसे यादगार लगता है? 

पूनम पोहानी : संस्था अभी तक पिछले 6 वर्षों से कई लोगो की मदद कर चुकी है । इसमें से बेटियों को रोजगार और आत्मरक्षा शिविर सबसे यादगार है ।

राइजिंग भास्कर :  समाज के विभिन्न वर्गों को संस्था से किस प्रकार सहयोग मिलता है? 

पूनम पोहानी : समाज से जुड़े लोगों और सदस्यों से सहयोग मिलता ही रहता है तभी सारे काम होते हैं।

राइजिंग भास्कर : आपकी दृष्टि में सेवा कार्य करते समय सबसे बड़ी चुनौती क्या होती है और उसे कैसे पार करते हैं? 

पूनम पोहानी : सेवा कार्य करते समय सबसे बड़ी चुनौतियां सभी को साथ लेकर चलना होता है। बाहर के कुछ लोग मिलकर हमे गिराने की कोशिश भी करते है । और कुछ लोगो को जलन भी होती है कि इनके सारे काम अच्छे कैसे हो जाते हैं । पर इन सबकी परवाह किए बिना हम अपनी सेवाएं 365 दिन जारी रखते हैं।

राइजिंग भास्कर : हेल्पिंग पीपल ट्रस्ट महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए क्या कदम उठा रही है? 

पूनम पोहानी : उन्हें शिक्षा और रोजगार में मदद करके ट्रस्ट अपनी भागीदारी निभा रहा है ।

राइजिंग भास्कर : संस्था गरीब और जरूरतमंदों तक कैसे पहुंच बनाती है? 

पूनम पोहानी : एक दूसरे के जरिये पहुंचते हैं। जहां जरूरत होती है । उनके घर जाकर निरीक्षण किया जाता है।

राइजिंग भास्कर : आज के समय में सामाजिक संस्थाओं की भूमिका आप किस प्रकार देखती हैं?

पूनम पोहानी : सामाजिक संस्थाओं के जरिये जरूरतमंद लोगों को अच्छी मदद मिल रही है ।

राइजिंग भास्कर : भविय में संस्थान किन प्रमुख क्षेत्रों में काम करने की योजना बना रही है?

पूनम पोहानी : शिक्षा और रोजगार की जरूरत ज्यादा है। इस दिशा में कार्य करने का प्रयास किया जाएगा।

राइजिंग भास्कर : क्या सरकार से आपको सहयोग मिलता है? 

पूनम पोहानी : हमें सरकार से कोई सहयोग प्राप्त नहीं हैं।

राइजिंग भास्कर : संस्था की गतिविधियों से प्रभावित होकर यदि कोई व्यक्ति जुड़ना चाहे तो वह कैसे जुड़ सकता है? 

पूनम पोहानी : हमसे जुड़ने के लिये एक फ़ोटो, एक आधार कार्ड की कॉपी और 3000 रुपए मूक पशु पक्षियों की सेवा के लिये सहयोग करके जुड़ सकते है आजीवन के लिए।

राइजिंग भास्कर : आपके नेतृत्व में संस्था को किन उपलब्धियों पर सबसे अधिक गर्व है? 

पूनम पोहानी : हमारी संस्था के सभी कार्यों पर गर्व है ।

राइजिंग भास्कर : आज की युवा पीढ़ी को समाजसेवा के प्रति प्रेरित करने के लिए आप क्या संदेश देना चाहेंगी?

पूनम पोहानी : आज की युवा पीढ़ी को यही संदेश देना चाहूंगी कि चाहे हम कही भी रहें । जहां कोई जरूरतमंद दिखे मदद जरूर करें ।

राइजिंग भास्कर : क्या आपको लगता है कि सेवा कार्य केवल दान तक सीमित है या इसमें समय और संवेदनशीलता का योगदान अधिक महत्वपूर्ण है?

पूनम पोहानी : सेवा कार्य सिर्फ दान तक सीमित नही है । बल्कि समय देकर लाखों परिवारों को खुशियां देने का कार्य करता है । इसके लिये समय देना बहुत जरूरी है।

राइजिंग भास्कर : संस्था का कार्यक्षेत्र किन-किन राज्यों या क्षेत्रों तक फैला हुआ है?

पूनम पोहानी : संस्था का कार्य चेन्नई, जोधपुर, दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद, इंदौर, भोपाल आदि में गांवों तक फैला हुआ है।

राइजिंग भास्कर : आप व्यक्तिगत जीवन और सामाजिक सेवा के बीच संतुलन कैसे बनाती हैं?

पूनम पोहानी : अपने सभी कार्य सुबह जल्दी उठकर करने से संतुलन बनाया जा सकता है ।

राइजिंग भास्कर : आने वाले 5-10 वर्षों में आप हेल्पिंग पीपल ट्रस्ट- उम्मीद की एक किरण को कहां देखना चाहती हैं? 

पूनम पोहानी : आने वाले वर्षों में पूरे भारत में उम्मीद की एक किरण बनकर सबकी सेवा में राष्ट्रपति पुरस्कार के साथ देखना चाहती हूं ।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor