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Thursday, July 9, 2026, 6:38 am

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सक्षम का प्रयास हर आंख में हो उजास…2019 में कुंभ प्रयागराज, 2021 में हरिद्वार, 2025 में महाकुंभ प्रयागराज और रामदेवरा मेले में नेत्र महाकुंभ से चक्षु चेतना का अनुष्ठान

-समदृष्टि, क्षमता विकास एवं अनुसंधान मंडल अर्थात् सक्षम दिव्यांगों के सशक्तिकरण के लिए समर्पित राष्ट्रीय संगठन है। यह 20 जून 2008 से सभी प्रकार की दिव्यांगता निवारण के क्षेत्र में कार्य कर रही है।
-सक्षम संपूर्ण देश में दिव्यांग सेवा केंद्रों के माध्यम से दिव्यांगजनों के स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वावलंबन और सामाजिक विकास के लिए कार्यरत है। सामाजिक पुनर्वास, सरकार द्वारा उपलब्ध योजनाओं की दिव्यांगजनों को जानकारी तथा उनके स्वाभिमानपूर्वक जीवन स्तर को बनाने में सहयोग करने के लिए प्रयासरत एक संस्था के रूप में उभरी है।

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

समदृष्टि, क्षमता विकास एवं अनुसंधान मंडल अर्थात् सक्षम…। 20 जून 2008 से स्थापित राष्ट्रीय संस्थान है जो दिव्यांगता निवारण और दिव्यांगजनों की शिक्षा, स्वावलंबन, सामाजिक विकास के लिए कार्यरत है। संस्थान सामाजिक पुनर्वास, सरकार द्वारा उपलब्ध योजनाओं की दिव्यांगनों को जानकारी देने और उनके स्वाभिमानपूर्वक जीवन स्तर को बनाने में सहयोग करता है।

सक्षम का मानना है कि सभी इंद्रियों में हमारी आंखें सर्वश्रेष्ठ हैं। हम नेत्र से दुनिया की विविधता को देखते हैं। देश में 1.25 करोड़ लोग पूर्ण अन्धत्व या अल्प दृष्टि से ग्रसित हैं, जिसमें से 15 लाख लोग कॉर्नियल अंधत्व से ग्रसित हैं। इन लोगों को अगर कॉर्निया मिल जाए तो इनके जीवन का तिमिर मिट सकता है। इसे ध्यान में रखकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सर कार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल की प्रेरणा से सक्षम के कार्यकर्ताओं द्वारा संपूर्ण देश में नेत्र स्वास्थ्य जागरूकता, नेत्रदान और अंधत्व मुक्ति के लिए 2019 से नेत्रकुंभ नामक नेत्र जांच अभियान चलाया गया।

नेत्रकुंभ का इतिहास : 2019 में प्रयागराज से आगाज, रामदेवरा मेले में इस साल चौथा आयोजन

नेत्रकुंभ का प्रारंभ 2019 में प्रयागराज में कुंभ मेले में डाॅ. कृष्ण गोपाल के मार्गदर्शन में हुआ। तत्पश्चात 2021 में हरिद्वार तथा इसी वर्ष प्रयागराज महाकुंभ के अवसर पर तीसरी बार नेत्र कुंभ का आयोजन हुआ जो 53 दिनों तक चला। इन तीनों नेत्र जांच के महाशिविरों के माध्यम से कुल 488729 नेत्र जांच, 356947 चश्मा व दवा वितरण तथा 17069 भाई-बहनों के ऑपरेशन किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में चौथा नेत्र महाकुंभ रामदेवरा मेले में रखा गया। रामदेवरा मेले में जहां राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा इत्यादि प्रांतों से बड़ी भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, ऐसे नेत्र कुंभ का हजारों लोगों को फायदा मिला।

रेगिस्तान में नेत्र समस्या सर्वाधिक : इसलिए रामदेवरा चुना गया 

रेगिस्तानी क्षेत्र में भीषण गर्मी, धूल भरी आंधियां पूरे वर्ष चलती है। ये धूल व रेत के कण लोगों की आंखों में चले जाते हैं, जिसके कारण लंबे समय में आगे चलकर यह लापरवाही दृष्टि दोष में परिवर्तित हो जाती हैं। रेगिस्तानी इलाके में नेत्र समस्या सर्वाधिक होती है। इसलिए इस बार नेत्र महाकुंभ का आयोजन रामदेवरा में रखा गया जहां स्थानीय लोगों के अलावा देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं को इसका लाभ मिला। संरक्षक मंडल में 16 सदस्य बनाए गए। प्रमुख मठाधीशों व संतजनों को सम्मिलित किया गया।

33 दिन चला नेत्र महाकुंभ : 1 लाख से अधिक नेत्र जांच, 85 हजार से ज्यादा को निशुल्क चश्मे-दवाइयां तथा 6 हजार से अधिक का सर्जरी हेतु चयन  

नेत्रकुंभ में 1 लाख 25 हजार लोगों की नेत्र जांच, एक लाख लोगों को निःशुल्क चश्मे और दवाइयां तथा 11 हजार सर्जरी का लक्ष्य रखा गया। 33 दिवसीय आयोजन में 102797 नेत्र जांच, 85337 लाभार्थियों को नि:शुल्क चश्मे व दवाइयां तथा 6234 लोगों को निःशुल्क मोतियाबिन्द सर्जरी के लिए चिह्नित किया गया।

इनका रहा सहयोग : जाट धर्मशाला में हुआ आयोजन 

1 अगस्त से आरंभ होकर 2 सितंबर तक चले नेत्र महाकुंभ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रेरित दिव्यांगजनों के लिए समर्पित राष्ट्रीय संगठन सक्षम संस्था, जयपुर ने अन्य सहयोगी संगठनों नेशनल मेडिकोज आर्गेनाइजेशन, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, सेवा भारती, भारत विकास परिषद, विश्व हिंदू परिषद्, विद्या भारती, सीमाजन कल्याण समिति, राष्ट्रीय शिक्षक संघ, जनसेवा समिति जैसलमेर और राजस्थान सरकार के सहयोग से आयोजन किया। आयोजन जाट धर्मशाला में हुआ। सेवाभावी कार्यकर्ताओं ने अपना योगदान दिया। पूरे प्रदेश व देश से नेत्र जांच विशेषज्ञ, ऑप्टोमेट्रिस्ट व तकनीशियनों के प्रबन्ध व संयोजन के लिए डॉक्टरों व तकनीकी सलाहकारों की 21 सदस्य सलाहकार समिति का गठन किया गया, जिसके सदस्यों ने चिकित्सा प्रबंधों का उन्नत व निर्बाध समायोजन किया।

अलख :  भजन संध्या का जगह-जगह आयोजन 

बाबा रामदेव नेत्रकुंभ का अधिक से अधिक प्रचार हो इसके लिए भजन संध्याओं का आयोजन रखा गया। प्रकाश माली ने जोधपुर, जयपुर, गंगानगर, बेंगलोर, भीलवाड़ा और बीकानेर में भजन संध्याएं की।  27 जून 2025 को भूमि-पूजन किया। 24 बीघा भूमि में फैले विशाल नेत्रकुंभ परिसर की भव्यता व वैभव देखने लायक था।  7 विशाल जर्मन हेंगर का निर्माण किया गया । पंडाल वाटरप्रूफ और वातानुकूलित थे। 3 द्वार बनाए गए जिनके नाम मरु प्रदेश के लोकदेवता पाबूजी, तेजाजी और विश्नोई समाज के प्रवर्तक गुरु जम्भेश्वर भगवान के नाम पर रखे गए। गुरु बालीनाथ स्वागत केंद्र, श्री द्वारिकाधीश सभागार, श्री अजमल नेत्र सेवा केंद्र, श्री वीरमदेव चश्माघर, रानी नेतलदे अधिकारी आवास, श्री रतना राईका निवास, बहिन लाछा बाई निवास, श्री हरजी भाटी निवास, माता मेणा दे भोजनशाला, बहिन डालीबाई रसोईघर, बहिन सुगना बाई भंडार कक्ष और लक्खी बंजारा चिकित्सा भण्डार कक्ष बनाए गए। 600 से अधिक कार्यकर्ताओं के स्थाई निवास को देखते हुए सुरक्षा और स्वच्छता का संपूर्ण प्रबंध किया। सीसीटीवी कैमरे लगाए गए और प्रोफेशनल सिक्योरिटी टीम के द्वारा परिसर की बाहरी सुरक्षा की गई। पूरे परिसर को स्वच्छ व साफ-सुथरा रखने की जिम्मेदारी दी गई। रोगी की आंखों की रोशनी कितनी अच्छी है। तत्पश्चात स्लिट लैंप, जो कि आंखों का माइक्रोस्कोप होता है की मदद से आंखों के विभिन्न हिस्सों और आंखों की संरचना को विस्तार से देखा जाता था, जिसको करने के पश्चात नेत्ररोग विशेषज्ञ रोगी को नंबर व लेंस जैसे दूर का या पास का या दोनों तरह का लगेगा, निर्धारित करते थे। नेत्ररोग विशेषज्ञ द्वारा रोगी की सटीक जानकारी को पर्ची में अंकित करने के पश्चात लाभार्थी की पर्ची को चश्मा बनने के लिए आयोजन समिति द्वारा स्थापित चश्मा फैक्ट्री में भेजा जाता था । हाथों-हाथ आधे घण्टे में लाभार्थियों को चश्मा प्रदान किया जाता था।

अत्याधुनिक मशीनें : गंभीर रोगियों का उपचार

नेत्रकुंभ में 4 हजार से भी अधिक ऐसी माताओं और वरिष्ठ नागरिकों की पहचान की गई जिनकी आंखों की ज्योति उपचार के अभाव में शीघ्र ही समाप्त होने वाली थी। इन रोगियों को तत्काल आधुनिक याग लेजर और टोनॉमिटर मशीन के माध्यम से उपचार प्रदान किया गया और इनकी नेत्रज्योति को सुरक्षित किया गया।

संकल्प : नेत्रदान के लिए प्रेरित किया 

देश में सवा करोड़ लोग पूर्ण अन्धत्व से पीड़ित हैं जिनमें से 15 लाख लोग कॉर्निया अन्धत्व से पीड़ित हैं, जिनको अगर कॉर्निया मिल जाए तो उनको पुनः दिखना प्रारंभ हो सकता है। नेत्र महाकुंभ में 1801 लाभार्थियों ने नेत्रदान के संकल्प पत्र भरे। नेत्रदान के लिए लोगों को प्रेरित किया गया।

शिविर :  होम्योपैथी, आयुर्वेदिक व एलोपैथी चिकित्सा सुलभ करवाई

नेत्र महाकुंभ में होम्योपैथी, आयुर्वेदिक और एलोपैथी चिकित्सा व्यवस्था की गई। पहली बार बीएसएफ के उन जवानों तक नेत्र चिकित्सा सेवा पहुंचाई गई जो पाकिस्तान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर दिन-रात देश की रक्षा में मुस्तैद रहते हैं। 17 चौकियों पर नेत्रकुंभ ने पहुंच बनाई।  वैन सीधे 17 सीमा चौकियों तक पहुंची और वहां तैनात लगभग 250 बीएसएफ जवानों की आंखों की जांच, परामर्श और उपचार किया गया।

नौनिहालों की सेवा : विद्यार्थियों की नेत्र जांच भी की 

रामदेवरा व आसपास के सभी स्कूलों के विद्यार्थियों को भी नेत्र जांच का लाभ मिले इसके लिए एक टोली ने घूम-घूम कर प्रत्येक स्कूल के विद्यार्थियों की नेत्र जांच की।

दिव्यांग सामूहिक विवाह :  फरवरी-मार्च में होगा आयोजन  

मीडिया प्रभारी विजय अग्रवाल ने बताया कि सक्षम की ओर से अगले साल फरवरी-मार्च में श्री गंगानगर में दिव्यांगजनों के लिए सामूहिक विवाह प्रस्तावित है। इसमें राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली राज्यों से दिव्यांग जोड़े शामिल होंगे।

सम्मान :  नेत्र कुंभ के सहयोगी जयपुर में होंगे सम्मानित  

मीडिया प्रभारी विजय अग्रवाल ने बताया कि नेत्र कुंभ में सहयोग देने वालों का जयपुर में सम्मान किया जाएगा। इसकी तैयारियां की जा रही है। संभवतया 26 अक्टूबर को आयोजन होगा। डेट जल्दी ही घोषित कर दी जाएगी। इसमें नेत्रकुंभ की सहयोगी संस्थाओं और सहयोग करने वाले लोगों को सम्मानित किया जाएगा।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor