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जन-जन का मंगल… सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है : सुरेश डोसी

 

जनमंगल संस्थान के सचिव सुरेश डोसी से विशेष साक्षात्कार 

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर 

सेवा के उद्देश्य को लेकर जनमंगल संस्थान अपने नाम के अनुरूप जन-जन के मंगल के लिए काम कर रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, जन सहयोग और विविध क्षेत्राें में आगे आकर जनमंगल संस्थान ने सेवा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। संस्थान के सचिव सुरेश डोसी से राइजिंग भास्कर ने लंबी बातचीत की। यहां पेश है संपादित अंश-

राइजिंग भास्कर : जनमंगल संस्थान की स्थापना कैसे हुई और इसकी प्रेरणा कहां से मिली?

सुरेश डोसी : जनमंगल संस्थान का जन्म 13 सितंबर 2004 को एक छोटे से संकल्प से हुआ था — जन के मंगल के लिए निरंतर प्रयास करना। पहले भी हम सेवा कार्यों से जुड़े थे, लेकिन संस्थागत रूप में इसे आगे बढ़ाने का विचार इसलिए आया ताकि समाजसेवा अधिक संगठित और प्रभावी ढंग से हो सकें। प्रेरणा हमें हमारे वरिष्ठों और समाज के उन लोगों से मिली जिन्होंने हमेशा “सेवा ही जीवन का सार है” का संदेश दिया।

राइजिंग भास्कर : संस्था ने कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के दौरान कैसे सेवा कार्य किए?

सुरेश डोसी: वह समय मानवता की परीक्षा का था। हमारी संस्था ने प्रशासन और पुलिस के सहयोग से 1,63,753 पैकेट भोजन ज़रूरतमंदों तक पहुंचाए। साथ ही चिकित्सा परामर्श शिविर और दवाइयों की व्यवस्था की। कई स्थानों पर अंतिम संस्कार भी पूरे राजकीय नियमों के अनुसार कराए। यह सब हमारे सेवाभावी साथियों और नागरिक सहयोग से संभव हो सका।

राइजिंग भास्कर :  शिक्षा के क्षेत्र में संस्थान के क्या विशेष योगदान हैं?

सुरेश डोसी: विकसित भारत का सपना शिक्षा के बिना अधूरा है। इसलिए जनमंगल संस्थान हर साल ज़रूरतमंद बच्चों को स्टेशनरी उपलब्ध करवाता है, मेधावी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और उनकी फ़ीस भरने में मदद करता है। हम विद्यार्थियों का सम्मान भी करते हैं और ग्रीष्मकाल में विभिन्न हॉबी क्लासेस का आयोजन कराते हैं ताकि बच्चे अपनी प्रतिभा को पहचान सकें।

राइजिंग भास्कर : खेलों के क्षेत्र में संस्था की भूमिका भी काफ़ी सराही जाती है। इस पर आप क्या कहना चाहेंगे?
सुरेश डोसी: बिलकुल। “खेलोगे कूदोगे तो बनोगे नवाब” ये बात हमने गंभीरता से ली है। हमारे जनमंगल परिवार के कोच विनोद आचार्य ने कई ऐसे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार किए हैं जिन्होंने भारत का नाम ऊंचा किया। संस्था ने मुक्केबाज़ी और वुशु खेलों में भी अनेक प्रतियोगिताएँ आयोजित कीं। हमारा उद्देश्य है कि आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों को अवसर और मार्गदर्शन मिले ताकि वे अपने सपनों को साकार कर सकें।
राइजिंग भास्कर : जनमंगल संस्थान ने महिलाओं के आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में कौन से प्रयास किए हैं?

सुरेश डोसी : जब कोरोना काल में रोजगार एक चुनौती बन गया, तब कई महिलाओं ने अपने घर से छोटे-छोटे उद्योग शुरू किए। हमने “उड़ान-1” और “उड़ान-2” नामक मेले आयोजित किए जिनमें 101 और 156 स्टॉल लगाए गए। इसका उद्देश्य था – इन महिलाओं को उनके उत्पाद प्रदर्शित करने और पहचान दिलाने के लिए मंच देना। आज उनमें से कई महिलाएं स्वावलंबी हैं और अपनी पहचान खुद बना चुकी हैं।

राइजिंग भास्कर : संस्था के रक्तदान अभियान के बारे में कुछ बताओ? 

सुरेश डोसी : रक्तदान जनमंगल का सबसे पुराना और निरंतर चलने वाला अभियान है। जब हमने शुरुआत की थी, तब सोशल मीडिया जैसा प्रचार माध्यम नहीं था। फिर भी हमने हर साल सैकड़ों यूनिट रक्त एकत्रित किए — 2012 में 108 यूनिट, 2013 में 156, 2017 में 302 और 2018 में 421 यूनिट। इस निरंतरता ने जनमंगल को समाज में “रक्तदान की पहचान” बना दिया।

राइजिंग भास्कर : संस्था का “मृत्यु प्रमाण पत्र सहयोग कार्य” क्या है?

सुरेश डोसी : यह बहुत संवेदनशील कार्य है। कई बार किसी परिवार में किसी सदस्य के निधन के बाद प्रमाण पत्र और कागजी प्रक्रिया में परेशानी होती है। हमारी संस्था ऐसे परिवारों की मदद करती है ताकि उन्हें सरकारी कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें और समय पर आवश्यक दस्तावेज़ मिल जाएं। यह सेवा छोटे परंतु बहुत प्रभावशाली कार्यों में से एक है।

राइजिंग भास्कर : संस्था के सदस्यों के जन्मदिन पर विशेष परंपरा निभाई जाती है, उसके बारे में बताइए।

सुरेश डोसी : जी हां, हमारे यहां जन्मदिन उत्सव नहीं, सेवा पर्व के रूप में मनाया जाता है। सदस्य अपने जन्मदिन पर गरीबों को भोजन करवाते हैं या वस्त्र वितरण करते हैं। यह परंपरा हमारे बीच “देने की खुशी” को जीवित रखती है और हमें याद दिलाती है कि सच्ची खुशी दूसरों की सेवा में है।

राइजिंग भास्कर : संस्था के अब तक के 21 वर्षों में सबसे बड़ी उपलब्धि क्या मानते हैं?

सुरेश डोसी : हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि हम निरंतर हैं। समय बदला, परिस्थितियां बदलीं, लेकिन “सेवा का प्रवाह” कभी नहीं रुका। हमने कभी प्रसिद्धि की चिंता नहीं की — बस इतना सोचा कि ज़रूरतमंद तक मदद पहुंचे। आज जनमंगल संस्थान एक परिवार की तरह है जहां हर सदस्य कुछ न कुछ अच्छा करने की प्रेरणा लेकर आता है।

राइजिंग भास्कर : आगे की योजनाएं क्या हैं?

सुरेश डोसी : आने वाले वर्षों में हमारा ध्यान तीन क्षेत्रों पर रहेगा — शिक्षा, आत्मनिर्भरता और पर्यावरण। हम अधिक बच्चों को छात्रवृत्ति देना चाहते हैं, महिलाओं के स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण केंद्र खोलना चाहते हैं और पौधरोपण के साथ-साथ “हर घर हरियाली” अभियान को प्रोत्साहन देना चाहते हैं।

राइजिंग भास्कर : अंत में, जनमंगल संस्थान की विचारधारा को एक वाक्य में कैसे परिभाषित करेंगे?

सुरेश डोसी : “सेवा कोई अवसर नहीं, बल्कि जीवन की आवश्यकता है।” हमारा उद्देश्य है कि समाज हमें नहीं, बल्कि हमारे कार्यों को याद रखे। जब तक जीवन है, तब तक सेवा का प्रवाह चलता रहे — बिलकुल जीवनदायिनी जलधारा की तरह।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor