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Thursday, July 9, 2026, 3:19 pm

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बिखरे नहीं, हम साथ चलें,एकता का दीप फिर से जलाएं…कवियों ने अप्प दीपो भव की भावना जगाई

रामेश्वर साधक ने ” हे विधात हे ज्ञान दात मे च मेधा दियताम” ईश वंदना से कार्यक्रम शुभारम्भ किया

राखी पुरोहित. बीकानेर

स्वास्थ्य एवं साहित्य संगम राष्ट्रीय कवि चौपाल 537 वीं कड़ी शैक्षिक जगत को समर्पित रही । आज की सरस्वती सभा आनन्द राज पारीक (जिला अध्यक्ष शिक्षक संघ प्रगतिशील) भैरव प्रसाद कथक, श्री मती मधुरिमा सिंह, सरदार अली पड़िहार आदि मंच सुशोभित हुए। कार्यक्रम अध्यक्ष श्री मती मधुरिमा सिंह ने बताया। मुख्य अतिथि आनंद पारीक बोद्धिक के साथ संदेश दिया स्वास्थ्य एवं साहित्य संगम राष्ट्रीय कवि चौपाल 537 वीं कड़ी शैक्षिक जगत को समर्पित रही आज की सरस्वती सभा आनन्द राज  पारिक (जिला अध्यक्ष शिक्षक संघ प्रगतिशील) भैरव प्रसाद कथक, श्री मती मधुरिमा सिंह, सरदार अली परिहार आदि मंच सुशोभित हुए, रामेश्वर साधक ने ” हे विधात हे ज्ञान दात मे च मेधा दियताम” ईश वंदना से कार्यक्रम शुभारम्भ किया।

कार्यक्रम अध्यक्ष श्रीमती मधुरिमा सिंह ने काव्य माध्यम से बताया,.. कलयुग में भगवान तुम्हारा हमसे क्या सम्बंध नहीं, धरती पर फिर से आओगे कोई ऐसा अनुबंध नहीं,… मुख्य अतिथि आनंद पारीक बोद्धिक के साथ संदेश दिया … चलो आज ये संकल्प लें, टूटे दिलों को फिर से जोड़ लें। बिखरे नहीं, हम साथ चलें,एकता का दीप फिर से जलाएं… विशिष्ट अतिथि बीपी कथक सैकड़ों खून हजारों डकेतियां,.. बेशुमार दंगे लाखों फिरोतियां ऐसा हमने प्रतिनिधि बनाया,… मेरु सब संवेदना के बह रहे हैं अर्थ की आंधी में सारे बह रहे हैं, सरदार अली पड़िहार ने चलता चल भाई चलता चल नव इतिहास रचता चल सुनाकर श्रोताओं का मन मोह लिया । इससे पूर्व रामेश्वर साधक ने ” हे विधात हे ज्ञान दात मे च मेधा दियताम” ईश वंदना से कार्यक्रम का शुभारम्भ किया
नगर के प्रसिद्ध शाइर क़ासिम बीकानेरी ने औरत की शान में कही गई मुसलसल ग़ज़ल के इस शे’र ‘तंदूर की रोटी नहीं मत आग में झोंको,तुम जान लो कि ये भी तो इंसान है औरत’ के ज़रिए औरत के स्नेह, ममता,त्याग, तपस्या, बलिदान और सहनशीलता जैसी खूबियां बयान की।

रामेश्वर साधक ने सामयिक दार्शनिक रचना “धातु पाषाण काष्ठ कांच की, पूजा हमने कई बार हमने की अब भ्रमित नहीं रहना है हमें साक्षात लक्ष्मी पूजन करना है,.. शिव दाधीच बीकानेरी : गीत में जब प्रीत लिखों तो करुणा वन्दन हो जायेगा.. … राजकुमार ग्रोवर जब भी किसी बेटी की बिदाई होती हैं एक आंख हंसती पर दूजी आंख रोती है। लीलाधर सोनी ने क्यूं थे कराओ महारी प्यारी मां… प्रभा कोचर ने तूझे आना है तो आ जाओ बसेरा करने मेरे दिल में, तुझसा नहीं… कमल किशोर पारीक रैयगी कांयरी जिनगाणी.. कृष्णा वर्मा एक चांद को देख दूसरा चांद शर्मा गया, शशिबाला : पिया तेरे कितने दूर मुकाम, कुमार महेश किराडू : अजीज इतना ही रखो कि दिल बहल जाए,, अब इस कदर भी मत चाहो कि दम निकल जाए।  शमीम अहमद शमीम ऐ दुनिया के माली, अपने बंदे की कली…. हनी कोचर ने कोई दिवाना कहता है कोई पागल समझता है, शोभा : बलिहारी का वेश बनाया, .. पवन चड्ढ़ा आ अब लौट चलें बुलंद आवाज में गीत सुनाकर वाह वाह लूंटी। आज के कार्यक्रम में नवीन गौस्वामी, हनुमान कच्छावा, महबूब अली, छोटू खां, नासिर अली, इकबाल, किशनलाल आदि कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे कार्यक्रम का संचालन चुटिले अंदाज में,आध्यात्म काव्य द्रष्टांत के साथ शिव दाधीच बीकानेरी ने किया जबकि आभार साधक ने व्यक्त किया।

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor