जब आप किसी की मदद करते हैं और उसके चेहरे पर मुस्कान देखते हैं — वही सबसे बड़ा पुरस्कार है। कभी किसी से दान नहीं लिया, हमेशा अपने घर से खर्च किया। जरूरतमंदों के आंखों के ऑपरेशन से लेकर अस्पताल तक पहुंचाने तक, मैंने हमेशा यही सोचा — “अगर मैं मदद कर सकती हूं, तो क्यों न करूं?” : यशोदा माहेश्वरी
दिलीप कुमार पुरोहित. राखी पुरोहित. जोधपुर
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संगीत की मधुरता और सेवा की भावना — दोनों का संगम अगर किसी एक व्यक्तित्व में दिखे, तो वह हैं यशोदा माहेश्वरी। 38 साल पहले कम उम्र में विवाह, सीमित शिक्षा के बावजूद उन्होंने अपनी लगन से जीवन को “प्रेरणा की कहानी” बना दिया।
भक्ति गीतों से लेकर शादी-ब्याह के गीतों तक और जरूरतमंदों की मदद से लेकर शिक्षा की ज्योत जलाने तक — यशोदा माहेश्वरी ने साबित किया कि अगर नीयत साफ हो तो हर सुर में सेवा का भाव झलकता है।
“संगीत सिर्फ कला नहीं, आत्मा की भाषा है”
राइजिंग भास्कर : आपकी संगीत यात्रा की शुरुआत कैसे हुई?
यशोदा माहेश्वरी: (मुस्कुराती हैं) शादी के बाद संगीत पीछे छूट गया था। लेकिन 2019 के कोरोना काल में जब सारा संसार थम गया, तब मैंने खुद को फिर से खोजा। उस समय मैंने रोज़ रियाज किया, सुरों से दोस्ती की।
जब सब सामान्य हुआ तो मंदिरों में भजन गाने लगी। लोगों को मेरे भक्ति गीत पसंद आने लगे और फिर धीरे-धीरे मैंने इसे पेशेवर रूप दिया।
आज मैं मांगलिक अवसरों, शादी-ब्याह, मायरा, बन्ना-बन्नी, मेहंदी, हल्दी, सुंदरकांड पाठ, फाग उत्सव, जैन भक्ति और गुजराती-राजस्थानी लोकगीतों में गाती हूं।
“मैंने संगीत किसी गुरु से नहीं, जीवन से सीखा है”
राइजिंग भास्कर : बिना औपचारिक प्रशिक्षण के इतनी सफलता—इसका रहस्य क्या है?
यशोदा माहेश्वरी: मैंने जीवन को अपना गुरु बनाया। हर दिन कुछ नया सीखा। मैंने गलतियां कीं, सुधारीं और हर बार बेहतर बनने की कोशिश की।
जब कोई गीत प्रेम और भक्ति से गाया जाता है, तो वो सीधे श्रोताओं के दिल में उतर जाता है। यही मेरा मंत्र है।
समाजसेवा: “सेवा प्रदर्शन नहीं, जिम्मेदारी है”
तीन दशकों से यशोदा माहेश्वरी समाजसेवा में सक्रिय हैं। उन्होंने कई जरूरतमंदों को घर बनवाने में मदद की, कन्याओं की शादियां करवाईं, आवश्यक सामान भेंट किया और स्वयं के खर्च से सब किया।
राइजिंग भास्कर : समाजसेवा की प्रेरणा कहां से मिली?
यशोदा माहेश्वरी: जब आप किसी की मदद करते हैं और उसके चेहरे पर मुस्कान देखते हैं — वही सबसे बड़ा पुरस्कार है।
कभी किसी से दान नहीं लिया, हमेशा अपने घर से खर्च किया। जरूरतमंदों के आंखों के ऑपरेशन से लेकर अस्पताल तक पहुंचाने तक, मैंने हमेशा यही सोचा — “अगर मैं मदद कर सकती हूं, तो क्यों न करूं?”
“सेवा धन से नहीं, संवेदना से होती है।”
— यशोदा माहेश्वरी
शिक्षा की ज्योत: बच्चों को पढ़ाने की पहल
यशोदा माहेश्वरी ने जब देखा कि आसपास कई बच्चे पढ़ाई से दूर हैं, तो उन्होंने चिल्ड्रन पार्क में क्लास लगानी शुरू की।
शुरुआत में 10 बच्चे थे, लेकिन धीरे-धीरे संख्या 70 तक पहुंच गई। शिक्षित युवा और यहां तक कि पीएचडी धारक लोग भी इस मुहिम से जुड़ गए।
बाद में उन्होंने मॉडर्न स्कूल में पढ़ाना शुरू किया। उनके प्रयास से कई बच्चे उज्ज्वल भविष्य बना चुके हैं।
एक यादगार किस्सा
राइजिंग भास्कर : कोई ऐसी घटना जो हमेशा याद रहती है?
यशोदा माहेश्वरी: हां, एक बार हमारे कॉम्पलेक्स के वॉचमैन की आठ महीने की बच्ची बीमार थी। उसने गलती से अफीम दे दी जिससे बच्ची की हालत खराब हो गई।
मैंने तुरंत एक जान-पहचान के डॉक्टर को फोन किया जो फ्लाइट से जाने वाला था, लेकिन फ्लाइट कैंसिल हो गई। उसी की बदौलत बच्ची का इलाज हुआ और वह तीन-चार दिन में ठीक हो गई।
मुझे लगा — भगवान ने डॉक्टर की फ्लाइट इसलिए रद्द करवाई ताकि वह बच्ची बच सके।
कोरोना काल में करुणा की मिसाल
कोविड-19 के अंधेरे समय में यशोदा माहेश्वरी और उनके बेटे नमन ने सूखी सामग्री के पैकेट, भोजन वितरण, ऑनलाइन आर्थिक सहायता और प्लाज्मा एकत्रीकरण में सक्रिय भागीदारी निभाई।
“उस समय किसी का चेहरा मुस्कुराते देखना ही सबसे बड़ी राहत थी।” — यशोदा माहेश्वरी
परिवार का सहयोग
उनका बेटा नमन आज एक सफल बिजनेसमैन है और बेटी आस्था निजी कंपनी में उच्च पद पर कार्यरत हैं।
दोनों अपनी मां की सेवा भावना और संगीत के जुनून पर गर्व करते हैं।
यशोदा माहेश्वरी कहती हैं:
“मैंने बच्चों को यही सिखाया है कि जीवन का असली सुख दूसरों को खुश देखकर मिलता है। सफलता सिर्फ कमाई में नहीं, देने में है।”
संगीत और सेवा — एक समान लय
“संगीत आत्मा को शुद्ध करता है, सेवा समाज को। दोनों में एक ही भाव है — समर्पण का।”
उनकी यह सोच बताती है कि संगीत और समाजसेवा वास्तव में जीवन के दो सुर हैं — एक भीतर की शांति देता है, दूसरा बाहर की।
जीवन मंत्र
“जहां हो, वहीं से अच्छाई फैलाओ। अगर आप एक व्यक्ति के जीवन में रोशनी ला सके, तो वही सबसे बड़ा पुरस्कार है।”
— यशोदा माहेश्वरी
भविष्य की योजना
यशोदा माहेश्वरी अब युवाओं को संगीत और सेवा से जोड़ने की दिशा में काम कर रही हैं।
वे चाहती हैं कि एक ऐसा स्थायी शिक्षा केंद्र बने जहां जरूरतमंद बच्चों को संगीत, संस्कार और शिक्षा — तीनों का संगम मिले।
महान बनने के लिए बड़ी डिग्री नहीं बड़ा दिल चाहिए
सादगी, समर्पण और सुरों की साधना से यशोदा माहेश्वरी ने जो ऊंचाई हासिल की है, वह बताती है कि महान बनने के लिए बड़ी डिग्री नहीं, बड़ा दिल चाहिए।
वह आज जोधपुर माहेश्वरी समाज ही नहीं, पूरे क्षेत्र की प्रेरणा बन चुकी हैं —
एक ऐसी महिला जिनकी आवाज़ में भक्ति है, कर्म में सेवा और जीवन में संगीत।





