जैसलमेर की जनता ने की नाकारा कलेक्टर प्रताप सिंह को हटाने की मांग
हिन्दुओं की हिमायती बीजेपी राज में 5 दिनों से जैसलमेर में पानी सप्लाई नहीं
जोधपुर में गुलाब नगर में पाइप लाइन फूटी. 3 दिन में कार्यवाही नहीं
दिलीप कुमार पुरोहित. जैसलमेर. जोधपुर
राजस्थान की धरती पर दिवाली जैसे पावन पर्व पर जब घर-घर में रोशनी फैलनी चाहिए थी, तब पश्चिमी राजस्थान के दो प्रमुख शहर — जैसलमेर और जोधपुर — जल संकट से कराह रहे हैं। हालत यह है कि जैसलमेर की गांधी कॉलोनी सहित कई इलाकों में लगातार पांच दिन से एक बूंद पानी नहीं आया, जबकि दूसरी ओर जोधपुर के गुलाब नगर और खेमे का कुआं क्षेत्र में पाइप लाइन फूटे तीन दिन बीत गए, लेकिन समस्या ठीक करने वाला कोई नहीं पहुँचा।
यह वही राजस्थान है जिसकी सरकार खुद को “हिंदू हितैषी” बताती है, मगर विडंबना देखिए कि हिंदुओं के सबसे बड़े त्योहार दिवाली पर घरों में पूजा की तो बात दूर — लोग सफाई तक नहीं कर पा रहे। जनता पूछ रही है — “यह कैसा रामराज्य है जिसमें रामनगरी के नागरिक पानी के लिए तरस रहे हैं?”
“दिवाली पर खुशियाँ मनाएँ या बाल्टी लेकर लाइन में खड़े हों?”
जैसलमेर की गांधी कॉलोनी की रहने वाली सावित्री गुस्से में कहती हैं — “दिवाली पर घर धोना तो दूर, हम तो अब बर्तन धोने के लिए भी पानी बचा-बचाकर इस्तेमाल कर रहे हैं। सरकार क्या चाहती है — हम पूजा में दीपक नहीं, सूखी बाल्टी रखें?”
उनके बगल में खड़े रामलाल कहते हैं — “टीवी पर नेता कहते हैं कि राजस्थान में ‘हर घर जल योजना’ सफल है। अरे साहब, हमारे यहां तो ‘हर घर खाली गागर योजना’ चल रही है।”
MLA छोटू सिंह भाटी कहाँ हैं?
जैसलमेर के विधायक छोटू सिंह भाटी जनता के सामने सबसे बड़ा सवाल बन गए हैं।
लोगों का आरोप है कि “वे केवल मंचों और सोशल मीडिया पर ही सक्रिय रहते हैं, लेकिन जमीन पर कहीं दिखाई नहीं देते।”
गांधी कॉलोनी निवासी भैराराम कहते हैं —
“विधायक जी ने चुनाव में कहा था कि ‘हम पानी समस्या खत्म करेंगे’। अब हम पूछते हैं — क्या हमारा वादा भी नल के साथ सूख गया?”
जोधपुर में पाइपलाइन फूटकर जनता की उम्मीदें बह गईं
जोधपुर के गुलाब नगर खेमे का कुआं क्षेत्र में तीन दिन पहले मुख्य जल पाइप फूटा। शुरू में लोगों ने सोचा कि कुछ घंटों में ठीक हो जाएगा, पर तीन दिन बीत गए — अब तक कोई रिपेयर टीम नहीं पहुँची।
स्थानीय निवासी राजेश नाराज़ होकर कहते हैं — प्रशासन के पास, पाइप ठीक करने का टाइम नहीं?”
MLA अतुल भंसाली भी गायब
जोधपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक अतुल भंसाली भी इस मुद्दे पर पूरी तरह गायब बताए जा रहे हैं।
गुलाब नगर के लोग कह्ते हैं — “विधायक जी ने पिछली बार कहा था कि हम ‘हर समस्या पर नजर रखे हुए हैं’। शायद उनकी नजरों में पानी समस्या आती ही नहीं।”
CM भजनलाल शर्मा का प्रबंधन फेल
राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा लगातार मीटिंग्स में “जल प्रबंधन” की बातें करते हैं।
पर जमीनी सच्चाई यह है कि जैसलमेर और जोधपुर जैसे महत्वपूर्ण शहरों में दिवाली सप्ताह में भी पानी का बुनियादी इंतजाम नहीं हो सका।
क्या दिवाली पर भी जनता को यही सुनना पड़ेगा — “तकनीकी खराबी है, जल्द समाधान किया जाएगा”?
जनता पूछ रही है —
“सरकार सिर्फ नल कनेक्शन देकर फोटो खिंचवा लेती है, पर पानी देना भूल जाती है?”
जैसलमेर कलेक्टर प्रतापसिंह नाथावत पर जनता का फूटा गुस्सा
सबसे तेज़ नाराज़गी जैसलमेर कलेक्टर प्रतापसिंह नाथावत को लेकर देखी जा रही है।
स्थानीय व्यापारी सवाल उठाते हैं —
“कलेक्टर साहब त्योहारों पर सफाई और बिजली को लेकर तो मीटिंगें करते हैं, लेकिन पानी सबसे बड़ी प्राथमिकता नहीं? प्रशासन को लगता है कि जनता की प्यास बयान देकर बुझा देंगे?”
जनता अब खुलकर कह रही है —
“ऐसे कलेक्टर का क्या फायदा जो बस बैठकों में व्यस्त रहे? हमें तुरंत ट्रांसफर चाहिए।”
जल समस्या को ‘सिर्फ तकनीकी खराबी’ कहकर टालना संवेदनहीनता है
प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी बार-बार कहते हैं — “लाइन फूट गई है, जल्द ठीक करेंगे।”
पर सवाल यह है कि योजनाएँ बनाकर लाखों रुपए खर्च करने वाली सरकार ने क्या इतना भी सिस्टम नहीं बनाया कि पाइप टूटे तो तुरंत मरम्मत हो सके?
जनता का दर्द यह है कि सरकारी सिस्टम उनकी प्यास को ‘फाइल मूवमेंट’ समझता है।
अब जनता की चेतावनी — “वोट पानी से मिलता है, भाषणों से नहीं”
गांधी कॉलोनी के एक बुजुर्ग ने एक तीखा बयान दिया —
“अगली बार कोई नेता वोट मांगने आएगा तो उससे सीधे पूछेंगे — नल में पानी लाया है या सिर्फ नारा?”
सरकार के लिए आखिरी चेतावनी — पानी सिर्फ सुविधा नहीं, गरिमा का अधिकार है
राजस्थान की यह जल समस्या केवल सरकारी लापरवाही नहीं, बल्कि लोकतंत्र की असली परीक्षा है।
पानी केवल जीवन नहीं — सम्मान भी है।
दिवाली पर अगर किसी घर में पूजा का कलश पानी के अभाव में खाली रहे, तो यह सिर्फ जल संकट नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता है। सरकारें भाषणों से नहीं, नल से याद रखी जाती हैं।
अगर पानी नहीं दिया गया — तो जनता अगली बार वोट की बाल्टी भी खाली रख देगी।



