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Thursday, July 9, 2026, 5:43 pm

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दीपोत्सव में जगमगाया जैसलमेर: तीन दिनों में 175 करोड़ का कारोबार, हर गली में रौनक, हर चेहरे पर मुस्कान

दीपों की लौ जैसे आसमान तक रोशनी फैला रही है। तीन दिनों से शहर के छोटे-बड़े बाजारों में जो रौनक नजर आ रही है, उसने व्यापारियों और पर्यटकों—दोनों के चेहरों पर मुस्कान ला दी है।

दिलीप कुमार पुरोहित. जैसलमेर 

थार के स्वर्ण नगरी जैसलमेर में इस बार दीपोत्सव का उल्लास कुछ अलग ही रंग बिखेर रहा है। पीले पत्थरों की हवेलियों, सुनहरे बाजारों और रेतीली हवाओं के बीच दीपों की लौ जैसे आसमान तक रोशनी फैला रही है। तीन दिनों से शहर के छोटे-बड़े बाजारों में जो रौनक नजर आ रही है, उसने व्यापारियों और पर्यटकों—दोनों के चेहरों पर मुस्कान ला दी है। आंकड़ों के मुताबिक, दीपावली के पहले तीन दिनों में जैसलमेर जिले में करीब 175 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हुआ है।

शुभ मुहूर्त में हुई लक्ष्मी पूजा, अब रामा-शामा का पर्व

20 अक्टूबर की रात शुभ मुहूर्त में शहरभर में लक्ष्मी पूजा धूमधाम से हुई। पुराना बाजार, गांधी चौक, सोनार किला रोड, मंडी क्षेत्र, बस स्टैंड रोड और पोकरण में हर घर और दुकान पर दीपक झिलमिला रहे थे।
आज (21 अक्टूबर) रामा-शामा का पर्व मनाया जा रहा है—जो पारंपरिक रूप से भाई-बहन, मित्र और पड़ोसी के बीच स्नेह-साझेदारी का त्योहार माना जाता है। महिलाएँ सुबह से ही बाजारों में मिठाई, सूखे मेवे और पूजा सामग्री की खरीदारी में जुटी रहीं।

छह दिनों तक रहेगा दीपोत्सव का उत्सव

इस बार दीपोत्सव का सिलसिला लंबा खिंच गया है। लक्ष्मी पूजन से शुरू हुआ त्योहार 22 और 23 अक्टूबर तक भाई दूज के साथ समाप्त होगा। कई परिवार 22 को पर्व मनाएंगे, जबकि कुछ 23 अक्टूबर को। इसका असर यह है कि जैसलमेर की गलियाँ पूरे छह दिनों तक रंग, रोशनी और रौनक से सराबोर रहेंगी।

बाजारों में गूंजती रौनक: तीन दिनों में 175 करोड़ का व्यापार

जैसलमेर के व्यापारिक संगठनों और बाजार संघों से मिली जानकारी के अनुसार,

सोना-चाँदी और आभूषण क्षेत्र में लगभग 32 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ।

इलेक्ट्रॉनिक और मोबाइल बाजार ने करीब 28 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की।

कपड़ा और परिधान क्षेत्र ने 37 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार किया।

गिफ्ट आइटम, सजावटी सामग्री और पूजा सामान में 22 करोड़ रुपये का व्यापार हुआ।

मिठाई और फूड सेक्टर का कारोबार 18 करोड़ रुपये के करीब रहा।

पर्यटन एवं होटल व्यवसाय में 30 करोड़ रुपये की आमदनी दर्ज की गई।

जबकि ऑटोमोबाइल और पेट्रोलियम सेक्टर में 8 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री हुई।

कुल मिलाकर, तीन दिनों में लगभग 175 करोड़ रुपये से अधिक का बिज़नेस हुआ है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 18% वृद्धि दर्शाता है।

पर्यटकों ने भरी जान – स्वर्णनगरी में दीपोत्सव का विदेशी रंग

इस बार दीपोत्सव में जैसलमेर में देशी ही नहीं, बल्कि विदेशी पर्यटकों की भी अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली। राजस्थान पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में करीब 48,000 देशी और 9,000 विदेशी सैलानी जैसलमेर पहुंचे हैं।
फोर्ट रोड पर फ्रांस, जर्मनी और जापान के सैलानियों के समूहों को पारंपरिक दीये जलाते और लोकगीतों पर झूमते देखा गया।
स्वर्ण किला, पटवा हवेली, गड़ीसर झील और सम सैंड ड्यून्स इन दिनों रोशनी के आकर्षक केंद्र बने हुए हैं।

दीपावली की रात – जब रेगिस्तान ने पहनी रोशनी की चादर

20 अक्टूबर की रात जब घड़ी ने लक्ष्मी पूजा का शुभ समय बताया, तो मानो पूरा जैसलमेर एक साथ जगमगा उठा। हवेलियों के झरोखे, दुकानों के सामने रखे मिट्टी के दीये, बिजली की झालरों और आकाश में फूटते आतिशबाज़ी के रंगों ने शहर को सोने की चादर में लपेट दिया।
स्थानीय निवासी पुष्पा ने बताया – “हर साल दीये जलाते हैं, पर इस बार पूरे मोहल्ले ने मिलकर सड़क के दोनों ओर 500 दीये जलाए। ऐसा लगा जैसे पूरा आकाश रोशनी में नहा गया।”

धंधा भी बढ़ा, दिल भी जुड़े

व्यापारियों का कहना है कि इस साल लोगों की क्रयशक्ति में वृद्धि देखी जा रही है। एक  ज्वेलर ने बताया कि “इस बार सोने के सिक्कों और हल्के डिज़ाइन के आभूषणों की डिमांड अधिक रही।”

वहीं एक इलेक्ट्रॉनिक व्यापारी  ने कहा, “एसी, फ्रिज, टीवी और मोबाइल की बिक्री पिछले साल से 25% बढ़ी है।”

Gopachok में मिठाई दुकान पर लोगों की इतनी भीड़ रही कि देर रात तक लड्डू और काजू कतली के बॉक्स खत्म हो गए।

स्थानीय कलाकारों की बहार

दीपोत्सव के अवसर पर जैसलमेर के लोक कलाकारों को भी मंच मिला।

धोरों पर “मरु मेले” की तर्ज पर लोक नृत्य और मांड गायन हुआ।

नगर परिषद ने जगह जगह रोशनी की.गड़ीसर झील पर हर शाम “दीप आरती” का आयोजन हो रहा है, जहाँ सैकड़ों दीये जलाकर झील को रोशनी से नहलाया जा रहा है।

होटल्स और टूरिज्म में भारी बुकिंग

जैसलमेर के प्रमुख होटल्स जैसे फोर्ट राजवाड़ा, गोरबंद पैलेस,  और  रिसॉर्ट्स पूरी तरह बुक हैं।
होटल एसोसिएशन के सचिव ने बताया, “दीपोत्सव के कारण हमारी ऑक्यूपेंसी 95% तक पहुँच गई है। विदेशी सैलानियों के साथ-साथ दिल्ली, मुंबई, जयपुर और सूरत से भी पर्यटक बड़ी संख्या में आए हैं।”

स्थानीय हस्तशिल्प को भी मिली नई उड़ान

दीपोत्सव ने जैसलमेर के पारंपरिक हस्तशिल्प को भी बाजार में नई पहचान दी है।
कढ़ाईदार सूट, ऊँट के चमड़े की वस्तुएँ, जरीदार चप्पलें और किलटेड जैकेट्स की बिक्री में जबरदस्त वृद्धि हुई है।
सोनार किला के पास छोटी दुकानों में विदेशी सैलानी हस्तनिर्मित दीप और शोपीस खरीदते नजर आए।

सुरक्षा और स्वच्छता पर भी ध्यान

नगर परिषद और पुलिस प्रशासन की ओर से शहरभर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
50 अतिरिक्त पुलिस जवानों को फोर्ट रोड और मुख्य बाजार में तैनात किया गया है।
साथ ही नगर परिषद की ओर से रोजाना तीन बार सफाई और कचरा निस्तारण की व्यवस्था की गई है। “दीपोत्सव न केवल सांस्कृतिक पर्व है बल्कि पर्यटन दृष्टि से भी जिले के लिए आर्थिक संजीवनी है।

22–23 अक्टूबर को समापन: भाई-दूज पर विशेष आयोजन

दीपोत्सव का समापन भाई-दूज के पर्व के साथ होगा।
22 और 23 अक्टूबर को अलग-अलग समुदायों में विशेष पूजन होंगे।

जैसलमेर – भारत का मिनी दीपोत्सव हब

कभी सिर्फ “डेज़र्ट सिटी” के नाम से जाना जाने वाला जैसलमेर अब दीपोत्सव के दौरान राजस्थान का “मिनी दिवाली हब” बन गया है।
शहर के व्यापार, पर्यटन, कला और संस्कृति का मिला-जुला रूप इस पर्व को सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से भी बेहद खास बना रहा है। छह दिनों तक चलने वाला यह दीपोत्सव केवल रोशनी का पर्व नहीं, बल्कि जैसलमेर की आर्थिक, सांस्कृतिक और मानवीय एकता का उत्सव बन गया है।
थार के इस स्वर्ण नगरी में जब दीप जलते हैं, तो सिर्फ घर नहीं—दिल भी रोशन हो जाते हैं।

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor