Explore

Search

Thursday, July 9, 2026, 1:54 pm

Thursday, July 9, 2026, 1:54 pm

LATEST NEWS

The specified slider does not exist.

Lifestyle

गजल : ये बहते आंसू

ये बहते आंसू

सुन तो लेते हैं मगर कुछ नहीं कहते आंसू
फिर भी कुछ कहने को आ जाते हैं बहते आंसू।

कभी गम में कभी खुशी में या कभी यूं ही,
टपकने लगते हैं पलकों से ये बहते आंसू।

कभी-कभी तो दिल को भी पता नहीं चलता,
सूख जाते हैं आ के गालों पर बहते आंसू।

कभी सावन कभी भादों कभी महावट बन,
झर लगा देते हैं दिन-रात ये बहते आंसू।

कभी खुद पर कभी किस्मत पर कभी ईश्वर पर,
रोया करते हैं फूट-फूट के बहते आंसू।

टूटे अरमानों की लाशों पर सर को पटक पटक,
सिसकियां भर के रोया करते हैं बहते आंसू।

मिलन के मीठे पल हो या हो घड़ी बिछड़न की,
पलकों के बांध तोड़ जाते हैं बहते आंसू।

बहुत कुछ कहना चाहते हैं कह नहीं पाते,
धीरे-धीरे से मुस्कुराते हैं बहते आंसू।

गीतकार : अनिल भारद्वाज, एडवोकेट, हाईकोर्ट ग्वालियर, मध्यप्रदेश

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor