सरकार ने इसकी पहल किशोर न्याय अधिनियम में पोस्टर केयर योजना व ग्रुप फोस्टर केयर योजना से शुरू की है। इसमें एक से अधिक आवेदन होने की स्थिति में कलेक्टर की अध्यक्षता में बनी जिला स्तरीय कमेटी बच्चों को गोद देने का अपना निर्णय करेगी।
राखी पुरोहित. जोधपुर
अब अनाथ बच्चों को निसंतान दंपती आसानी से अपना बना सकेंगे। प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर ऐसे बच्चों की सही देखभाल के लिए परिवारों को दिया जाएगा।
सरकार ने इसकी पहल किशोर न्याय अधिनियम में पोस्टर केयर योजना व ग्रुप फोस्टर केयर योजना से शुरू की है। इसमें एक से अधिक आवेदन होने की स्थिति में कलेक्टर की अध्यक्षता में बनी जिला स्तरीय कमेटी बच्चों को गोद देने का अपना निर्णय करेगी।
जो बच्चे किसी कारणवश विधिक रूप से स्वतंत्र नहीं हो पाते हैं, जैसे कि जिनकी माता नारी निकेतन या अन्य किसी विमंदित गृह में है, जिसकी मानसिक स्थिति सही नहीं है या ऐसे बच्चे जिनकी मां नहीं हैं और पिता जेल में सजा काट रहा है या ऐसे बच्चे जो गुमशुदा हैं या फिर जिनके परिवार और माता-पिता का पता लगाया जा रहा है, उन बच्चों को विधिक रूप से स्वतंत्र नहीं किया जा सकता है। ऐसे बच्चों को संस्था से विमुक्त कर किसी परिवार से जोड़ने के लिए सरकार ने किशोर न्याय अधिनियम में फोस्टर केयर योजना व ग्रुप फोस्टर केयर योजना चलाई है। फोस्टर केयर योजना में कोई भी परिवार अधिकतम चार बच्चों व ग्रुप फोस्टर केयर योजना में कोई भी परिवार अधिकतम आठ बच्चों को अस्थाई रूप से गोद लेकर उनकी बेहतर देखभाल कर सकता है।
पहले अस्थाई तौर पर गोद, फिर स्थाई फोस्टर केयर योजना में बच्चे के परिवार का पता नहीं लगने पर पहले एक या दो साल के लिए गोद दिया जाता है। बाद में बाल कल्याण समिति में अनुमोदन होने पर अधिकतम पांच साल के लिए गोद दिया जाएगा। इस बीच बच्चे के माता-पिता और परिवार का पता नहीं चलने पर कलेक्टर की अध्यक्षता में बनी कमेटी की तरफ से ऑनलाइन पोर्टल पर फोस्टर दत्तक ग्रहण योजना में गोद लेने के लिए प्राथमिकता तय की गई है, ताकि उस परिवार को वह बच्चा ही गोद के लिए प्राप्त हो सके। इस योजना में प्रचार-प्रसार के माध्यम व गृहों में सामाजिक कार्यकर्ताओं और बच्चों के कल्याण से जुड़े लोगों को विजिट करवाकर चिह्नित किया जाता है।
तीन बच्चों को गोद दिया, सात को देने की प्रक्रिया चल रही :
योजना लागू होने के बाद जोधपुर में तीन बच्चों को फोस्टर केयर में दिया जा चुका है। साथ ही दो परिवारों के दस्तावेज की जांच करके बैठक की जा चुकी है। वर्तमान में विभाग के पास ऐसे सात बच्चे मौजूद हैं, जिन्हें फोस्टर केयर में दिया जा सकता है। छह परिवारों को चिह्नित किया गया है। बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक डॉ. बीएल सारस्वत के अनुसार मिशन वात्सल्य गाइडलाइन के अनुसार बच्चों को संस्था से विमुक्त कर परिवार आधारित देखभाल व संरक्षण प्रदान करने के लिए फोस्टर केयर योजना काफी लाभदायक है। इसमें एक परिवार को बच्चा एवं एक बच्चे को परिवार मिल जाता है।




