अधिवक्ता प्रमेन्द्र बोहरा ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता का सक्षम अधिकारी सचिव (प्रशासन) जोधपुर डिस्काॅम, जोधपुर है।
उसका कार्य व्यवस्था की आड़ में स्थानांतरण मुख्य नियंत्रक लेखाधिकारी जोधपुर डिस्काॅम द्वारा किया गया जो कि स्थानांतरण के लिए असक्षम अधिकारी है।
याचिकाकर्ता की पदोन्नति वर्ष 2012 में सचिव (प्रशासन) जोधपुर डिस्काॅम, जोधपुर द्वारा ही की गई। साथ ही उसकी पत्नी भी बीकानेर में अध्यापिका के पद पर कार्यरत हैं।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता का यह तर्क भी था कि फलोदी में सहायक लेखाधिकारी द्वितीय का पद भी नहीं है, इसलिये कार्य व्यवस्थांतर्गत किया स्थानांतरण अनुचित है, उसे वेतन तो बीकानेर से ही मिलेगा पर कार्य फलोदी से करना होगा।
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
कार्यव्यवस्था की आड़ में असक्षम अधिकारी द्वारा किए गए स्थानांतरण आदेश पर राजस्थान उच्च न्यायालय की एकलपीठ के न्यायाधीश मुनुरी लक्ष्मण ने रोक लगा दी है।
बीकानेर निवासी उमेश कुमार जो वर्तमान में जोधपुर डिस्काॅम जोधपुर के तहत आंतरिक जांच परियोजना बीकानेर में सहायक लेखाधिकारी के पद पर कार्यरत है। उनकी सहायक लेखाधिकारी के पद पर पदोन्नति वर्ष 2012 में सचिव (प्रशासन) जोधपुर डिस्काॅम, जोधपुर द्वारा की गई थी। पदोन्नति के बाद उनका पदस्थापन आंतरिक निरीक्षण शाखा बीकानेर में किया गया। उन्होंने पदोन्नति स्थान पर कार्यग्रहण भी कर लिया व वर्तमान में यहीं वह कार्यरत हैं।
मगर 23 सितंबर 2025 को कार्य व्यवस्था की आड़ में मुख्य नियंत्रक लेखाधिकारी जोधपुर डिस्काॅम, जोधपुर द्वारा उमेश कुमार का स्थानांतरण बीकानेर से फलोदी कर दिया गया। यहीं नहीं फलोदी के लिए तुरंत कार्यमुक्त करने का आदेश भी 24 सितंबर 2025 को पारित कर दिया गया। याचिकाकर्ता ने आदेश दिनांक 23 सितंबर 2025 एवं 24 सितंबर 2025 से व्यथित होकर अपने अधिवक्ता प्रमेन्द्र बोहरा के माध्यम से चुनोती दी।
बोहरा के तर्क हार्हकोर्ट ने भी माने : याचिकाकर्ता की पत्नी बीकानेर में टीचर, स्थानांतरण भी असक्षम अधिकारी द्वारा किया गया, फलोदी में पद भी नहीं
उच्च न्यायालय के समक्ष बोहरा का तर्क था कि प्रथमतया उसका कार्य व्यवस्था की आड़ में किया गया स्थानांतरण असक्षम अधिकारी द्वारा किया गया है। याचिकाकर्ता का सक्षम अधिकारी सचिव (प्रशासन) जोधपुर डिस्काॅम, जोधपर है व उसका कार्य व्यवस्था की आड़ में स्थानांतरण मुख्य नियंत्रक लेखाधिकारी जोधपुर डिस्काॅम द्वारा किया गया है जो कि उचित नहीं है। याचिकाकर्ता की पदोन्नति वर्ष 2012 में सचिव (प्रशासन) जोधपुर डिस्काॅम, जोधपुर द्वारा ही की गयी। साथ ही उनकी पत्नी भी बीकानेर में अध्यापिका के पद पर कार्यरत है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता का यह तर्क भी था कि फलोदी में सहायक लेखाधिकारी द्वितीय का पद भी नहीं है, इसलिये कार्य व्यवस्था की आड़ में किया गया स्थानांतरण उचित नहीं है। क्यों कि उन्हें वेतन तो बीकानेर से ही मिलेगा पर कार्य फलोदी से करना होगा। प्रार्थी के अधिवक्ता के तर्कों से सहमत होते हुए प्रार्थी की रिट याचिका को अंतरिम रूप से ग्राह्य करते हुए सचिव (प्रशासन) जोधपुर डिस्काॅम, जोधपुर मैनेजिंग डायरेक्टर जोधपुर डिस्काॅम, जोधपुर एवं अन्य को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया व मुख्य नियंत्रक एवं लेखा जोधपुर डिस्काॅम, जोधपुर के आदेश 23 सितंबर व कार्यमुक्ति आदेश 24 सितंबर पर अंतरिम रोक लगाई गई।



