“हेलमेट नहीं, जीवन दांव पर” — आज यह नारा सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा। जैसलमेर में इसे सच कर दिखाना हमारी ज़रूरत है। जैसलमेर विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी है, मगर यहां हेलमेट कोई नहीं पहनता, केवल सेना के जवान नियमों की पालना करते हैं, इसके अलावा रोज ”हेलमेट अनिवार्य” नियमों की धज्जियां उड़ती है…जैसलमेर के पुलिस अधीक्षक अभिषेक शिवहरे को चाहिए कि हेलमेट संस्कृति जैसलमेर में लागू करवाए…। अगर जैसलमेर जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी में हेलमेट संस्कृति लागू नहीं करवा पाए तो उनकी सारी उपलब्धियां शून्य हैं…।
दिलीप कुमार पुरोहित. जैसलमेर
विश्वस्तरीय पर्यटन नगरी जैसलमेर — सुनहरी हवेलियों, रेगिस्तान की रेत, अद्वितीय किले और विदेशी-भारतीय पर्यटकों की भीड़ के बीच — आज बड़े खतरों की चपेट में है। न सिर्फ पर्यटन के लिहाज से, बल्कि दैनिक दुपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से। हमारी पड़ताल में सामने आया है कि जैसलमेर में हेलमेट पहनने का अभ्यास लगभग न के बराबर है। जबकि राज्य में यह बात बार-बार सामने आई है कि बिना हेलमेट वाहन चलाना वैसे ही जोखिमभरा है।
यह रिपोर्ट “राइजिंग भास्कर” की ओर से एक पॉजिटिव न्यूज स्टोरी अभियान के रूप में तैयार की जा रही है — ताकि जागरूकता बढ़े, प्रशासन सक्रिय हो और जैसलमेर जैसे पर्यटन स्थल में नियम-पालन की संस्कृति बने।
“हेलमेट नहीं, जीवन दांव पर” — आज यह नारा सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा। जैसलमेर में इसे सच कर दिखाना हमारी ज़रूरत है।
(जैसलमेर का यह वीडियो दीपावली के त्योहार के समय का है। कोई भी हेलमेट के नियमों का पालन नहीं कर रहा है और ट्रैफिक पुलिस का सिपाही देखकर भी अनदेखी कर रहा है। मगर यही सिपाही अगर बीमार या महिला भी टैक्सी में किले पर जा रही हो तो टैक्सी को जाने से सख्ती से रोकता है और चालाना काटता है, मगर दोपहिया वाहन चालक बिना हेलमेट जा रहे हैं तो किसी प्रकार का चालान नहीं काटा जाता। वाह रे जैसलमेर का प्रशासन-सैल्यूट है आपको।)
हेलमेट क्यों जरूरी है?
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मस्तिष्क व सिर की सुरक्षा
अनेक अध्ययनों ने यह स्पष्ट किया है कि दुपहिया वाहन दुर्घटनाओं में सिर तथा मस्तिष्क की चोटें सबसे घातक होती हैं। उदाहरण के लिए, राजस्थान में यह पाया गया है कि हेलमेट का उपयोग कम होने की वजह से सिर संबंधी गंभीर चोटों का जोखिम बहुत अधिक है।जब कोई इंजन-वाहक वाहन लुढ़कता है या टकराता है, तो सिर ढीले में बाहर निकलने खतरे में रहता है — हेलमेट इस तरह की चोटों को बहुत हद तक कम कर सकता है।
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दुर्घटना-मौतें और आंकड़े
राजस्थान राज्य में हाल के वर्ष में वाहन दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ती दिख रही है। उदाहरण के लिए, 2023 में प्रदेश में 24,705 दुर्घटनाएं हुईं जिनमें 11,762 लोगों की मौत हुई है।खास-तौर पर दोपहिया वाहन चालकों की मौत का आंकड़ा चिंताजनक है — रिपोर्ट बताती है कि दोपहिया वाहन चालकों के बीच हेलमेट नहीं पहनने की प्रवृत्ति, दुर्घटना में सिर-चोट की संभावना बढ़ा देती है।
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कानूनी एवं नीतिगत आधार
राजस्थान के ट्रैफिक विभाग ने 2022 में हेलमेट पहनने को लेकर “मेगा रोड-सेफ्टी ड्राइव” शुरू किया था जिसमें बताया गया कि राज्य में लगभग 4,000 लोगों की जान हर साल हेलमेट न पहनने के कारण बचाई जा सकती है।वास्तव में, न्यूनीकरण की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं — लेकिन व्यवहार-स्तर पर अनुपालन धीमा रहा है।
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सामाजिक-आर्थिक प्रभाव
हेलमेट पहनना केवल व्यक्तिगत सुरक्षा नहीं; यह सामाजिक जिम्मेदारी भी है। यदि कोई परिवार का कमाने वाला सिर-चोट की वजह से काम नहीं कर पाए, तो पूरा परिवार आर्थिक संकट में पड़ सकता है। हेलमेट पहनने से यह संभावना कम होती है। -
विशेष रूप से पर्यटन-स्थलों में अनिवार्यता
जैसलमेर जैसे पर्यटन नगरी में प्रतिदिन हजारों आगंतुक आते-जाते हैं, दोपहिया वाहन का उपयोग बहुत होता है — स्थानीय व पर्यटक दोनों। ऐसे में यदि हेलमेट पहनने का सामान्य अभ्यास बन जाए, तो दुर्घटना होने पर बचाव-संभावना बढ़ जाती है तथा नगरी का सुरक्षित छवि भी बनी रहती है।
जैसलमेर में विशेष चुनौती
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जैसलमेर एक विश्व-प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है — यहां पर्यटकों की सुबह से लेकर देर रात तक भीड़ लगी रहती है। बाजार भीड़ से अटे रहते हैं। मगर दोपहिया वाहन चालक हेलमेट नहीं पहनते।
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जैसलमेर में सड़क-संचालन और वाहन-संख्या में वृद्धि हुई है, लेकिन हेलमेट पहनने के प्रति जागरूकता कमजोर है।
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गर्म और शुष्क जलवायु में “हेलमेट पहनना गर्मी की वजह से असुविधाजनक” माना जाता है — यह एक शिकायत-मूलक कारण बना हुआ है। मगर यह स्थित जोधपुर जैसे महानगर में और भी ज्यादा है जहां बारह मास सूर्य तेजी से चमकता है, मगर यहां हेलमेट लगभग अनिवार्य है।
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जैसलमेर में ट्रैफिक नियमों का प्रवर्तन कमजोर दिख रहा है। यदि वाहन चालकों को भरोसा हो कि पकड़े नहीं जाएंगे, तो नियम उल्लंघन बढ़ता है।
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नगर में पर्यटक-वाहन, स्थानीय लोग, दोपहिया टैक्सी-स्कूटर आदि चल रहे हैं — इनके लिए हेलमेट-अनिवार्यता को सख्ती से लागू करना अत्यंत आवश्यक है।
वर्तमान में प्रशासनिक सुस्ती और आलोचना
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इस बीच, हमारे ध्यान में आया है कि पुलिस अधीक्षक, जैसलमेर अभिषेक शिवहरे — हेलमेट पहनने के नियम को लेकर अपेक्षित सख्ती नहीं दिखा रहे हैं।
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राज्य परिवहन व ट्रैफिक विभाग कई बार हेलमेट-प्रचार अभियान चला चुके हैं, लेकिन वास्तविक चालान कटने, ट्रैफिक चालकों द्वारा पकड़े जाने की संख्या बेहद कम है।
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यदि जैसलमेर में ट्रैफिक पुलिस समय-समय पर दुपहिया चालकों के हेलमेट न पहनने पर चालान काटें, वाहन जब्त करें, तो नियम का डर बढ़ेगा और अनुपालन बढ़ेगा। वर्तमान में यह चुनिंदा कार्रवाई या अभियान-उद्धेश्यात्मक लगती है, निरंतरता में नहीं।
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जहां एक ओर जैसलमेर में हर साल पर्यटकों की तादाद बढ़ती जा रही है, वहाँ दूसरी ओर सुरक्षा-प्रबंधन कमजोर बनना नगर की छवि के लिए भी जोखिम है।
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विशेष रूप से ये बातें ध्यान देने योग्य हैं:
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हेलमेट की अनिवार्यता सिर्फ कानून का फॉर्मैलिटी नहीं है — जीवन की रक्षा का प्रश्न है।
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यदि पुलिस-प्रशासन दृढ़ होकर नियम लागू करे, तो जैसलमेर “सुरक्षित पर्यटन-गंतव्य” के रूप में और भी बेहतर नाम कमा सकता है।
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लेकिन अगर मौजूदा स्थिति यूं ही बनी रही, तो वाहन-संख्या व पर्यटक-आकर्षण के गठजोड़ में दुर्घटना-संख्या बढ़ने का खतरा है।
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“राइजिंग भास्कर” का अभियान: हमारा प्रस्ताव
हम “राइजिंग भास्कर” के रूप में निम्नलिखित कदम उठाने का प्रस्ताव रखते हैं ताकि जैसलमेर में हेलमेट पहनने की संस्कृति को बदला जा सके:
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जागरूकता-कैंपेन: स्थानीय मीडिया, सोशल-मीडिया, होर्डिंग्स व स्कूली-कॉलेजों में हेलमेट के महत्व पर विशेष कार्यक्रम। यह बताना कि हेलमेट सिर्फ नियम नहीं, जीवन-सुरक्षा है।
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हेलमेट वितरण एवं निरीक्षण: स्थानीय ट्रैफिक पुलिस व प्रशासन मिलकर दुपहिया वाहन चालकों एवं पिलियन यात्रियों में आईएसआई मार्क वाले हेलमेट वितरण करें।
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चालान-प्रवर्तन में सख्ती: प्रति दिन हेलमेट न पहनने वालों का चालान काटना, वाहन जब्त-रखना, सार्वजनिक रूप से अभियान-दिखाना कि नियम सख्ती से लागू हो रहे हैं।
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विशेष “टूरिस्ट रूट्स” पर निगरानी: जैसलमेर में विशेषककर पर्यटन रूट पर और भीड़ वाले स्थानों पर विशेष हेलमेट निगरानी टीम लगाई जाए।
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पुलिस अधीक्षक इसे पत्र और सार्वजनिक अपील समझें: पुलिस अधीक्षक अभिषेक शिवहरे को सार्वजनिक रूप से उस दिशा में कदम उठाने के लिए आह्वान किया जा रहा है। जैसलमेर नगर में हेलमेट अनिवार्यता को प्राथमिकता दी जाए।
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मासिक ट्रैकिंग व रिपोर्टिंग: ट्रैफिक विभाग द्वारा मासिक हेलमेट पहनने की दर, चालान संख्या व दुर्घटना-संबंधी आंकड़े सार्वजनिक करना।
हेलमेट नहीं पहनना संस्कृति बन गया, इसे रोकें :
जैसलमेर जैसी ख्यातिप्राप्त पर्यटन-नगरी में हेलमेट पहनने की अनदेखी सिर्फ एक ट्रैफिक नियम का उल्लंघन नहीं है, बल्कि जीवन-सुरक्षा, परिवार-भविष्य और नगर-प्रतिष्ठा का प्रश्न है। यदि हम सभी — चालकों, पुलिस प्रशासन और मीडिया — मिलकर इस दिशा में सक्रिय हों, तो दुर्घटनाओं की संख्या कम की जा सकती है।
हम “राइजिंग भास्कर” की ओर से इस संदेश के साथ आह्वान करते हैं:
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दुपहिया वाहन चालक आज ही हेलमेट पहनें — अपने जीवन, अपने परिवार और अपनी नगरी के लिए।
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सहयात्री भी हेलमेट पहनें — आप चाहे पीछे बैठें, पर आप भी हेलमेट पहनें।
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नगर ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन, विशेष रूप से पुलिस अधीक्षक अभिषेक शिवहरे जी — कृपया इस दिशा में ठोस कदम उठाएं, छुट-फुट कार्रवाई की जगह निरंतर और सख्त प्रवर्तन की शुरुआत करें।
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स्थानीय समुदाय, होटल-टूर-ऑपरेटर — हेलमेट पहनना सांस्कृतिक-रूप से आम बनाएं, ताकि जैसलमेर सुरक्षा-युक्त पर्यटन-गंतव्य के रूप में चमकता रहे।
हेलमेट सिर्फ सिर पर एक टोपी नहीं है। यह हमारी जिम्मेदारी, हमारा परिवार-वचन और हमारी नगरी-सम्मान की गारंटी है।
आइए, जैसलमेर को सिर्फ “सुनहरे भवनों की नगरी” ही नहीं बल्कि “सुरक्षित दुपहिया-नगरी” के रूप में भी स्थापित करें। हमारी यह स्टोरी एक शुरुआत है — अगले कदम आपके हाथ में हैं।
Author: Dilip Purohit
Group Editor





