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Thursday, July 9, 2026, 12:55 pm

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शारदम स्वागतम में नारी सृजन का उत्सव – अंतरराष्ट्रीय श्रेया क्लब महिला प्रकोष्ठ का भव्य आयोजन सम्पन्न

लगभग एक माह तक चली इस श्रृंखला ने नारी सृजन, संस्कृति, भक्ति और भारतीय परंपरा को एक सूत्र में पिरो दिया। आयोजन का उद्देश्य था—सांस्कृतिक, धार्मिक एवं साहित्यिक परंपराओं को डिजिटल युग में भी जीवंत बनाए रखना।

रिपोर्ट : राखी पुरोहित, जोधपुर

अंतरराष्ट्रीय श्रेया क्लब महिला प्रकोष्ठ की ओर से अक्टूबर माह को समर्पित करते हुए आयोजित “शारदम स्वागतम” श्रृंखला का समापन 2 नवंबर को तुलसी विवाह के आयोजन के साथ हुआ। लगभग एक माह तक चली इस श्रृंखला ने नारी सृजन, संस्कृति, भक्ति और भारतीय परंपरा को एक सूत्र में पिरो दिया। आयोजन का उद्देश्य था—सांस्कृतिक, धार्मिक एवं साहित्यिक परंपराओं को डिजिटल युग में भी जीवंत बनाए रखना।

इस आयोजन में देश-विदेश से जुड़ी महिला प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मकता का परिचय देते हुए कविता, भजन, आरती, आत्म-संस्मरण, वीडियो प्रस्तुति और प्रभु शृंगार फोटो जैसी विभिन्न श्रेणियों में भाग लिया। हर सोमवार से शुक्रवार तक नई-नई प्रतियोगिताएं रखी गईं, जिनमें प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह से सहभागिता की।

विविध विषयों पर सृजन की झलक

“शारदम स्वागतम” कार्यक्रम में हर सप्ताह भारतीय संस्कृति से जुड़े पर्वों को विषय बनाया गया।

  • पहला सप्ताह : काव्य रचनाएं प्रस्तुत की गईं।

  • दूसरा सप्ताह : दीपावली की भावना को समर्पित था, जिसमें ‘प्रकाश से परिपूर्ण जीवन’ थीम पर स्वरचित कविताएं और आत्म-संस्मरण भेजे गए।

  • तीसरा सप्ताह :  भाई दूज, छठ पूजा, गोपाष्टमी और कार्तिक पूर्णिमा जैसे त्योहारों पर विशेष प्रतियोगिताएं हुईं।

  • चौथा सप्ताह : तुलसी विवाह और देवउठनी एकादशी की भक्ति भावना में डूबा रहा।

हर आयोजन में प्रतिभागियों ने न केवल धार्मिक भावनाओं को शब्दों में पिरोया बल्कि भारतीय परंपरा की गहराई को भी उजागर किया। कुछ प्रतिभागियों ने वीडियो के माध्यम से आरती, कथा व प्रभु शृंगार प्रस्तुत कर नई तकनीक को सृजन का माध्यम बनाया।

आयोजक मंडल की सक्रिय भूमिका

इस श्रृंखला की सफलता का श्रेय पूरे आयोजन दल को जाता है। संस्थापक डॉ. अर्चना श्रेया ने पूरे आयोजन का मार्गदर्शन किया और कहा—“नारी जब सृजन करती है, तो वह केवल शब्द नहीं रचती, बल्कि संस्कृति का भविष्य गढ़ती है।” क्लब की अध्यक्ष हेमाश्री ने बताया कि शारदम स्वागतम का उद्देश्य महिलाओं की प्रतिभा को मंच देना और उन्हें डिजिटल माध्यम से विश्व पटल पर स्थापित करना है। सलाहकार दीपमाला, संरक्षक वनदेवी, सांस्कृतिक सचिव तनुजा शुक्ला, संयोजक मीता लुनिवाल (मीत), महासचिव क्षमा पांडे, समीक्षक शिक्षा पांडे, पटल प्रभारी विनीता लावनियां, और मीडिया प्रभारी श्रीमती राखी पुरोहित ने मिलकर आयोजन को गतिशील रूप दिया। डॉ. सुमन मेहरोत्रा, शिवली गोस्वामी, डॉ. आनंदी सिंह रावत, सुनीता वर्मा, श्रीमती संतोष तोषनीवाल, मंजूषा दुग्गल, सुषमा प्रेम पटेल, डॉ. चंदा गुप्ता नेह,  अंजलि श्रीवास्तव, राजलक्ष्मी श्रीवास्तव, गीता कुमारी गुस्ताख, डॉ. नीलम, डॉ. प्रतीक्षा शर्मा, डॉ. संजीदा खानम, नीलम स्वयंसिद्धा, नीरजा शर्मा अवनि, अंबे कुमारी ने प्रतियोगिता में भाग लिया। सबको सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया गया।

हर सदस्य ने अपने-अपने दायित्वों का निष्ठा से निर्वहन किया। मीडिया प्रभारी राखी पुरोहित ने बताया कि इस कार्यक्रम की खबरें और प्रतिभागियों की झलकियां सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर निरंतर साझा की गईं, जिससे क्लब की लोकप्रियता देश-विदेश में फैली।

तुलसी विवाह पर हुआ समापन

2 नवंबर को तुलसी विवाह के साथ यह सृजन यात्रा अपने चरम पर पहुंची। इस अवसर पर प्रतिभागियों ने तुलसी और शालिग्राम के पावन विवाह पर आधारित कविताएं, गीत और भजन प्रस्तुत किए। तुलसी विवाह का विषय महिलाओं के लिए विशेष भावनात्मक महत्व रखता है, क्योंकि यह जीवन में समर्पण, शुद्धता और नए आरंभ का प्रतीक है।

आयोजन के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। यह प्रमाण-पत्र न केवल उनकी प्रतिभा की पहचान बने बल्कि उन्हें आगे भी अपनी रचनात्मकता को निखारने की प्रेरणा देंगे।

सांस्कृतिक एकता का सशक्त उदाहरण

‘शारदम स्वागतम’ का सबसे सुंदर पहलू यह रहा कि इसमें भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी महिलाएं जुड़ीं। राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली समेत कई राज्यों से प्रतिभागियों ने भाग लिया। वहीं दुबई, सिंगापुर, अमेरिका और कनाडा से भी भारतीय मूल की महिलाएं इस ऑनलाइन आयोजन का हिस्सा बनीं।

इस प्रकार यह कार्यक्रम केवल एक सांस्कृतिक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि वैश्विक भारतीयता का उत्सव बन गया। हर प्रस्तुति में संस्कृति की गहराई, आस्था का भाव और नारी सशक्तिकरण की झलक स्पष्ट दिखी।

साहित्य और भक्ति का संगम

आयोजन में कई प्रतिभागियों ने स्वरचित कविताओं में माँ सरस्वती का वंदन किया—
“शारदे मां, दो वाणी ऐसी जो जग को उजियारा दे,
हर शब्द में संस्कृति की गंध हो, जो मन को सहारा दे।”

भजन और आरती प्रस्तुतियों में भक्ति रस छलकता रहा। वीडियो प्रस्तुतियों में पारंपरिक परिधान और साज-सज्जा ने धार्मिकता को दृश्य रूप दिया।

आने वाले आयोजनों की झलक

क्लब की संस्थापक डॉ. अर्चना श्रेया ने बताया कि आने वाले महीनों में “सांस्कृतिक संवाद श्रृंखला” और “नारी नवोदय उत्सव” जैसे नए कार्यक्रमों की योजना है, जिसमें देशभर की महिला प्रतिभाएं भाग लेंगी।

उन्होंने कहा—“हमारा उद्देश्य केवल आयोजन करना नहीं, बल्कि महिला शक्ति को आत्मविश्वास और मंच देना है। हमारी हर प्रतियोगिता यह बताती है कि नारी केवल घर की नहीं, समाज और संस्कृति की भी आधारशिला है।”

पारंपरिक मूल्यों के प्रचार का सशक्त माध्यम बना आयोजन

6 अक्टूबर से 2 नवंबर तक चली ‘शारदम स्वागतम’ श्रृंखला ने यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय नारी जब मंच पर आती है, तो वह भक्ति, सृजन और परंपरा तीनों को अपने शब्दों और भावों में समेट लेती है।
यह आयोजन न केवल साहित्यिक उत्कृष्टता का उदाहरण बना, बल्कि महिला सशक्तिकरण, भारतीय संस्कृति के संरक्षण और डिजिटल युग में पारंपरिक मूल्यों के प्रचार का भी सशक्त माध्यम सिद्ध हुआ।

“शारदम स्वागतम” — जहां नारी ने शब्दों में संवेदना, भक्ति में सौंदर्य और परंपरा में प्रगति का संगम रचा। 

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor