Explore

Search

Thursday, July 9, 2026, 8:59 am

Thursday, July 9, 2026, 8:59 am

LATEST NEWS

The specified slider does not exist.

Lifestyle

अनिल अंबानी बोले- ईडी ने कार्रवाई ना करने की एवज में मांगे थे 500 करोड़, बैंकों से हमने अपनी शर्तों पर लोन लिया, कर्ज चुका रहे, प्रक्रिया जारी, फिर फ्रॉड कैसे?

अनिल अंबानी पर आरोप है कि उन्होंने 13600 करोड़ का कर्ज पुराने कर्ज चुकाने के लिए ही लिया। 12600 करोड़ कर्ज की रकम ग्रुप की दूसरी कंपनियों के खाते में डाली। 1800 करोड़ से एफडी/एमएफ में निवेश किया गया। फिर इसे वापस कंपनी के मूल खाते में लाए।…
क्या अनिल अंबानी ने फ्रॉड किया- अंबानी बोले- उन्होंने कोई फ्रॉड नहीं किया, लोन की राशि बराबर चुका रहे, चुकाने के लिए सक्षम, प्रक्रिया जारी, कई प्रोजेक्ट लॉन्च करने की स्थिति में, मगर ईडी ने बैंकों के फ्रॉड की अनदेखी की, उन्हें राजनीतिक और व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा के तहत फंसाया जा रहा है, पेश है पूरी रिपोर्ट-
डीके पुरोहित. मुंबई
अनिल अंबानी ने साेमवार को उनके खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर कहा कि ईडी ने कार्रवाई ना करने की एवज में 500 करोड़ रुपए मांगे थे। 20 से अधिक बैंकों से हमने अपनी शर्तों पर लोन लिया था। कर्ज चुका रहे हैं और प्रक्रिया अनवरत जारी है, फिर फ्रॉड कैसे हुआ?
अनिल अंबानी की कंपनियों को यस बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक सहित 20 सरकारी और प्राइवेट बैंकों ने लोन दिया है। लोन लेना और चुकता करना एक व्यावसायिक प्रक्रिया है। अनिल पर मुख्य आरोप यह है कि उन्होंने कर्ज लेकर कर्ज चुकारा किया, जबकि अनिल का कहना है कि यह एक स्वाभाविक व्यावसायिक प्रक्रिया है और 80 प्रतिशत कंपनियां ऐसा ही करती है, मगर ईडी ने उन्हें राजनीतिक षड़यंत्र और व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा के तहत साजिशतन फंसाने का प्रयास किया है।

क्या है मामला?  

ईडी के मुताबिक मामला  17000 करोड़ रुपये के घोटाले से जुड़ा हुआ है, इसमें लगभग 20 सरकारी और प्राइवेट बैंकों से लिया गया लोन शामिल है। ईडी के मुताबिक रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस पर 8,226 करोड़ रुपये से ज्यादा, रिलायंस होम फाइनेंस पर 5,901 करोड़ रुपये से ज्यादा और रिलायंस कम्युनिकेशंस पर लगभग 4,105 करोड़ रुपये का बकाया है। इसी सिलिसले में  ईडी ने अनिल अंबानी ग्रुप से जुड़ी 7545 करोड़ की संपत्ति कुर्क की है। अनिल अंबानी ने आरोप लगाया है कि ईडी ने कार्रवाई नहीं करने की एवज में 500 करोड़ रुपए मांगे थे, जब हमने यह राशि देने से इनकार किया तो उन्होंने जबरन संपत्ति जब्त कर ली। ईडी ने यह भी पाया कि 2017-19 के बीच यस बैंक ने अवैध तरीके से अनिल अंबानी की कंपनियों को लोन दिया था, जिसे बाद में कहीं और डायवर्ट कर दिया गया। जांच में यह सामने आया कि लोन अप्रूव होने से पहले बैंक प्रमोटरों को पैसे भेजे गए थे। आरोप यह भी है कि कई कंपनियों को लोन पहले मिला और कागजात बाद में तैयार किए गए। कुछ मामले ऐसे भी रहे, जिनमें लोन अप्रूव भी नहीं हुआ, लेकिन पैसे पहले ही ट्रांसफर कर दिए गए। अनिल का कहना है कि जाहिर है कि बैंक खुद लोन देने के लिए फ्रॉड करते रहे और अब अपनी गलती छुपाने के लिए उन्हें घसीटा जा रहा है, जबकि वे लोन चुकाने की स्थिति में है और प्रक्रिया चल रही है।

हमने कभी नहीं कहा कि लोन नहीं चुकाएंगे, प्रक्रिया चल रही, नए प्रोजेक्ट इंतजार कर रहे : अनिल

अनिल अंबानी ने कहा कि वे कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने साफ किया जो 20 से अधिक बैंक उन पर कर्ज लेने के मामले में धोखाधड़ी का आरोप लगा रहे हैं, उनसे हमने अपनी शर्तों पर लोन लिया था और हमने कभी नहीं कहा कि हम बैंकों का कर्ज नहीं चुकाएंगे। ना हम भगोड़ों की तरह देश छोड़कर भागने वाले हैं और ना ही घबराने वाले। अनिल ने कहा कि उनकी कंपनी कर्ज चुकाने में सक्षम है और उनके देश भर में कई नए प्रोजेक्ट लॉन्च होने की तैयारी में है। कर्ज चुकाने की प्रक्रिया चल रही है और वे जल्द ही अपना कर्ज चुका देंगे। हमें इस देश के कानून पर पूरा भरोसा है।

हमने बैंकों से कुछ भी नहीं छुपाया, बैंक अपनी गलतियां नहीं देख रहे, उन्हें जबरन घसीट रहे : 

अनिल ने कहा कि जब उनकी कंपनी ने लोन लिया तो सभी बैंकों को उनकी वित्तीय स्थिति के बारे में पूरी जानकारी थी। हमने कुछ भी नहीं छुपाया और अपनी शर्तें पहले ही बैंकों को बता दी थी। मगर बैंकों ने उस समय उन्हें लोन बांट दिया और अब अपनी शर्तें थोप रही है। हम बैंक के डिफोल्टर नहीं हैं। हकीकत में बैंक खुद ही डिफॉल्टर है जिन्होंने हमारी शर्तों पर लोन दिया और अब अपनी शर्तें थोप रहे हैं।

131 एकड़ में फैली घीरूभाई अंबानी नॉलेज सिटी को भी ईडी ने अटैच किया : 

गौरतलब है कि रिलायंस अनिल अबानी ग्रुप की नवी मुंबई में 131 एकड़ में फैली धीरूभाई अंबानी नॉलेज सिटी को ईडी ने सोमवार को अटैच कर लिया। इसका मूल्य करीब 4,462.81 करोड़ रुपए आंका गया है। कार्रवाई आरकॉम से कथित जुड़े बैंक धोखाधड़ी केस में की गई। अब तक अनिल ग्रुप की 7,545 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच हो चुकी है। इससे पहले र्हडी ने आरकॉम रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस और रिलायंस होम की 3,083 करोड़ की 42 संपत्ति अटैच की थी। अनिल समूह की 5 कपंनियों ने 2010 से 2012 के बीच 40,185 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। 5 बैंक अनिल की कपंनियों को दिया कर्ज फ्रॉड घोषित कर चुके हैं। अनिल अंबानी के प्रतिनिधि के माध्यम से कहा गया कि अनिल साढ़े तीन वर्षों से बोर्ड में नही है।

अनिल पर आरोप और उनके सिलसिलेवार जवाब :

आरोप : एक- 13600 करोड़ का कर्ज पुराने कर्ज चुकाने के लिए ही लिया गया था।
जवाब : हमने अपनी शर्तें बैंक को पहले बता दी थी। उसके बाद ही लोन लिया गया।
आरोप-दो- 12600 करोड़ कर्ज की रकम ग्रुप की दूसरी कंपनियों के खाते में डाली गई।
जवाब : यह रूटीन प्रक्रिया, इससे कर्ज की राशि चुकता करने पर फर्क नहीं पड़ता। यह फ्रॉड नहीं क्योंकि हमने यह कभी नहीं कहा कि लोन चुकाएंगे नहीं। चुका रहे, प्रक्रिया जारी।
आरोप-तीन- 1800 करोड़ से एफडी/एमएफ में निवेश किया गया। फिर इसे वापस कंपनी के मूल खाते में लाए।
जवाब : कंपनियां ऐसा अक्सर अपनी पॉलिसी के तहत करती रहती हैं। यह बिजनेस प्रक्रिया का हिस्सा, इसे अपराध नहीं कह सकते। देश की 80 प्रतिशत कंपनियां ऐसी ही करती हैं।
अनिल ने आरोप नकारे, बोले- रूटीन प्रक्रिया, बिजनेस पॉलिसी को फ्रॉड नहीं कह सकते, बैंक प्रबंधक अपने फ्रॉड छुपाने उन्हें डिफॉल्टर बता रहे
अनिल ने कहा कि हमने बैंकों से कर्ज लेते समय कोई बात छुपाई नहीं थी। वित्तीय दस्तावेज बैंकों को बताए गए थे और हमने अपनी शर्तें भी बैंकों को बता दी थी। बैंकें सभी पड़ताल करने के बाद ही लोन दिया करती है। हमने बैंकों को पहले ही बता दिया था कि हम लोन राशि पुराने कर्ज चुकाने के लिए ले रहे हैं, मगर बैंकों ने खुद आगे बढ़कर हमें लोन लेने के रास्ते बताए और लोन देते वक्त कई दस्तावेजों पर साइन करवा लिए जिनकी जानकारी हमें नहीं थी।

हमारी व्यावसायिक साख खराब करने का षड़यंत्र : अनिल

अनिल ने कहा कि हम आज भी लोन की राशि चुकाने के लिए तैयार हैं और सक्षम हैं। हमने कोई धोखा नहीं किया, ईडी और बैंकों के सारे आरोप फर्जी हैं और हमारी व्यावसायिक साख खराब करने का षड़यंत्र है। बैक प्रबंधकों को भी आरोपी बनाया जाना था, क्योंकि कई बैंक प्रबंधक उन्हें देश छोड़ने की सलाह दे चुके हैं। मगर हम भगोड़े नहीं हैं। हम सारा कर्ज चुकाने की स्थिति में है और हमारे प्रोजेक्ट देश भर में लॉन्च होने की तैयारी में है।

अनिल के सिलसिलेवार जवाब :

जहां तक 13600 करोड़ का लोन पुराने कर्ज चुकाने के लिए लेने का आरोप है तो यह शर्त हम बैंकों को पहले ही बता चुके थे, बैंक ने किन कागजों पर साइन करवाए हमें नहीं पता। हम पर आरोप है कि 12600 करोड़ कर्ज की रकम ग्रुप की दूसरी कंपनियों के खाते में डाली गई। यह रुटीन की प्रक्रिया है, इससे लोन चुकाने की प्रक्रिया प्रभावित नहीं होती। 1800 करोड़ से एफडी/एमएफ में निवेश किया गया। फिर इसे वापस कंपनी के मूल खाते में लाए। यह बिजनेस पॉलिसी का एक हिस्सा होता है और ऐसा आमतौर पर सभी कंपनियां किया करती हैं। देश की करीब 80 प्रतिशत कंपनियां यही कदम उठाती है,  मगर ईडी और बैंक प्रंबधन मिलकर उन पर दबाव बना रहे हैं। इसके पीछे राजनीतिक और व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा के कारण है, जिसके तहत उनकी कंपनी को फंसाया जा रहा है।

चट्‌टान की तरह खड़े अनिल, ना टूटे, ना बिखरे; बोले- हम जल्द पुराना गौरव प्राप्त करेंगे

अनिल अंबानी बार-बार कानूनी शिकंजे और न्यायिक प्रक्रिया से गुजरने के बाद भी ना टूटे ना बिखरे। चट्‌टान की तरह डटे हुए हैं। यही अनिल की विशेषता है जो यह बताती है कि धैर्य और संयम की वे पराकाष्ठा तक जा सकते हैं। अनिल का कहना है कि वे छोटे-मोटे झंझावतों से घबराते नहीं हैं। वे जल्द ही अपना पुराना गौरव प्राप्त करेंगे।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor