कैंसर : जागरूकता ही बचाव
राखी पुरोहित. जोधपुर
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हर साल 7 नवंबर को हम Cancer (कैंसर) के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एकजुट होते हैं। इस दिन की शुरुआत 7 नवंबर 2014 से की गई थी, ताकि लोगों में इस जानलेवा बीमारी के प्रति जानकारी और सावधानी की संस्कृति बनी रहे। विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization, WHO) के अनुसार, 2022 में लगभग 20 मिलियन (2 करोड़) नए कैंसर के मामले दर्ज किए गए थे।
उसी वर्ष लगभग 9.7 मिलियन (97 लाख) लोगों की कैंसर के कारण मृत्यु हुई थी। यह आंकड़े बताते हैं कि लगभग हर पाँच में एक व्यक्ति lifetime में कैंसर का सामना करता है; और लगभग हर नौ में एक पुरुष तथा हर बारह में एक महिला कैंसर से मरती है। कैंसर अब विश्व स्तर पर मृत्यु का एक प्रमुख कारण बन चुका है।
भारत की स्थिति
भारत में कैंसर का बोझ भी बहुत भारी है। 2022 में भारत में लगभग 14.6 लाख (1.46 मिलियन) नए कैंसर मरीज सामने आए थे। एक अन्य आंकड़े के अनुसार भारत में 2024 के अनुमानित मृत्यु-संख्या कुल 8.74 लाख थी — पुरुषों में लगभग 4.60 लाख व महिलाओं में लगभग 4.14 लाख। 2022 में भारत में 9.1 लाख से भी अधिक लोगों की मौत कैंसर से हुई थी। भारत में मृत्यु-से-मामले अनुपात (mortality-to-incidence ratio) भी काफी ऊँचा है, जो इस बात की ओर संकेत है कि भारत में कैंसर का जल्द पता लगना और सफल इलाज करना अभी बहुत चुनौती है।
कैंसर क्या है और किस प्रकार होता है?
कैंसर मूलतः एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर की सामान्य कोशिकाएँ—जो नियंत्रित रूप से बढ़ती और विभाजित होती हैं—अनियंत्रित रूप से विभाजित होने लगती हैं। ये कोशिकाएँ एक जगह ट्यूमर (गांठ) बना सकती हैं, और कभी-कभी अन्य हिस्सों में फैल (मेटास्टैसिस) सकती हैं।
प्रमुख प्रकार-विभाजन
कैंसर किसी भी अंग या ऊतक में हो सकता है:
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कार्सिनोमा (Carcinoma) — ऊतक की सतही कोशिकाओं से उत्पन्न।
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सर्क्रोमा (Sarcoma) — मांसपेशियों, हड्डियों और अन्य कॉन्नेक्टिव ऊतकों से उत्पन्न।
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रक्तबुद्ध (Hematologic) कैंसर — जैसे ल्यूकेमिया, लिम्फोमा, मायलोमा।
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माइक्रोस्कोपिक एवं अन्य विशेष प्रकार — जैसे जीन म्युटेशन-कैंसर, विरासत में आने वाले कैंसर।
कैंसर किस प्रकार फैलता है?
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कोशिकाओं का अनियंत्रित बढ़ना → स्थानीय ट्यूमर बनना।
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आसपास के ऊतक में वृद्धि व प्रवेश (इनवेशन)।
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लसीका-तंत्र (lymphatic system) या रक्त-प्रवाह (bloodstream) द्वारा दूरस्थ अंगों में फैलाव (मेटास्टैसिस)।
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उदाहरण के लिए, स्तन कैंसर का ट्यूमर छाती में है लेकिन यह लसीका या रक्त द्वारा हड्डियों, फेफड़ों आदि में पहुँच सकता है।
बचाव के उपाय
कैंसर को पूरी तरह रोकना हमेशा संभव नहीं है, लेकिन जोखिम को बहुत हद तक कम किया जा सकता है। उपरोक्त वैश्विक-भारत आंकड़े हमें यह याद दिलाते हैं कि प्रारंभिक निदान और जीवनशैली में बदलाव कितना मायने रखता है।
रोकथाम-युक्त उपाय
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तंबाकू एवं धूम्रपान छोड़ना – यह कैंसर का सबसे महत्वपूर्ण जोखिम कारक है।
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शराबों का सेवन सीमित करना।
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सक्रिय जीवनशैली अपनाना – नियमित व्यायाम, स्वस्थ भोजन, ओबेसिटी नियंत्रित करना।
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सूर्य किरण से सुरक्षा – विशेषकर त्वचा कैंसर के लिए।
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संक्रामक कारकों का नियंत्रण – जैसे Human papillomavirus (HPV) संक्रमण से सर्विक्स कैंसर का जोखिम, हेपाटाइटिस B/C से लिवर कैंसर का जोखिम।
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नियमित स्क्रीनिंग – जैसे स्तन-कैंसर स्क्रीनिंग, सर्विक्स-कैंसर स्क्रीनिंग, कोलोनोग्राफी आदि। समय पर पता चलने पर इलाज आसान है।
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पर्यावरणीय कारकों से सावधानी – जैसे वायु प्रदूषण, रसायन, विकिरण, असुरक्षित वर्क-प्लेस एक्सपोज़र।
भारत में यह बात विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि कई नए मामले देर से पकड़े जाते हैं। यदि जागरूकता बढ़े और नियमित जाँच हो, तो मृत्यु दर कम हो सकती है।
इलाज और स्टेज (चरण)
कैंसर का इलाज बहुत हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस स्टेज में पता चलता है—यानी कितनी दूरी तक वह फैला है। इसे ‘स्टेजिंग’ कहते हैं।
स्टेजिंग का सामान्य विभाजन
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Stage 0 (In situ) – असामान्य कोशिकाएँ जहाँ बनी थीं वहीं सीमित।
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Stage I – ट्यूमर छोटा और एक ही स्थान पर; आसपास नहीं फैला।
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Stage II – ट्यूमर बड़ा या आसपास के टिश्यू/लसीका नोड्स में फैलना शुरू।
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Stage III – ट्यूमर और स्थानीय लसीका-नोड्स में गहराई से फैलना; संभवतः अन्य अंगों में न फैला हो।
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Stage IV – मेटास्टैसिस; दूरस्थ अंगों में फैल गया हो।
उपचार की दिशा
रोगी के कैंसर के प्रकार, स्टेज, आम स्वास्थ्य, आनुवंशिक विशेषताओं आदि पर निर्भर कट्टर निर्णय होते हैं। निम्नलिखित सामान्य विकल्प हैं:
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सर्जरी (Surgery): ट्यूमर को निकालने के लिए।
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रेडिएशन थेरेपी (Radiation): उच्च-ऊर्जा किरणों द्वारा कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करना।
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कीमोथेरेपी (Chemotherapy): दवाओं के माध्यम से अधिकांश बढ़ती हुई कैंसर कोशिकाओं को मारना।
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हॉर्मोन थेरेपी (Hormone therapy): कुछ कैंसर जैसे स्तन-प्रोस्टेट में हार्मोन को रोककर बढ़ने से रोकना।
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टारगेटेड थेरेपी (Targeted therapy) व इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy): आधुनिक विधियाँ जो विशेष म्युटेशन या रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करती हैं।
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पैलियेटिव/सपोर्टिव केयर: यदि पूरी तरह इलाज संभव न हो, तो जीवन-गुणवत्ता बनाए रखने हेतु।
कब इलाज संभव है?
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यदि कैंसर शुरुआती-स्टेज (I या II) में पकड़ा जाए — उपचार की संभावना बहुत अधिक होती है। क्योंकि ट्यूमर सीमित है, कंटेनमेंट बेहतर है और मेटास्टैसिस नहीं हुआ होता।
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स्टेज III में भी सफलता मिल सकती है, लेकिन अक्सर संयोजन-चिकित्सा (मल्टीमॉडल) की जरूरत पड़ती है।
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स्टेज IV में इलाज का उद्देश्य पूरी तरह ठीक करना नहीं बल्कि रोग को नियंत्रित करना, जीवनकाल बढ़ाना और लक्षणों को कम करना होता है।
इसलिए, जल्दी पता लगना (early diagnosis) और उचित उपाय तुरंत अपनाना बेहद महत्व रखता है।
जीवन शैली में सुधार, समय पर स्क्रीनिंग करवाकर बचाव संभव
कैंसर एक वैश्विक स्वास्थ्य-चुनौती है — दुनिया में लगभग 9.7 मिलियन लोगों की हर साल मौत कैंसर के कारण होती है; भारत में भी लाखों लोग प्रतिवर्ष इस बीमारी से जूझते हैं। लेकिन यह निराशाजनक कहानी पूरी नहीं है — क्योंकि अधिकांश कैंसर रोकथाम योग्य हैं, और यदि समय पर पता चल जाएँ तो उपचार योग्य भी हैं। जीवनशैली में सुधार, समय-समय पर स्क्रीनिंग कराना, और इलाज के अवसरों को समझना — ये सभी कदम हमें और हमारे प्रियजनों को इस बीमारी से बचने में मदद कर सकते हैं। हम सब- मिलकर इस जागरूकता दिवस पर प्रतिज्ञा करें कि हम अपनी सेहत के प्रति सजग रहेंगे, नियमित स्वास्थ्य-जाँच कराएँगे, और कैंसर के प्रति भय या लज्जा के बजाय — जानकारी, कार्रवाई और समर्थन की राह चुनेंगे। इस जागरूकता के बीच, यह ध्यान रखें कि अगर किसी में कोई असामान्य लक्षण दिखे—जैसे अनजाना वजन-घटाव, असाधारण थकान, किसी गाँठ-साथ लसीका में सूजन, खाँसी या ब्लीडिंग — तो देर न करें, विशेषज्ञ चिकित्सक से तुरंत संपर्क करें।





