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Thursday, July 9, 2026, 5:11 am

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त्रि-सेवा अभ्यास “त्रिशूल” : प्रमुख चरण के रूप में आयोजित अभ्यास अखंड प्रहार के दौरान कोणार्क कोर की परिचालन तैयारियों की समीक्षा की

अभ्यास का उद्देश्य भारतीय सेना की बहु-क्षेत्रीय (मल्टी-डोमेन) क्षमताओं को भारतीय वायुसेना के साथ समन्वय में संचालित एकीकृत अभियानों के माध्यम से प्रमाणित करना था।
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर 
9783414079 diliprakhai@gmail.com
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ, पीवीएसएम, एवीएसएम, जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, सदर्न कमांड ने त्रि-सेवा अभ्यास “त्रिशूल” के एक प्रमुख चरण के रूप में आयोजित अभ्यास अखंड प्रहार के दौरान कोणार्क कोर की परिचालन तैयारियों की समीक्षा की।
इस अभ्यास का उद्देश्य भारतीय सेना की बहु-क्षेत्रीय (मल्टी-डोमेन) क्षमताओं को भारतीय वायुसेना के साथ समन्वय में संचालित एकीकृत अभियानों के माध्यम से प्रमाणित करना था। आर्मी कमांडर ने संयुक्त हथियार अभियानों (Combined Arms Manoeuvres) का अवलोकन किया, जिसमें सेवाओं के बीच निर्बाध समन्वय, रणनीति, तकनीक और प्रक्रिया (TTPs) का परिष्कार तथा अगली पीढ़ी की युद्धक्षेत्र तकनीकों जैसे ड्रोन और प्रतिरोधी-ड्रोन प्रणालियों का प्रयोग प्रदर्शित किया गया।

युद्धक्षेत्र नवाचारों की समीक्षा की :

अभ्यास ने नव-प्रवर्तित प्लेटफार्मों और स्वदेशी नवाचारों का वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण स्थल (testbed) के रूप में भी कार्य किया। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने बैटल ऐक्स डिवीजन और कोणार्क कोर की युद्धक्षेत्र नवाचारों की समीक्षा की, जिनमें स्वदेशी रूप से विकसित ड्रोन, प्रतिरोधी-ड्रोन उपकरण और उन्नत बल संरक्षण उपाय शामिल थे। ये पहलें आत्मनिर्भरता की भावना और भारतीय सेना के गठन स्तर पर नवाचार को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। आर्मी कमांडर ने कोणार्क कोर और बैटल ऐक्स डिवीजन की तकनीक के नवोन्मेषी उपयोग, अनुकूलनशीलता और उच्च स्तर की परिचालन तत्परता की सराहना की। अभ्यास अखंड प्रहार भारतीय सेना के “JAI” मंत्र — संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और नवाचार — पर केंद्रित दृष्टिकोण को पुनः पुष्ट करता है, जो सदर्न कमांड की भूमिका को सामंजस्य, तकनीकी नवप्रवर्तन और बहु-क्षेत्रीय युद्धक्षेत्र में मिशन-तत्परता के माध्यम से रूपांतरण की दिशा में अग्रसर दिखाता है।
Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor