-श्री जागृति संस्थान आज के तनावपूर्ण माहौल में नकारात्मक विचारों की दीवारों को तोड़कर स्नेह और इंसानियत के पुल बनाने पर देगा जोर
राखी पुरोहित. जोधपुर
आज के तनावपूर्ण और विभाजित होते विश्व में सहिष्णुता की भावना पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गई है। इसी संदेश को प्रखर करने के उद्देश्य से श्री जागृति संस्थान की ओर से 16 नवंबर, रविवार को अंतरराष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस के अवसर पर एक विशेष संगोष्ठी ‘सहिष्णुता के दीप’ विषय पर आयोजित की जाएगी। यह कार्यक्रम केवल संस्थान के सदस्यों के लिए रहेगा, जिसमें सदस्य अपनी स्वयं की रचनाओं का पाठ कर सकेंगे।
संस्थान के अध्यक्ष राजेश भैरवानी और सचिव हर्षद सिंह भाटी ने बताया कि यह आयोजन रातानाडा पुलिस लाइन मुख्य गेट के समीप स्थित ग्रीन गैलेरी में शाम 4 से 6 बजे तक आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यूनेस्को ने 16 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस के रूप में घोषित किया है ताकि दुनिया भर में लोगों के बीच आपसी सम्मान, विविधता की स्वीकृति और एकता की भावना को बढ़ावा दिया जा सके।
सहिष्णुता नैतिक गुण नहीं बल्कि मानवीय अस्तित्व की अनिवार्यता :
हर्षद सिंह भाटी ने बताया कि आज के दौर में सहिष्णुता केवल एक नैतिक गुण नहीं, बल्कि मानवीय अस्तित्व की अनिवार्यता बन चुकी है। जब समाज जाति, धर्म, भाषा और विचारों के भेद से बंटता जा रहा है, तब सहिष्णुता वह दीप है जो अंधकार में रोशनी फैलाता है। यह दीप हमें यह सिखाता है कि मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन मनभेद नहीं होने चाहिए। सहिष्णुता का अर्थ केवल दूसरों के विचारों को स्वीकार करना नहीं, बल्कि उनका सम्मान करते हुए सौहार्दपूर्ण संवाद बनाए रखना भी है। ‘सहिष्णुता के दीप’ विषय पर होने वाली यह संगोष्ठी सदस्यों को आत्मचिंतन और अभिव्यक्ति का अवसर देगी। कविता, गीत, गजल, भजन, फिल्मी गीत, लघु कथा और विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से सहिष्णुता के महत्व को उजागर करने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही रचनाओं के माध्यम से समाज, देश और दुनिया में यह संदेश देने का प्रयास किया जाएगा कि कैसे प्रेम, आदर और मानवता के रिश्ते को सशक्त किया जा सकता है।
इंसान को जोड़ने की सबसे बड़ी डोर सहिष्णुता :
संस्थान के अध्यक्ष राजेश भैरवानी ने कहा कि “आज इंसान को इंसान से जोड़ने की सबसे बड़ी डोर सहिष्णुता है। जब हम दूसरों के विचारों को सुनना और समझना सीखेंगे, तभी सच्ची मानवता की स्थापना संभव है।” कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में यह संदेश देना है कि सहिष्णुता का दीप हर व्यक्ति के भीतर जलना चाहिए, तभी विश्व में शांति और सद्भाव कायम रह सकता है। श्री जागृति संस्थान का यह प्रयास न केवल सांस्कृतिक जागरूकता का प्रतीक है, बल्कि यह वर्तमान समय की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है — जहां सहिष्णुता ही एक ऐसा प्रकाश है जो विभाजन की दीवारों को तोड़कर इंसानियत का पुल बनाता है।
Author: Dilip Purohit
Group Editor





