कैलाश बिस्सा. जैसलमेर
यूं तो पूरा जैसलमेर ही अतिक्रमण का शिकार है, मगर पुराना बस स्टैंड भी अतिक्रमण से अछूता नहीं है। अतिक्रमण के साये में जी रहा यह पुराना बस स्टैंड अपने हाल पर आंसू बहा रहा है। चारों तरफ व्यापारी मध्य सड़क पर सामान रख कर पसर गए हैं। आए दिन चक्का जाम हो जाता है। राहगीरों का पैदल चलना भी दुश्वार हो गया है। जिम्मेदार कुंभरणीय नींद में है। इस समस्या की ओर से जिम्मेदारों का ध्यान नहीं जा रहा है। कहीं पशु धींगामस्ती कर रहे हैं तो कहीं ठेले वालों का कब्जा है। अस्त-व्यस्त इस बस स्टैंड के बुरे हाल हैं। प्रशासन इस ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहा है।




