“राइजिंग इंडिया विद अनिल अंबानी” – एक ऐसा राष्ट्रीय प्रोजेक्ट जो 20,000 लोगों को देगा रोजगार, हर साल 46,000 करोड़ का शुद्ध लाभ और बदलेगा सेवा क्षेत्र का चेहरा
गौरतलब है कि दीपावली पर अनिल अंबानी ने राइजिंग भास्कर ग्रुप के विस्तार के लिए 100 करोड़ की मदद का प्रस्ताव दिया था, मगर राइजिंग भास्कर ग्रुप के सीईओ दिलीप कुमार पुरोहित ने विनम्रतापूर्वक यह प्रस्ताव ठुकरा दिया था। हाल ही में अनिल को संकट में देख पुरोहित ने मित्र धर्म निभाते हुए उनके लिए नया प्रोजेक्ट तैयार किया है। इस प्रोजेक्ट के बाद अंबानी ने पुरोहित को जोधपुर में रहते हुए कंपनी सलाहकार के रूप में सेवाएं देने की पेशकश की है।
राही शुभम. मुंबई
कभी देश के सबसे चर्चित उद्योगपतियों में शामिल रहे अनिल धीरूभाई अंबानी अब एक बार फिर सुर्खियों में हैं। वजह है—एक ऐसा राष्ट्रीय प्रोजेक्ट जिसे ‘गेम चेंजर’ कहा जा रहा है। यह प्रोजेक्ट न तो किसी सरकारी योजना के तहत आता है, न किसी राजनीतिक फंडिंग से जुड़ा है। बल्कि इसे तैयार किया है राइजिंग भास्कर ग्रुप के सीईओ दिलीप कुमार पुरोहित ने। खास बात यह कि यह प्रोजेक्ट इतने सटीक, व्यवहारिक और लाभकारी मॉडल पर आधारित है कि इसे प्रस्तुति के सिर्फ 10 मिनट के भीतर अनिल अंबानी ने मंजूरी दे दी।इस परियोजना का नाम रखा गया है—राइजिंग इंडिया विद अनिल अंबानी।
अनिल ने क्यों दी “राइजिंग इंडिया विद अनिल अंबानी” प्रोजेक्ट को मंजूरी?
यह सिर्फ एक बिजनेस प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि सेवाओं के क्षेत्र में एक राष्ट्रीय क्रांति जैसा मॉडल है, जो एक ओर करोड़ों लोगों को किफायती सेवा उपलब्ध कराएगा, वहीं दूसरी ओर 20,000 युवाओं व प्रोफेशनल्स को रोजगार देगा। इतना ही नहीं, यह प्रोजेक्ट हर वर्ष ₹46,000 करोड़ से अधिक का शुद्ध लाभ कमाने की क्षमता रखता है।
प्रोजेक्ट की मूल भावना—रोजगार, सेवाएं और आत्मनिर्भरता
पूरे प्रोजेक्ट का मूल सिद्धांत है—
देश के हर वर्ग को
सस्ती, विश्वसनीय और तेज सेवाएं उपलब्ध कराना
और उन सेवाओं को देने के लिए
देश के 20,000 प्रोफेशनल्स को स्थायी रोजगार देना
इनमें डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, शिक्षक, कॉलेज लेक्चरर, वैज्ञानिक, फोटोग्राफर, पत्रकार, एकाउंटेंट, एआई इंजीनियर, सॉफ्टवेयर डेवलपर… यानी लगभग हर क्षेत्र के हाई-क्लास प्रोफेशनल शामिल होंगे।
प्रोजेक्ट की जरूरत क्यों पड़ी?
भारत में हर साल लाखों प्रोफेशनल युवा बेरोजगार हो जाते हैं। दूसरी ओर, आम लोगों के लिए डॉक्टर, वकील, इंजीनियर, काउंसलर, कंसल्टेंट—इन सबकी सेवा महंगी और जटिल होती जा रही है। इस प्रोजेक्ट ने इन दोनों समस्याओं को एक साथ संबोधित किया है—
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युवाओं को रोजगार
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जनता को सस्ता समाधान
यह मॉडल एक ऐसी श्रृंखला बनाता है जिसमें सेवा प्रदाता भी खुश और सेवा लेने वाला भी संतुष्ट।
20,000 प्रोफेशनल्स का विशाल नेटवर्क—भारत का सबसे बड़ा सेवा समूह
प्रोजेक्ट के तहत देश भर में कुल 20,000 लोग स्थायी रूप से नियुक्त किए जाएंगे। इन सभी पदों की CTC तीन साल तक फिक्स्ड रखी जाएगी, जिससे प्रोजेक्ट की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित रहेगी।
सूची बेहद विस्तृत है। इनमें शामिल हैं—
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डॉक्टर 800
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सर्जन 500
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नर्स 800
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फिजियोथेरेपिस्ट 500
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इंजीनियर (सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, कंप्यूटर) 2,500 से अधिक
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वकील 800
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CA, CMA, CS—1,800
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स्कूल शिक्षक 1,000
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कॉलेज लेक्चरर व प्रोफेसर 1,000
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वैज्ञानिक 100
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पत्रकार 500
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HR/Marketing टीम 1,000
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आईटी विशेषज्ञ 3,000+
और इस तरह एक 20,000 विशेषज्ञों का राष्ट्रीय नेटवर्क बनाया जाएगा जो पूरे देश को सेवा देने के लिए उपलब्ध होगा।
पूरा प्रोजेक्ट बिना जेब से पैसा लगाए—‘राइजिंग सर्विस शुल्क’ मॉडल
शुरुआती सेटअप को छोड़ दें तो इस योजना के लिए आपको जेब से एक भी रुपया लगाने की आवश्यकता नहीं है। पूरी राशि एक स्मार्ट सर्विस मॉडल से कलेक्ट होगी—
प्रति नागरिक सेवा शुल्क – ₹500/वर्ष
भारत की 100 करोड़ आबादी को टारगेट करते हुए
100 करोड़ × ₹500 = ₹ 50,000 करोड़
प्रति व्यवसाय शुल्क – ₹5,000/वर्ष
लगभग 50 लाख व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से
50 लाख × ₹5,000 = ₹ 25,000 करोड़
कुल वार्षिक राजस्व – ₹ 75,000 करोड़
यही मॉडल इस पूरी योजना को स्वयं-निर्भर और लाभकारी बनाता है।
खर्च का पूरा हिसाब—एकदम पारदर्शी गणना
1. कुल वार्षिक CTC खर्च
= ₹ 8,658 करोड़
2. इंफ्रास्ट्रक्चर + ऑपरेशन
= ₹ 20 करोड़
3. कुल वार्षिक खर्च
= ₹ 8,858 करोड़
और अब आती है सबसे बड़ी बात—प्रॉफिट
कुल राजस्व: ₹75,000 करोड़
कुल खर्च: ₹8,858 करोड़
इस तरह
प्रॉफिट = ₹66,142 करोड़
लेकिन यहाँ एक बहुत महत्वपूर्ण सामाजिक तत्व शामिल है—एक्सीडेंटल बीमा।
बीमा मॉडल—पूरे देश का सुरक्षा कवच
प्रोजेक्ट प्रत्येक नागरिक और प्रत्येक कर्मचारी को
₹2,00,000 का एक्सीडेंटल कवर देगा।
• कुल लाभार्थी: 100 करोड़ लोग + 50 लाख व्यवसाय
• यथार्थवादी क्लेम रेशियो: 0.20%
कुल बीमा लागत = ₹ 4,020 करोड़
अंतिम शुद्ध लाभ
अब बीमा के खर्च को निकालने के बाद–
प्रॉफिट = ₹66,142 – ₹4,020
= ₹62,122 करोड़ वार्षिक
इसमें से 25% राशि SIP में निवेश की जाएगी—
SIP निवेश = ₹ 15,530 करोड़ प्रति वर्ष
और अंत में बचता है—
अंतिम वार्षिक शुद्ध लाभ = ₹ 46,592 करोड़
(लगभग ₹46,000 करोड़)**
यानी यह प्रोजेक्ट सिर्फ सामाजिक ही नहीं, आर्थिक रूप से भी भारत के सबसे सफल मॉडलों में शामिल हो सकता है।
सेवाओं का अनोखा मॉडल—80% ऑनलाइन, 20% ऑफलाइन
80% ऑनलाइन सेवाएं
जैसे—
• डॉक्टर से ऑनलाइन कंसल्टेशन
• इंजीनियरिंग सलाह
• अकाउंटिंग/टैक्स
• लीगल एडवाइस
• साइबर सिक्योरिटी
• एआई/एमएल सपोर्ट
• मनोवैज्ञानिक परामर्श
• स्कूल/कॉलेज शिक्षा
• बिजनेस कंसल्टिंग
• डॉक्यूमेंट/रिपोर्ट/पेमेंट
राइजिंग इंडिया ऐप और वेबसाइट इस प्रोजेक्ट का प्रमुख आधार होंगे।
20% ऑफलाइन सेवाएं
जैसे—
• सर्जरी
• लैब टेस्ट
• फिजियोथेरेपी
• इंजीनियरिंग साइट विज़िट
• पत्रकारिता ग्राउंड रिपोर्ट
• R&D कार्य
• टूरिज्म और होटल मैनेजमेंट
इनके लिए देशभर के प्रमुख शहरों में
“राइजिंग इंडिया सर्विस सेंटर”
स्थापित किए जाएंगे।
मुंबई—राष्ट्रीय संचालन मुख्यालय
पूरे प्रोजेक्ट का कमांड सेंटर मुंबई में होगा—
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टेक्नोलॉजी सेंटर
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एडमिन ऑफिस
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कॉल सेंटर
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लीगल/ऑडिट विंग
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ट्रेनिंग सेंटर
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शिकायत निवारण सेल
यही वह जगह होगी जहां से पूरे देश का संचालन होगा।
प्रोजेक्ट समाज को क्या देगा?
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देश में 20,000 परिवारों को स्थायी रोजगार
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सभी वर्गों को सस्ती, तेज और विश्वसनीय सेवाएं
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डॉक्टर–वकील–इंजीनियर–टीचर—सबकी सुविधा आम आदमी के मोबाइल तक
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देश के गरीब और मध्यवर्गीय लोगों के लिए नया “सुरक्षा कवच”
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बिजनेस सेक्टर को—कम लागत में उच्च स्तरीय सेवाएँ
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लाखों युवाओं को कौशल आधारित प्रशिक्षण
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एक डिजिटल सेवा क्रांति, जो विश्व स्तर पर भारत को नई पहचान दिला सकती है
व्यापार जगत में चर्चा—क्या यह भारत की सबसे बड़ी सेवा परियोजना बन जाएगी?
राइजिंग इंडिया विद अनिल अंबानी प्रोजेक्ट को लेकर उद्योग जगत में भी चर्चा तेज है। कई विशेषज्ञ इसे भारत की संभावित सबसे बड़ी प्राइवेट सर्विस स्कीम मान रहे हैं।
कारण—
75,000 करोड़ का वार्षिक टर्नओवर
20,000 नौकरियाँ
100 करोड़ से अधिक लोगों को लाभ
बीमा सुरक्षा
डिजिटल क्रांति
कोई भारी प्रारंभिक निवेश नहीं
और हर वर्ष बढ़ता हुआ लाभ
यह किसी भी निजी क्षेत्र की परियोजना के लिए अत्यंत दुर्लभ मॉडल है।
चार बिंदुओं में प्रोजेक्ट का सार :
“राइजिंग इंडिया विद अनिल अंबानी”
सिर्फ एक बिजनेस नहीं, बल्कि—
रोजगार सृजन
सामाजिक सुरक्षा
डिजिटल सेवा सुधार
और वित्तीय आत्मनिर्भरता का
एक अनोखा संगम है।
अगर प्रोजेक्ट इसी दिशा में आगे बढ़ता है, तो यह आने वाले वर्षों में भारत के सेवा क्षेत्र का सबसे बड़ा परिवर्तनकारी अभियान बन सकता है। देश के 20,000 प्रोफेशनल्स, 100 करोड़ नागरिक, 50 लाख व्यवसाय और लाखों परिवार—सभी को इससे सीधा और त्वरित लाभ मिलेगा। यह प्रोजेक्ट, अनिल अंबानी के लिए एक नई शुरुआत हो सकता है—और भारत के लिए एक नया भविष्य।
Author: Dilip Purohit
Group Editor





