महावीर इंटरनेशनल ब्लू सिटी का उद्देश्य सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि जीवन में उजाला फैलाना है— सुधा गर्ग
राखी पुरोहित. दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
8302316074 rakhipurohit066@gmail.com
मानव सेवा। सेवा का मौका भाग्य से ही मिलता है। जब आदमी गरीब और जरूरतमंद हो तो जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। समाज में गरीब और वंचित वर्ग का बड़ा हिस्सा है। ऐसे लोगों के लिए सेवा कार्य करने वालों की संख्या कम ही है। संस्थाएं भी कम ही है। लेकिन इस बीच अच्छी खबर यह है कि महावीर इंटरनेशनल ब्लू सिटी का गठन 2018 में जोधपुर में किया गया। पहले इसका नाम महावीर इंटरनेशनल सनसिटी था। यह संस्था वैसे तो मानव सेवा के कई कार्य करती है मगर इसका मुख्य कार्य गरीब लोगों को निशुल्क नेत्र चिकित्सा उपलब्ध करवाना है। संस्था की अध्यक्ष सुधा गर्ग से राइजिंग भास्कर ने उनके चौपासनी हाउसिंग बोर्ड स्थित आवास पर साक्षात्कार लिया। पेश है संपादित अंश-
राइजिंग भास्कर : सबसे पहले बताइए कि महावीर इंटरनेशनल ब्लू सिटी की शुरुआत कैसे हुई और इसके पीछे आपकी प्रेरणा क्या रही?
सुधा गर्ग: महावीर इंटरनेशनल ब्लू सिटी की स्थापना वर्ष 2018 में हुई थी। पहले यह संस्था महावीर इंटरनेशनल सनसिटी के नाम से जानी जाती थी, लेकिन बाद में हमारे शहर की पहचान के अनुरूप इसका नाम बदलकर ब्लू सिटी रखा गया। इस संस्था की स्थापना का मुख्य उद्देश्य केवल एक था—मानव सेवा को प्राथमिकता देना और समाज के वंचित वर्ग के जीवन में रोशनी लाना। मुझे शुरू से ही यह संस्कार मिला है कि सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। इसलिए जब इस संस्था की कमान मेरे हाथ में आई, तो मैंने दृढ़ निश्चय किया कि इसे सेवा के नए आयाम तक ले जाना है।
राइजिंग भास्कर : संस्था के प्रमुख उद्देश्यों और नियमित सेवाओं के बारे में विस्तार से बताइए।
सुधा गर्ग: हमारा उद्देश्य बहुत व्यापक है, लेकिन मुख्य रूप से हम चार प्रमुख क्षेत्रों में लगातार काम कर रहे हैं—
-
मानव सेवा
-
निशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर एवं लैंस प्रत्यारोपण
-
गरीब परिवारों को राशन सामग्री distribution
-
शादी-ब्याह में सहयोग
नेत्र सेवा हमारे काम का मुख्य केंद्र है। हम महीने में तीन बार निशुल्क नेत्र चिकित्सा और लैंस प्रत्यारोपण शिविर आयोजित करते हैं, जिसमें—
-
आंखों की निशुल्क जांच होती है
-
चयनित मरीजों का निशुल्क लैंस प्रत्यारोपण ताराबाई देसाई नेत्र चिकित्सालय, शास्त्री नगर में होता है
-
मरीजों को दवाइयां और चश्मे भी पूरी तरह निशुल्क दिए जाते हैं
हमारा प्रयास है कि उपचार किसी की आर्थिक स्थिति पर निर्भर न रहे।
राइजिंग भास्कर : इन शिविरों का आयोजन कहां-कहां और कब-कब किया जाता है?
सुधा गर्ग: हमने शिविरों को इस तरह व्यवस्थित किया है कि अधिकतम लोगों तक पहुंच बनाई जा सके—
-
हर महीने की 20 तारीख को रातानाडा स्थित राजकीय शहरी प्राथमिक चिकित्सालय (बालासती माता), स्मार्ट पॉइंट के सामने शिविर लगाया जाता है।
-
पहला शिविर — पहले शुक्रवार को राजकीय चिकित्सालय, उदयमंदिर में होता है।
-
दूसरा शिविर — दूसरे शनिवार को जूना खेड़ापति हनुमान मंदिर, कमला नेहरू नगर में शुरू किया गया है।
हम कोशिश करते हैं कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में ये सेवा नियमित रूप से पहुंचे। मरीजों को सिर्फ आधार कार्ड और बीपीएल कार्ड की फोटो कॉपी लानी होती है। बाकी सारी जिम्मेदारी हमारी है।
राइजिंग भास्कर : क्या कभी ऐसा अवसर आया जब आप लोगों ने किसी की आंखों में दोबारा रोशनी लाने में सफलता पाई हो?
सुधा गर्ग: हां, ऐसे कई भावुक और प्रेरक क्षण हमारे लिए यादगार हैं। कुछ साल पहले एक गांव की लड़की हमारे शिविर में आई थी। डॉक्टरों ने बताया कि ऑपरेशन मुश्किल होगा, लेकिन हमने परिवार को भरोसा दिलाया कि कोशिश करेंगे। और ईश्वर की कृपा से उसके लैंस प्रत्यारोपण सफल हुआ—उसकी आंखों में फिर से रोशनी लौट आई। ऐसे क्षण हमें महसूस कराते हैं कि हमारा उद्देश्य सही है, और हम सही मार्ग पर हैं।
राइजिंग भास्कर : नेत्र शिविरों के अलावा आप और किन सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय हैं?
सुधा गर्ग: हमारा मानना है कि सेवा का दायरा सीमित नहीं होना चाहिए। इसी सोच के साथ—
-
हम आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राशन सामग्री वितरित करते हैं
-
जरूरतमंद परिवारों के शादी-ब्याह में सहयोग करते हैं
-
और अब 22 फरवरी को सेवा भारती संस्था के सामूहिक विवाह समारोह में भी हम सक्रिय सहयोग देंगे
इस सामूहिक विवाह में 21 जोड़ों का विवाह होना है और हम पूरी तैयारी के साथ इसमें शामिल होंगे।
हमारी टीम का हर सदस्य इस कार्यक्रम को सेवा का बड़ा अवसर मानता है।
राइजिंग भास्कर : आपकी संस्था की कार्यकारिणी में कौन-कौन से सदस्य शामिल हैं?
सुधा गर्ग: हमारी पूरी टीम बेहद समर्पित है। मेरे साथ—
-
उपाध्यक्ष – गीता जोशी
-
सचिव – राजीव सक्सेना
-
सह-सचिव – सोनू सक्सेना
-
कोषाध्यक्ष – महेंद्रराज लूणावत
-
राजकुमार डागा
-
सुनीता मालवीया
जैसे निष्ठावान साथी काम कर रहे हैं। ये लोग सिर्फ पदाधिकारी नहीं हैं—ये हमारी संस्था की रीढ़ हैं। हर शिविर, हर कार्यक्रम, हर सेवा कार्य में ये लोग दिल से जुटते हैं।
राइजिंग भास्कर : नेत्र चिकित्सा क्यों आपकी प्राथमिकता है?
सुधा गर्ग: क्योंकि नेत्र ज्योति ही जीवन का पहला प्रकाश है। आंखों में समस्या होना एक ऐसा कष्ट है जो व्यक्ति को अंधेरे में धकेल देता है। गरीब परिवार अक्सर महंगे इलाज का खर्च नहीं उठा पाते।
हमारा उद्देश्य यह है कि—
“कोई भी व्यक्ति सिर्फ पैसे की कमी के कारण अंधेरा न झेले।”
मेरा व्यक्तिगत अनुभव है कि जब किसी मरीज की आंखों में ऑपरेशन के बाद रोशनी लौटती है, उसकी मुस्कान हमारे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार होती है।
राइजिंग भास्कर : भविष्य में आप संस्था के माध्यम से कौन-से नए कार्य जोड़ना चाहती हैं?
सुधा गर्ग: हमारी योजना है कि—
-
नेत्र शिविरों की संख्या बढ़ाई जाए।
-
ग्रामीण क्षेत्रों में भी कार्य करने की सोच रहे हैं।
-
महिलाओं और बुजुर्गों को कैंप में प्राथमिता दी जाती है।
-
सामुदायिक विवाह में हमारी भागीदारी लगातार बढ़े।
-
अधिक से अधिक लोगों तक दवा, चश्मा और ऑपरेशन की सुविधा पूर्णतः निशुल्क पहुँचे
हमारा सपना है कि जोधपुर में कोई भी व्यक्ति नेत्र चिकित्सा के बिना न रहे।
राइजिंग भास्कर : समाज के लिए आपका संदेश क्या है?
सुधा गर्ग: मेरे लिए सेवा किसी दिखावे का काम नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका है। मैं सभी से यही कहूंगी—“जहां तक हो सके, सेवा करते रहें। सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है।” खासकर गरीब, बुजुर्ग और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना मानवता का सर्वोच्च कार्य है। अगर हम सब मिलकर थोड़ा-थोड़ा सहयोग करें, तो दुनिया बदल सकती है।
Author: Dilip Purohit
Group Editor





