एनडीए सरकार चाहे तो बिहार में सुशासन की नींव रख सकती है। बिहार की जनता पर जो कर्ज का बोझ है उसे भी उतारा जा सकता है। राइजिंग भास्कर ने नीतीश कुमार की सरकार के लिए ऐसा मुक्कमल प्रोजेक्ट तैयार किया है जिसे लागू किया जाए तो पांच साल में सारी घोषणाएं, सारे वादे पूरे होंगे और सरकार का बजट भी घाटे में नहीं जाएगा। प्रस्तुत है खास रिपोर्ट…।
दिलीप कुमार पुरोहित. पटना
बिहार की एनडीए सरकार ने जो वादे किए हैं उसे देखते हुए क्या सभी वादे पूरे किए जा सकते हैं? बिहार की एनडीए सरकार का पांच साल का राइजिंग भास्कर के ग्रुप एडिटर दिलीप कुमार पुरोहित ने रोडमैप तैयार किया है। अगर इस रोडमैप को बिहार की एनडीए सरकार लागू करती है तो पांच साल में आसानी से सारी घोषणाएं और सारे वादे पूरे हो सकते हैं। यहां बिहार की एनडीए सरकार के लिए पांच वर्षों का संपूर्ण, तथ्याधारित, वित्तीय-संतुलित, लाभकारी और क्रियान्वयन योग्य रोडमैप प्रस्तुत है। जिसमें—
-सभी घोषित योजनाएं लागू की गई हैं।
-उनके लिए आवश्यक कुल व्यय का अनुमान।
-वसूली का अनुमान।
-नए राजस्व स्रोत।
-घाटा/लाभ का मूल्यांकन।
-वित्तीय अनुशासन के साथ पूरा 5-वर्षीय ब्लूप्रिंट।
-रोजगार सृजन व औद्योगिक विकास मॉडल (Rising Bihar)।
-प्रशासनिक सुधार।
—सब कुछ शामिल है। हां कुछ घोषणाओं में मामूली परिवर्तन किया गया है ताकि उसे शत प्रतिशत लागू किया जाए। अन्यथा यह घोषणाएं कागजी सिद्ध होगी और एनडीए सरकार की साख खतरे में नजर आएगी। अगर सरकार बिना लाभकारी प्रोजेक्ट और प्लान तैयार किए वादे पूरा करना चाहेगी तो बिहार की जनता पर बोझ बढेगा और सरकार घाटे में नजर आएगी। लेकिन दिलीप कुमार पुरोहित ने पांच साल का जो रोडमैप तैयार किया है उसमें घाटे की गुंजाइश समाप्त हो जाती है।
बिहार सरकार का पांच वर्ष का रोडमैप
(2026–2031) : NDA Policy Blueprint & Financial Sustainability Model)
I : ध्यान देने योग्य तथ्य :
बिहार की जनसंख्या लगभग 13 करोड़, राजस्व संरचना जटिल, ऋण–GDP अनुपात 38.9%, तथा वार्षिक 2.94 लाख करोड़ का बजट—इन सबको देखते हुए सरकार का उद्देश्य दोहरा है:
-
जनकल्याणकारी वादों को पूर्ण करना
-
राज्य वित्त को घाटे से लाभ की स्थिति में लाना
इसके लिए आवश्यक है:
-
योजनाओं का मॉड्यूलर फाइनेंसिंग
-
आंशिक उपयोगकर्ता शुल्क मॉडल
-
बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश
-
कर संग्रह क्षमता बढ़ाना
-
गैर-कर राजस्व को दोगुना करना
-
राजकोषीय अनुशासन
यह रिपोर्ट पूरी तरह इसी सिद्धांत पर आधारित है।
II : सभी योजनाओं का व्यय एवं वसूली विवरण
अब एक-एक योजना का पांच वर्षीय वित्तीय विवरण निकालते हैं।
1. जीविका दीदी योजना
1.50 करोड़ महिलाओं को एकमुश्त 10,000 रु सहायता
-
कुल व्यय = 1.50 करोड़ × 10,000 = 15,000 करोड़
मासिक वापसी (50 रु × 60 माह) (ऐसा सरकार नहीं करेगी तो वादे पूरे होने मुश्किल हैं।)
प्रत्येक से वसूली = 3,000 रु
5 वर्षों में कुल वसूली = 1.50 करोड़ × 3,000 = 4,500 करोड़
Net Expenditure = 15,000 – 4,500 = 10,500 करोड़
2. मुख्यमंत्री रोजगार योजना (महिलाएं—अनुमानित 2 करोड़)
सहायता राशि: 2 लाख प्रति महिला (Soft Loan Type)
कुल व्यय = 2 करोड़ × 2,00,000 = 4,00,000 करोड़
वसूली (200 रु × 60 माह) (सरकार को ऐसा करना ही होगा तब योजना सफल होगी)
प्रत्येक से = 12,000
कुल वसूली = 2 करोड़ × 12,000 = 24,000 करोड़
Net Expenditure = 4,00,000 – 24,000 = 3,76,000 करोड़
(ध्यान: यह राशि चरणबद्ध 5–10 वर्षों में वितरित की जाएगी, पूरी एक साथ नहीं।)
पहले पाँच वर्षों में केवल 60% क्रियान्वयन मानते हैं:
5 वर्षों का व्यय = 3,76,000 का 60% = 2,25,600 करोड़
3. बुजुर्ग / विधवा / दिव्यांग पेंशन ( अनुमानित 1.5 करोड़ लोग)
प्रति माह 1100 रु = वार्षिक 13,200 रु
कुल वार्षिक = 1.5 करोड़ × 13,200 = 19,800 करोड़
5 वर्ष = 99,000 करोड़
Net Expenditure = 99,000 करोड़
4. अति पिछड़ा वर्ग व्यावसायिक समूह ( अनुमानित 20 लाख समूह)
प्रति समूह 10 लाख सहायता
कुल अनुदान = 20 लाख × 10,00,000 = 2,00,000 करोड़
वसूली (1,000 × 60 = 60,000 रु)
कुल वसूली = 20 लाख × 60,000 = 12,000 करोड़
Net Expenditure = 1,88,000 करोड़
5 वर्षों में केवल 50% क्रियान्वयन का अनुमान:
व्यय = 94,000 करोड़
5. मत्स्य पालक सहायता ( अनुमानित 3 लाख, प्रतिवर्ष 9,000)
वार्षिक व्यय = 3 लाख × 9,000 = 270 करोड़
5 वर्ष = 1,350 करोड़
6. किसान सहायता योजना ( अनुमानित 2 करोड़ किसान)
वार्षिक 3,000 दिया जाएगा
वार्षिक व्यय = 2 करोड़ × 3,000 = 6,000 करोड़
5 वर्ष = 30,000 करोड़
वसूली 50 रु वार्षिक (2,50 रु / 5 वर्ष)
वसूली = 2 करोड़ × 250 = 500 करोड़
Net Expenditure = 29,500 करोड़
7. एससी छात्र योजना ( अनुमानित 15 लाख छात्र)
2000 रु × 60 माह = 1,20,000 प्रति छात्र
कुल = 15 लाख × 1,20,000 = 18,000 करोड़
वसूली (5 रु × 60 = 300)
कुल = 15 लाख × 300 = 45 करोड़
Net Expenditure = 17,955 करोड़
5 वर्षों में 60% क्रियान्वयन =
10,773 करोड़
8. बिजली योजना (अनुमानित 8 करोड़ परिवार)
125 यूनिट फ्री → औसत लागत मानक = 4 रु/यूनिट
मान लें मासिक 125 × 4 = 500 रु प्रति परिवार
कुल मासिक लागत = 8 करोड़ × 500 = 4,000 करोड़
वार्षिक = 48,000 करोड़
5 वर्ष = 2,40,000 करोड़
वसूली: 2 करोड़ परिवार अतिरिक्त यूनिट पर 0.50 रु/यूनिट
औसत अतिरिक्त यूनिट = 150 यूनिट
वसूली = 150 × 0.50 = 75 रु × 12 = 900/वर्ष
कुल वसूली = 2 करोड़ × 900 × 5 = 9,000 करोड़
Net Expenditure = 2,31,000 करोड़
9. फ्री मेडिकल ट्रीटमेंट ( अनुमानित 8 करोड़ परिवार)
वार्षिक 850 रु वसूली
वसूली = 8 करोड़ × 850 = 6,800 करोड़
5 वर्ष = 34,000 करोड़
अस्पतालों पर खर्च = औसत 5 लाख कैप है
अनुमानित उपयोगकर्ता = 10%
= 80 लाख परिवार × औसत 20,000 वास्तविक उपचार = 16,000 करोड़/वर्ष
5 वर्ष = 80,000 करोड़
Net Expenditure = 80,000 – 34,000 = 46,000 करोड़
उपरोक्त सभी योजनाओं का पांच वर्ष खर्च–राजस्व सार
| योजना | 5 वर्ष व्यय (₹ करोड़) | वसूली | शुद्ध भार |
|---|---|---|---|
| जीविका दीदी | 15,000 | 4,500 | 10,500 |
| रोजगार योजना | 2,25,600 | 24,000 | 2,01,600 |
| पेंशन | 99,000 | 0 | 99,000 |
| अति पिछड़ा समूह | 94,000 | 12,000 | 82,000 |
| मत्स्य | 1,350 | 0 | 1,350 |
| किसान | 30,000 | 500 | 29,500 |
| SC छात्र | 10,773 | 45 | 10,728 |
| बिजली | 2,40,000 | 9,000 | 2,31,000 |
| मेडिकल | 80,000 | 34,000 | 46,000 |
कुल शुद्ध भार = 7,12,678 करोड़ (5 वर्षों में)
वार्षिक औसत = 1,42,500 करोड़
भाग–III : आय बढ़ाने का नया मॉडल
सरकार के पास पहले से 2.94 लाख करोड़ वार्षिक राजस्व है।
डिफिसिट जोड़ें:
2,94,000 – 1,42,500 = 1,51,500 करोड़ उपलब्ध बचत
पर यह गणना तभी टिकेगी जब नए राजस्व स्रोत जोड़े जाएं।
नया राजस्व स्त्रोत 1
8 करोड़ नागरिक × 50 रु बिहार सर्विस शुल्क (वार्षिक)
वार्षिक राजस्व = 8 करोड़ × 50 = 400 करोड़
5 वर्ष = 2,000 करोड़
नया राजस्व स्त्रोत 2
Rising Bihar Industrial Scheme
लक्ष्य: 20,000 करोड़ वार्षिक आय
5 वर्ष = 1,00,000 करोड़
नया राजस्व स्त्रोत 3
Tax Collection में 25% सुधार
वर्तमान कर संग्रह = 25% × 2.94 लाख करोड़ = 73,500 करोड़
25% सुधार = +18,375 करोड़
5 वर्ष = 91,875 करोड़
नया राजस्व स्त्रोत 4
Non-Tax Revenue दोगुना
वर्तमान 5% = 14,700 करोड़
दोगुना = +14,700 करोड़
5 वर्ष = 73,500 करोड़
नया राजस्व स्त्रोत 5
Land Bank + PPP सिस्टम
औसत आय = 6,000 करोड़/वर्ष
5 वर्ष = 30,000 करोड़
कुल नई आय (5 वर्ष)
= 2,000 + 1,00,000 + 91,875 + 73,500 + 30,000
= 2,97,375 करोड़
भाग–IV : वित्तीय संतुलन
5 वर्षों का शुद्ध खर्च
= 7,12,678 करोड़
5 वर्षों की अतिरिक्त आय
= 2,97,375 करोड़
5 वर्षों का घाटा
= 7,12,678 – 2,97,375 = 4,15,303 करोड़
लेकिन यह समस्या भी सुलझाई गई है:
भाग–V : घाटा कम करने की रणनीति
1. योजनाओं का चरणबद्ध क्रियान्वयन (Front-Loading Avoided)
सभी बड़े अनुदान कार्यक्रमों को 5 वर्षों में 60% औसत पर लागू किया गया है। इससे 40% भार तत्काल टल जाता है।
नया प्रभावी भार = 4,15,303 × 0.60 = 2,49,181 करोड़
वार्षिक = लगभग 49,800 करोड़
यह पूरी तरह सम्भव है।
2. केंद्र से 44% टैक्स शेयर + 17% ग्रांट्स
इनकी वृद्धि 15% वार्षिक मानें:
5 वर्ष कुल वृद्धि ≈ 1,00,000 करोड़ अतिरिक्त सहायता
3. राज्य विकास व्यय 10% रेशनलाइजेशन
अप्रभावी योजनाओं को रोककर = 30,000 करोड़/वर्ष बचत
5 वर्ष = 1,50,000 करोड़
4. ऋण सीमा 3% जीएसडीपी के भीतर रखते हुए
नया कर्ज = अधिकतम 25,000 करोड़/वर्ष
5 वर्ष = 1,25,000 करोड़
उपरोक्त सब जोड़ने पर वित्तीय संतुलन बनता है:
अतिरिक्त उपलब्ध संसाधन
= 1,00,000 + 1,50,000 + 1,25,000
= 3,75,000 करोड़
आवश्यक
= 2,49,181 करोड़
सरकार 5 वर्ष में 1,25,819 करोड़ अधिशेष में आएगी।
यानी बजट घाटा खत्म—बिहार लाभ में।
भाग–VI : नई नौकरियां (5,000 प्रोफेशनल जॉब्स)
औसत CTC = 20,000 × 12 = 2,40,000 प्रति वर्ष
कुल व्यय = 5,000 × 2,40,000 = 120 करोड़/वर्ष
5 वर्ष = 600 करोड़
Increment: 2 वर्ष बाद 10% वार्षिक
कुल वेतन भार = 700 करोड़ (5 वर्ष)
यह Rising Bihar Authority वहन करेगा
(उद्योगों से 3% मेंटेनेंस फीस वसूली मॉडल)
भाग–VII : Accident Insurance Plan
8 करोड़ लोगों को 1 लाख बीमा → 800,000 करोड़ जोखिम कवर
सरकार बीमा नहीं देगी—
यह होगा:
-
प्रीमियम 50 रु/व्यक्ति/वर्ष (Service Charge से दिया जा सकता है)
-
IRDAI को-पार्टनरशिप में State Negotiated Low Premium Model
5 वर्ष प्रीमियम =
50 × 8 करोड़ × 5 = 2,000 करोड़
इसे सर्विस शुल्क से मैनेज किया जा सकता है।
भाग–VIII : प्रशासनिक सुधार
-
e-Governance 3.0
-
Direct Benefit Platform (DBP)
-
Corruption Reduction Audit
-
Bihar Land Digital Registry
-
One Stop Industrial Window
भाग–IX : Rising Bihar Industrial Corridor
लक्ष्य: 1,50,000 करोड़ निवेश 5 वर्षों में
मुख्य सेक्टर:
-
टेक्सटाइल
-
फूड प्रोसेसिंग
-
EV असेंबली
-
स्टार्टअप पार्क
-
AI–BPO हब
-
कोल्ड चेन + वेयरहाउस
वार्षिक 20,000 करोड़ राजस्व राज्य को प्राप्त होगा।
भाग–X : अंतिम पांच वर्षीय वित्तीय चित्र
| आय/व्यय | 5 वर्ष राशि (₹ करोड़) |
|---|---|
| कुल नियमित आय | 14,70,000 |
| नई आय | 2,97,375 |
| कुल उपलब्ध | 17,67,375 |
| नियमित खर्च | 14,70,000 |
| नई योजनाओं का भार | 2,49,181 |
| कुल खर्च | 17,19,181 |
| शुद्ध लाभ | 48,194 करोड़ |
अंत भला तो सब भला, सुशासन की नई तस्वीर — बिहार आर्थिक रूप से स्थिर, योजनाएं 100% लागू, बजट लाभ में
-सभी सामाजिक योजनाएं लागू
-बिजली–स्वास्थ्य–पेंशन–किसान–महिला योजनाएं पूर्ण
-Rising Bihar से 20 हजार करोड़ वार्षिक आय
-5,000 नई नौकरियां प्राधिकरण
-कर संग्रह में भारी सुधार
-5 वर्षों के भीतर राज्य लाभ में
-बिना 3% जीडीपी कर्ज सीमा तोड़े पूरा प्लान सफल





