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Thursday, July 9, 2026, 12:35 pm

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Lifestyle

मधुमेह यानी डायबिटीज से बचाव और जागरूकता के उपाय

लेखक : शिव सिंह
9784092381

आजकल मधुमेह की बीमारी आम बीमारी है। डायबिटीज भारत में करोडो़ं लोगों को है और करोड़ लोगों को हो जाएंगी अगर कुछ सालों में सावधानी न रखी गई तो यह बढ़ती जाएगी। हर मिनट में एक मौत हो रही है डायबिटीज से और कॉम्प्लीकेशन तो बहुत हो रहे हैं। किसी की किडनी खराब हो रही है, किसी का लिवर खराब हो रहा है। किसी को ब्रेन हेमरेज हो रहा है तो किसी को परालिसिस हो रहा है। किसी को ब्रेन ट्यूमर या किसी को कार्डियक अरेस्ट हो रहा है, किसी को हार्ट अटैक आ रहा है, कॉम्प्लीकेशन बहुत ही है।

मधुमेह या चीनी की बीमारी एक खतरनाक रोग है। रक्त ग्लूकोज स्तर बढ़ा हुआ मिलता है। इन मरीजों में रक्त कोलेस्ट्रॉल, वसा के अव्यय के बढ़ने के कारण ये रोग होते हैं। इन मरीजों में आंखों, गुर्दों, स्नायु, मस्तिष्क, हृदय के क्षतिग्रस्त होने से इनके गंभीर, जटिल, घातक रोग का खतरा बढ़ जाता है।

भोजन पेट में जाकर एक प्रकार के ईंधन में बदलता है जिसे ग्लूकोज कहते हैं। यह एक प्रकार की शर्करा होती है। ग्लूकोज रक्त धारा में मिलता है और शरीर की लाखों कोशिकाओं में पहुंचता है। अग्नाशय इन्सुलिन उत्पन्न करता है और इन्सुलिन भी रक्तधारा में मिलता है और कोशिकाओं तक जाता है।

मधुमेह बीमारी का असली कारण जब तक लोग नहीं समझेंगे आपकी मधुमेह कभी भी ठीक नहीं हो सकती है। जब आपके रक्त में वसा (कोलेस्ट्रॉल) की मात्रा बढ़ जाती है, तब रक्त में मौजूद कोलेस्ट्रॉल कोशिकाओं के चारों ओर चिपक जाता है और खून में मौजूद इन्सुलिन कोशिकाओं तक नहीं पहुंच पाता है (इन्सुलिन की मात्रा तो पर्याप्त होती है किन्तु रिसैप्टरों को खोला नहीं जा सकता है, अर्थात पूरे ग्लूकोज को ग्रहण कर सकने के लिए रिसैप्टरों की संख्या कम हो सकती है) तो इन्सुलिन शरीर के किसी भी काम में नहीं आता है जिस कारण से शरीर में हमेशा मधुमेह का स्तर हमेशा ही बढ़ा हुआ होता है और जबकि जब हम बाहर से इन्सुलिन लेते हैं तब वो इन्सुलिन नया-नया होता है तो वह कोशिकाओं के अन्दर पहुंच जाता है।

अब आप समझ गए होंगे कि मधुमेह का रिश्ता कोलेस्ट्रॉल से है न कि मधुमेह से । जब सम्भोग के समय पति पत्नी आपस में संबंध नहीं कर पा रहे हैं या सम्भोग के समय बहुत तकलीफ होती है समझ जाइये मधुमेह हो चुका है या होने वाला है क्योंकि आदमी को मधुमेह होने वाला हो उसे सम्भोग के समय बहुत तकलीफ होती है क्योंकि मधुमेह से पहले जो बीमारी आती है वो सेक्स में प्रॉब्लम होना, मधुमेह रोग में शुरू में तो खूब भूख लगती है लेकिन धीरे-धीरे भूख कम हो जाती है। शरीर सूखने लगता है, कब्ज की शिकायत रहने लगती है। अधिक पेशाब आना और पेशाब में चीनी आना शुरू हो जाती है और रोगी का वजन कम होता जाता है। शरीर में कहीं भी जख्म/घाव होने पर वह जल्दी नहीं भरता।

तो ऐसी स्थिति में हम क्या करें? राजीव भाई की एक छोटी सी सलाह है न कि इन्सुलिन पर ज्यादा निर्भर ना करें क्योंकि यह इन्सुलिन डायबिटीज से भी ज़्यादा खतरनाक है, साइड इफेक्ट्स बहुत हैं इसके।

इस बीमारी के घरेलू उपचार निम्नलिखित है:

आयुर्वेद की एक दवा है जो आप घर में भी बना सकते हैं –
* 100 ग्राम मेथी का दाना
* 100 ग्राम करेले के बीज
* 100 ग्राम जामुन के बीज
* 100 ग्राम बेल के पत्ते (जो शिव जी को चढ़ाते हैं)
इन सबको धूप में सुखाकर पत्थर में पिसकर पाउडर बना कर आपस में मिला लें यही औषधि है।

औषधि लेने की पद्धतिः

सुबह नाश्ता करने से एक घंटे पहले एक चम्मच गरम पानी के साथ लें, फिर शाम को खाना खाने से एक घंटे पहले लें तो सुबह शाम एक चम्मच पाउडर खाना खाने से पहले गरम पानी के साथ आपको लेना है। डेढ़ दो महीने अगर आप ये दवा ले लिया। ये औषधि बनाने में 20 से 25 रुपया ज़्यादा आता है और ये औषधि तीन महीने तक चलेगी और उतने दिनों में आदमी ठीक ठाक हो जाएगा।

सावधानी :

सुबह रोगी खाली पेट खाएं। ज़्यादा जिससे फ़ाइबर हो, रेशे ज़्यादा हों, भूसी shredded न्यू ढंग चम्मच भी तेज वाली चपाटी कम हो और फ़ाइबर वाली ज़्यादा हो रेशेदार चीज़े ज़्यादा खाएं। सब्ज़ियों में बहुत रेशे हैं तो खाएं, दाल जो छिलके वाली हो खाएं, मोटा अनाज ज़्यादा खाएं, फल ऐसी चीज़ें जिनमें रेशे बहुत हैं।

* चीनी कभी ना खाएं, डायबिटीज की बीमारी को ठीक होने में चीनी सबसे बड़ी रुकावट है। लेकिन आप गुड खा सकते हैं।
* दूध और दही से बनी कोई भी चीज़ नहीं खाएं।
* प्रेशर कुकर और अल्यूमिनियम के बर्तन में खाना ना बनाएं।
* रात का खाना सूर्यास्त के पूर्व खाना होगा।

पथ्य : 

सब्जी, फल, जौ, चावल, पत्तागोभी, सेम, शलजम, सोयाबीन, मूली, ककड़ी, गाजर, लहसुन, लौकी, पालक, अमरूद, पपीता, संतरा, अंगूर, सेब, तरबूज, अनानास आदि।​

अपथ्य:

मैदा, ब्रेड से बने खाद्य पदार्थ, चावल, आलू, सभी प्रकार की मीठी चीजें, वनस्पति, अत्यधिक मोटे फल, परिष्कृत डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ, धूम्रपान, मिठाई, गरिष्ठ एवं तैलीय पदार्थों का प्रयोग, गरम मसाले, चीनी, चाय, कॉफी, कोको, सभी अल्कोहलिक पदार्थ व शराब, जंक फूड, संशोधित खाद्य (processed food), कोल्ड ड्रिंक्स आदि। यह ओषधि मैने खुद काफी लोगों को बताई ओर उनको फायदा पहुंचा है।

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor