“सेवा ही धर्म, सेवा ही शक्ति” – भारत सेवा संस्थान और भारत सेवा फाउंडेशन के प्रभारी नरपत सिंह कच्छवाह का विशेष इंटरव्यू
18 साल से निशुल्क सेवा कर रहे हैं नरपत सिंह कच्छवाह, कहते हैं– “जरूरतमंद की सेवा ही ईश्वर की सेवा है। भारत सेवा संस्थान शिक्षा, चिकित्सा और सामाजिक सरोकार में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के विजन अनुरूप कर रहा सेवा कार्य
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
9783414079 diliprakhai@gmail.com
भारत सेवा संस्थान और भारत सेवा फाउंडेशन… सेवा की जीवंत मिसाल। खासकर युवा पीढ़ी के भविष्य काे संवारने की दिशा में 2006 से कार्यरत। इसकी स्थापना राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 2 अक्टूबर 2006 में की थी और प्रभारी के रूप में नरपत सिंह कच्छवाह 18 साल से निशुल्क सेवाएं दे रहे हैं। कच्छवाह ने अपने विजन से इसे निखारा। सजाया-संवारा और शिक्षा के क्षेत्र में देश का आदर्श केंद्र बना दिया। यहां पढ़े बच्चे आईएएस, आईपीएस और आरएएस, आरजेएस बने। भारत सेवा संस्थान मेडिकल और सामाजिक सरोकार के क्षेत्र में भी काम करता है। संस्थान के प्रभारी नरपत सिंह कच्छवाह से मानजी का हत्था स्थित कार्यालय में हुई बातचीत के प्रस्तुत है संपादित अंश-
राइजिंग भास्कर : आपको भारत सेवा संस्थान और भारत सेवा फाउंडेशन के साथ जुड़ने की प्रेरणा कहाँ से मिली?
नरपत सिंह कच्छवाह: मैं पहले महात्मा गांधी अस्पताल, जोधपुर में नर्सिंग अधीक्षक था। सेवा मेरा स्वभाव रहा है। सेवानिवृत्ति के बाद जब पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा स्थापित भारत सेवा संस्थान से जुड़ने का मौका मिला तो मैंने इसे जीवन का सौभाग्य माना। हमारे गुरु डॉ. ओमदत्त जी की शिक्षा है—सेवा मन लगाकर करो, पैसों के पीछे मत भागो। उसी शिक्षा को जीवन मंत्र बनाकर आज 18 साल से निशुल्क सेवा कर रहा हूँ। जो आत्मसंतोष सेवा से मिलता है, वही मेरी असली पूंजी है।
“भारत सेवा संस्थान और भारत सेवा फाउंडेशन —देश का मॉडल शिक्षा केंद्र”
राइजिंग भास्कर : शिक्षा के क्षेत्र में भारत सेवा संस्थान किस प्रकार कार्य कर रहा है?
नरपत सिंह कच्छवाह: मानजी का हत्था परिसर में हमारा संस्थान विद्यार्थियों के लिए पूरी तरह निशुल्क, तनावमुक्त और अनुशासित वातावरण उपलब्ध कराता है।
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पूरी तरह एयर कंडिशनर सेल्फ स्टडी हॉल
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सभी जाति-वर्ग के बच्चों के लिए समान सुविधा
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निशुल्क बुक बैंक
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चाय–कॉफी और शीतल जल की सुविधा
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मुफ्त वाई-फाई
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सीसीटीवी से पूर्ण सुरक्षा
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रजिस्ट्रेशन और बुक-एंट्री का सुव्यवस्थित सिस्टम
2010 से 2025 के बीच 309 बच्चे सरकारी सेवाओं में चयनित हुए हैं। इनमें—
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IAS/IPS/IRS – 9 छात्र
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RAS, RJS, CA आदि – 90 छात्र
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न्यायिक सेवा – 10 छात्र
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इसके अलावा—लेक्चरर, टीचर्स, पटवारी, ग्रामसेवक, RI, जूनियर अकाउंटेंट, AAO, बैंकिंग, रेलवे, आर्मी और अन्य विभागों में सैकड़ों चयन हुए हैं।
देश में शिक्षा के मॉडल केंद्र के रूप में भारत सेवा संस्थान की पहचान बनी है। हर वर्ष हम चयनित बच्चों का सम्मान भी करते हैं।
“चिकित्सा के क्षेत्र में भी सेवा ही लक्ष्य”
राइजिंग भास्कर : चिकित्सा क्षेत्र में भारत सेवा संस्थान व फाउंडेशन कैसी भूमिका निभा रहा है?
नरपत सिंह कच्छवाह: हम नियमित रूप से मल्टी-फैसिलिटीज मेडिकल कैंप लगाते हैं। पिछले दिनो गंगापुर सिटी में दिव्यांगों के लिए कैंप लगाया था, जिसमें 2000 से अधिक लोगों ने लाभ लिया।
हमारी ICU एंबुलेंस पूरी तरह निशुल्क है।
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100 किलोमीटर तक मरीज को छोड़ने की सुविधा
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मृत्यु के बाद शव को घर तक पहुंचाने की मुफ्त सेवा
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मोक्ष वाहन और डीप फ्रीज सुविधा
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24 घंटे ड्राइवर और स्टाफ उपलब्ध
हर पुलिस स्टेशन में भारत सेवा संस्थान के नंबर दिए हुए हैं ताकि जरूरतमंद तुरंत हमसे संपर्क कर सकें।
“दिव्यांग सेवा ही संस्थान की पहचान” – आगामी बड़ा आयोजन
राइजिंग भास्कर : दिव्यांगजनों के लिए होने वाले जनवरी 2026 के बड़े शिविर के बारे में बताइए।
नरपत सिंह कच्छवाह: भारत सेवा संस्थान, भारत सेवा फाउंडेशन और भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति जयपुर के सहयोग से 9, 10 और 11 जनवरी 2026 को रामबाग परिसर, महामंदिर रेलवे स्टेशन के सामने, तीन दिवसीय विशाल शिविर लगेगा।
कवरेज क्षेत्र:
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9 जनवरी: जोधपुर शहर, लूणी, बिलाड़ा, पीपाड़
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10 जनवरी: भोपालगढ़, बावड़ी, ओसियां, तिंवरी, मथानिया, जोधपुर
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11 जनवरी: बालेसर, चामू, फलोदी, बाप, लोहावट, देचू
सेवाएं:
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ट्राइसाइकिल
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व्हील चेयर
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कैलिपर्स
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बैसाखी
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वॉकर
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कृत्रिम हाथ–पांव (जयपुर फुट टीम द्वारा)
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कंप्यूटरीकृत नेत्र जांच व निशुल्क चश्मे
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ऑडियोमेट्री और मुफ्त कान की मशीन
रजिस्ट्रेशन 31 दिसंबर 2025 तक सुबह 10 से 2 बजे तक मानजी का हत्था परिसर में।
संस्थान के अध्यक्ष राजीव अरोड़ा और प्रबंध न्यास किशोर सिंह गहलोत ने दिव्यांगजनों से अधिक से अधिक संख्या में लाभ लेने की अपील की है।
“कोरोनाकाल में हमारे कार्यकर्ताओं ने जान जोखिम में डालकर सेवा की”
राइजिंग भास्कर : कोरोना महामारी के समय भारत सेवा संस्थान की भूमिका क्या रही?
नरपत सिंह कच्छवाह: कोरोना काल हमारे लिए सेवा का अग्निपरीक्षा जैसा समय था।
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1 लाख से अधिक भोजन पैकेट घर-घर पहुंचाए
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एंबुलेंस और शव-वाहन सेवा निशुल्क उपलब्ध करवाई
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क्वारंटीन इलाकों में भोजन व सहायता
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कार्यकर्ताओं ने जान जोखिम में डालकर लोगों तक मदद पहुँचाई
हमने गुणवत्तापूर्ण भोजन बनाया और सुबह-शाम मोहल्लों में वितरण किया।
इसके साथ ही समय-समय पर हम आधार कार्ड, पैन कार्ड, सरकारी योजनाओं के फॉर्म भरवाने और जनकल्याण योजना की जानकारी देने के कैंप भी लगातार लगाते हैं।
“सेवा ही जीवन का मार्ग है” – नरपत सिंह कच्छवाह
राइजिंग भास्कर : इतने वर्षों से लगातार सेवा करने की प्रेरणा कहां से मिलती है?
नरपत सिंह कच्छवाह: मेरे गुरु डॉ. ओमदत्त जी कहते थे—जरूरतमंद की सेवा ही ईश्वर की सेवा है। मैंने इसे ही जीवन का धर्म बना लिया। मैं 18 साल से निशुल्क सेवा कर रहा हूँ। जब सुबह एक जरूरतमंद को राहत मिलती है, तो वही चेहरे पर जो सुकून आता है, वही मेरी कमाई है, वही मेरी दौलत है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का विजन स्पष्ट है—सेवा, समानता और संवेदना। भारत सेवा संस्थान आज उसी विजन का जीवंत उदाहरण है। “भारत सेवा संस्थान सिर्फ एक संस्था नहीं, यह सेवा और मानवीय संवेदना का विद्यालय है। जो भी यहां आता है, वह सेवा का संस्कार लेकर जाता है। हमारा प्रयास हमेशा यही रहेगा कि बिना भेदभाव, बिना शुल्क—हम समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुँचा सकें।”














