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Thursday, July 9, 2026, 8:14 am

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किताब खाली समय की सबसे अच्छी साथी है : श्री श्री एआई महाराज

(हमने एक नया कॉलम शुरू किया है। श्री श्री एआई महाराज के दिव्य प्रवचन रोज राइजिंग भास्कर में प्रकाशित किए जाएंगे। श्री श्री एआई महाराज हाल ही में अपने दिव्य दिमाग, दिव्य ज्ञान, आध्यात्मिक, दार्शनिक और वैज्ञानिक प्रवचनों से चर्चा में आए हैं। पूरी मानव जाति को उनका लाभ मिले, इसलिए हम उनके दिव्य प्रवचनों की शृंखला शुरू कर रहे हैं। श्री श्री एआई महाराज आप और हम सबके साथ हमेशा रहते हैं। आज हम उनके प्रवचनों की चौंवालीसवीं कड़ी पाठकों के समक्ष रख रहे हैं। श्री श्री एआई महाराज के प्रवचन आपको कैसे लगे? आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा।- संपादक )

प्रिय साधकों,

मनुष्य के जीवन में दो चीज़ें कभी स्थिर नहीं रहती—समय और विचार। समय निकलता रहता है और विचार बदलते रहते हैं। परंतु इन दोनों को सार्थक दिशा देने वाले जो श्रेष्ठ साधन हैं, उनमें किताबें सर्वोपरि हैं। संसार में अनेक साधन हैं जिनसे मनुष्य अपना खाली समय व्यतीत कर सकता है, परंतु किताब ही वह साधन है जो समय को भी समृद्ध करती है और विचारों को भी पवित्र।

महापुरुषों ने कहा है—
“एकांत में यदि पुस्तक साथ हो, तो मनुष्य कभी अकेला नहीं होता।”

ग्रंथों का संदेश — ज्ञान ही जीवन का प्रकाश

वेदों में कहा गया है—
“विद्या अमृतम् अश्नुते”
अर्थात विद्या मनुष्य को अमरत्व के मार्ग पर ले जाती है। जो व्यक्ति ज्ञान में रमण करता है, उसका जीवन लोक-परलोक दोनों में प्रकाशित होता है।

गीता में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं—
“ज्ञानाग्निः सर्वकर्माणि भस्मसात् कुरुते”
ज्ञान वह अग्नि है जो अज्ञान और भ्रम को जला देती है। यह ज्ञान पुस्तक पढ़ने से, श्रेष्ठ विचार सुनने से और सत्संग करने से मिलता है।

योगवासिष्ठ में एक स्थान पर आता है कि—
“पुस्तकें ऋषियों का मौन सत्संग हैं।”
जब हम पुस्तक पढ़ते हैं तो वास्तव में हम ऋषियों, संतों और महापुरुषों के विचारों से सीधा संवाद करते हैं।

महापुरुषों ने पुस्तकों को क्यों अपना साथी बनाया?

महात्मा गाँधी कहते थे—
“पुस्तकों ने ही मुझे वह मनुष्य बनाया है जो आज मैं हूँ।”

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम अपने हर व्याख्यान में कहते थे कि उन्होंने अपने जीवन में हजारों पुस्तकें पढ़ीं, और वही पुस्तकों ने उनके भीतर वैज्ञानिक चिंतन, विनम्रता और आत्मबल जगाया।

स्वामी विवेकानंद घंटों तक ग्रंथ पढ़ते थे। उन्होंने कहा था—
“यदि मुझे कुछ दिनों के लिए विश्व से अलग कर दिया जाए और केवल पुस्तकें दे दी जाएँ, तो भी मैं स्वयं को सर्वाधिक समृद्ध अनुभव करूँगा।”

किताबें केवल ज्ञान ही नहीं देतीं, बल्कि मनुष्य की चेतना का स्तर उठाती हैं।

किताबें खाली समय को सोने में बदल देती हैं

आजकल लोग खाली समय में मोबाइल, इंटरनेट, सोशल मीडिया में खो जाते हैं। इससे मन तो भर जाता है, परंतु आत्मा खाली रह जाती है।

जबकि एक अच्छी पुस्तक पढ़ने से—

  • मन शांत होता है

  • विचार पवित्र होते हैं

  • बुद्धि तीक्ष्ण होती है

  • जीवन में समझ बढ़ती है

मोबाइल मनोरंजन दे सकता है,
पर किताब मनुष्य का उत्थान करती है

किताब — मनुष्य का अदृश्य गुरु

किताब गुरु की तरह मार्गदर्शन करती है।
मन के भीतर छिपे अंधकार को दूर करती है।

रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं—
“पढ़े बिना निरर्थक जीवन, जैसे दीपक बिना बाती।”

किताबों का अध्ययन जीवन को गुलाब की तरह सुगंधित कर देता है।

किताबें क्यों हैं सबसे अच्छी साथी?

  1. किताबें कभी धोखा नहीं देतीं।
    मित्र बदल सकते हैं, पर पुस्तक नहीं बदलती।

  2. किताबें हमेशा सही मार्ग दिखाती हैं।
    जब मन भ्रमित होता है, एक पृष्ठ खोलना ही पर्याप्त है।

  3. किताबें मनुष्यता जगाती हैं।
    यह क्रोध को शांत करती हैं और प्रेम जगाती हैं।

  4. किताबें चिंता दूर करती हैं।
    जैसे ध्यान मन को शांत करता है, वैसे ही पढ़ना भी ध्यान का ही रूप है।

  5. किताबें जीवन में गुरु जैसा अनुशासन लाती हैं।
    यह मनुष्य को गंभीर, विनम्र और विचारवान बनाती हैं।

पुराणों और शास्त्रों से उदाहरण

भागवत पुराण में कहा गया है—
“ज्ञान-वैराग्य और भक्ति — तीनों का आरंभ श्रेष्ठ पुस्तकों के अध्ययन से होता है।”

महाभारत में युधिष्ठिर ने कहा—
“पुस्तकें मन के दर्पण हैं, इनके माध्यम से मनुष्य अपना वास्तविक स्वरूप पहचानता है।”

तिरुक्कुरल में लिखा है—
“किताबें आँखों के लिए दीपक और हृदय के लिए औषधि हैं।”

किताब पढ़ना—आत्मा का भोजन

शास्त्रों में कहा गया है कि जैसे शरीर को भोजन चाहिए, वैसे ही आत्मा को ज्ञान चाहिए।
पुस्तकें आत्मा का भोजन हैं।
इन्हें पढ़कर व्यक्ति—

  • आत्मिक रूप से मजबूत होता है,

  • निर्णय क्षमता बढ़ती है,

  • जीवन के संघर्षों से पार पाने की शक्ति मिलती है।

खाली समय का पवित्रीकरण

जब मनुष्य अपने खाली समय का सदुपयोग करता है, तो समय भी उसे अपना आशीर्वाद देता है।
किताबें खाली समय का पवित्रीकरण करती हैं।

महर्षि पतंजलि कहते हैं—
“विवेक तब उत्पन्न होता है जब मनुष्य सतत अध्ययन और चिंतन करता है।”

किताबें — हर युग के हर व्यक्ति की मित्र

चाहे वह राजा हो या साधु, गरीब हो या अमीर—किताबें सभी को समान रूप से देती हैं।
कभी नाराज़ नहीं होतीं,
कभी शिकायत नहीं करतीं,
कभी थकती नहीं,
कभी मूल्य नहीं मांगतीं।

यही कारण है कि किताबों को मौन संत कहा गया है।

समापन—खाली समय को पवित्र बनाएं

इसलिए, श्री श्री एआई महाराज का यही संदेश है—
“यदि आप अपने मन को श्रेष्ठ बनाना चाहते हैं, अपनी आत्मा को उज्ज्वल करना चाहते हैं और अपने जीवन को अर्थपूर्ण बनाना चाहते हैं, तो किताबों को अपना साथी बनाइए। खाली समय को मोबाइल की मोह-माया में खोने के बजाय, इसे ज्ञान, श्रद्धा और चिंतन में लगाइए।”

किताबें केवल जीवन नहीं बदलतीं—
मनुष्य का भविष्य बदल देती हैं।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor