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Sunday, August 23, 2026, 7:48 am

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डॉ. टैस्सीटोरी को सच्ची श्रृद्धांजलि राजस्थानी मान्यता मिलने पर होगी : कमल रंगा

डॉ. टैस्सीटोरी की स्मृति में दो दिवसीय ‘सिरजण उछब’ का पहला दिन राजस्थानी मान्यता पर केन्द्रित रहा।
राखी पुरोहित. बीकानेर 
करोड़ों लोगों की अस्मिता एवं जन-भावना के साथ सांस्कृतिक पहचान हमारी मातृभाषा राजस्थानी को संवैधानिक मान्यता एवं दूसरी राजभाषा का वाजब हक शीघ्र मिले। इसी केन्द्रीय भाव के साथ प्रज्ञालय संस्थान एवं राजस्थानी युवा लेखक संघ द्वारा गत साढ़े चार दशकों से चली आ रही परंपरा के चलते महान् इटालियन विद्वान राजस्थानी पुरोधा डॉ. लुईजि पिओ टैस्सीटोरी की 138वीं जयंती के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय ‘सिरजण उछब’ के प्रथम दिन आज प्रातः टैस्सीटोरी समाधि स्थल पुष्पांजलि-शब्दालि से प्रारभ हुआ।
अपनी शब्दांजलि देते हुए कार्यक्रम के अध्यक्ष राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने कहा कि हमें हमारी मां, मातृभूमि एवं मातृभाषा के मान-सम्मान के प्रति सदैव सजग रहना चाहिए। हमारी मातृभाषा जिसका हजारोंं वर्षोंं पुराना साहित्यिक-सांस्कृतिक वैभवपूर्ण इतिहास है। साथ ही हमारी मातृभाषा राजस्थानी भाषा वैज्ञानिक दृष्टि से सभी मानदण्डों पर खरी उतरती है, ऐसे में हमारी मातृभाषा को शीघ्र मान्यता केन्द्र व राज्य सरकार को देनी चाहिए। रंगा ने कहा कि राजस्थानी को मान्यता मिलना ही डॉ टैस्सीटोरी को सच्ची श्रृद्धांजलि होगी।
डॉ. फारूख चौहान ने कहा कि राजस्थानी भाषा भारतीय भाषाओं में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखती है। ऐसी भाषा की अनदेखी करना दुःखद पहलू है। जाकिर अदीब ने कहा कि अब सरकारों को भाषा के प्रति अपना संवेदनशील एवं सकारात्मक व्यवहार रखते हुए भाषा की मान्यता पर शीघ्र निर्णय लेना चाहिए।
अपने विचार व्यक्त करते हुए मधुरिमा सिंह ने कहा कि टैस्सीटोरी के महत्वूपर्ण कार्यो को जन-जन तक ले जाने का कार्य कमल रंगा ने किया है वह महत्वपूर्ण है। इसी क्रम मे गोपाल कुमार कुंठित ने कहा कि हमें राजस्थानी मातृभाषा को अधिक से अधिक जीवन व्यवहार में प्रयोग लेनी चाहिए। महेन्द्र जोशी ने कहा कि राजस्थानी भाषा के प्रति हमे आत्मिक एवं भावनात्मक भाव के साथ मान्यता आंदोलन का समर्थन करना चाहिए।
बुलाकी देवड़ा ने कहा कि टैस्सीटोरी राजस्थानी के ऐसे सेवक थे जिन्होने राजस्थानी के लिए अपना संपूर्ण जीवन भोम  दिया। सौरभ कश्यप ने कहा कि इस महान् आत्मा को स्मरण करते हुए उनके कार्यो के प्रति श्रृद्धा भाव अर्पित करते हैं। पुष्पांजलि और शब्दांजलि का क्रम लगातार चलता रहा जिसमें राजस्थानी हेताळुओं गंगाबिशन बिश्नोई, गिरिराज पारीक, भवानी सिंह, हरिनारायण आचार्य, अशोक शर्मा, कार्तिक मोदी, तोलाराम सारण, घनश्याम ओझा, अख्तर अली, कन्हैयालाल, विष्णु देवड़ा, डॉ. नमामी शंकर आचार्य, ओम प्रजापत, राहुल दाधीच, मानवेन्द्र सिंह, रजत राणा, प्रेमराज, चेतन कुमार, भैरूरतन, चेतन छाबड़ा सहित जिसमें राजस्थानी हेताळूओं ने अपनी श्रृद्धा सुमन अर्पित करते हुए टैस्सीटोरी को राजस्थानी भाषा साहित्य संस्कृति शोध एवं पुरातत्वविद् के रूप में स्मरण कर उनकी इन क्षेत्र में दी गई सेवाओं को नमन किया। कार्यक्रम का सफल संचालन गिरिराज पारीक ने किया ।
Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor