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Thursday, July 9, 2026, 9:42 am

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लेखक क्या लिख रहा है, यह जानने से जरूरी है वह क्यों लिख रहा है: संवितेन्द्र

राखी पुरोहित. जोधपुर 
कोई लेखक क्या लिख रहा है, यह जानने से ज्यादा जरूरी है कि वह क्यों लिख रहा है। रचनाकार के सृजन का उद्देश्य ही अहम होता है, जिसमें लेखन के कालजयी होने के सारे सूत्र समाहित होते हैं। वरिष्ठ साहित्यकार सत्यदेव संवितेन्द्र ने डॉ. सावित्री मदन डागा सभागार में भारतीय साहित्य विकास न्यास द्वारा आयोजित कवयित्री दीपा चौहान ‘दीपगीत’ के पुस्तकों के लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता करते हुए कहा कि साहित्य का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं हो सकता। इसलिए किसी भी रचनाकार के सृजन पर लोक की सजग दृष्टि बनी रहती है।
मुख्य अतिथि जाने माने कथाकार डॉ. ओमप्रकाश भाटिया ने कहा कि अपनी रचनाओं में दीपा चौहान थार मरूस्थल के बिम्बों को उकेरते हुए अपनी जड़ों से जुड़ाव की ओर इशारा करती है। विशिष्ट अतिथि कवि दशरथ सोलंकी ने प्रकृति और जीवन के संदर्भ जोड़ते हुए कहा कि कवयित्री दीपा अपने सारे रिश्तों का निर्वहन करते हुए सृजन के दायित्व निभा रही है। प्रारंभ में संस्था की ओर से दीपा चौहान की दोनों पुस्तकों के लोकार्पण अवसर एवं चुनिंदा कविताओं के पाठ के साथ उनका अभिनंदन किया गया। अंत में नखताराम इणखिया ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का सरस संचालन कवि मनशाह नायक ने किया।
इस मौके पर शहर के प्रमुख साहित्यकार हबीब कैफी, डॉ. पद्मजा शर्मा, डॉ. आईदान सिंह भाटी, हरि प्रकाश राठी, हंसराज बारासा, वर्षा जोशी, सुनीता शेखावत, कल्याण के बिश्नोई, सूर्य प्रकाश वर्मा, मोनिका नामदेव मोहन सिंह रत्नू सहित कमल सिंह तंवर, सिद्धार्थ सिंह भाटी, निर्मला राठौड़ आदि ने अपनी सहभागिता निभाई।
Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor