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Thursday, July 9, 2026, 9:39 am

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निशुल्क फिजियो सेंटर बना सहारा — दर्द से मुक्ति की उम्मीद यहां सच होती है, निराश होकर आते हैं और मुस्कान के साथ लौटते हैं मरीज

श्री भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति के तत्वावधान में संचालित फिजियोथैरेपी सेंटर में रोजाना 80-100 मरीजों को मिलता है जीवन में फिर से खड़े होने का हौसला, लाखों की आधुनिक मशीनें और डॉक्टर्स की समर्पित टीम दे रही नई शुरुआत। श्री भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति के संयुक्त सचिव महेंद्र ढड्‌ढ़ा बताते हैं कि सेंटर अब तक हजारों मरीजों के जीवन में उमंग भर चुका है।

दिलीप कुमार पुरोहित. पंकज जांगिड़. जोधपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

मथुरादास माथुर अस्पताल परिसर में स्थित श्री भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति का फिजियोथैरेपी सेंटर आज उन मरीजों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं, जो दर्द, कमजोरी, लकवे, ऑर्थोपेडिक बीमारियों और सर्जरी के बाद की परेशानी के साथ जीने को मजबूर थे। किसी के लिए तिल-भर चलना मुश्किल था, किसी के लिए हाथ उठाना भी दर्दनाक। कई ऐसे चेहरे रोज यहाँ दिखाई देते हैं, जिनकी आँखों में उम्मीद कम और पीड़ा अधिक होती है। लेकिन समय के साथ वही चेहरों पर मुस्कान लौटती है, जब वे बिना सहारे कदम बढ़ाते हैं, हाथ खोलते हैं, गर्दन बिना दर्द घुमाते हैं। एक-एक कदम की यह वापसी सिर्फ इलाज नहीं, ज़िंदगी की पुनः प्राप्ति है।

सेंटर के संयुक्त सचिव महेंद्र ढड्ढा बताते हैं — “हमारी सोच यही रही कि कोई भी व्यक्ति आर्थिक तंगी के कारण इलाज से वंचित न रहे। इसलिए यह पूरा सेंटर निशुल्क है। यहाँ डॉक्टरों की टीम, उन्नत मशीनें और हमारे स्वयंसेवकों का पूरा प्रयास होता है कि मरीज अपनी पुरानी क्षमता वापस पाए।”

एक साल पहले इस सेंटर में सिर्फ 9 बेड थे और रोज 20-25 मरीज ही आते थे। परंतु बढ़ती जरूरत और लोगों के विश्वास ने व्यवस्थाओं को विस्तार दिया। आज यहाँ 25 बेड, 20 से अधिक आधुनिक मशीनें और रोजाना 80-100 मरीजों की आवाजाही है। सेंटर में कुल 35-40 लाख रुपये की मशीनें लगी हैं जिनमें से सबसे बड़ी मशीन 10 लाख रुपये की लागत से तीन महीने पूर्व स्थापित की गई है।

इस सेवा में प्रवाहित हो रही दानशीलता का भी अपना इतिहास है। यूएसए निवासी डॉ. सीके भंसाली ने 18 लाख रुपये भेंट कर नई मशीनें उपलब्ध करवाईं। महेंद्र ढड्ढा बताते हैं — “डॉक्टर साहब के सहयोग से कई मरीजों के लिए इलाज आसान हुआ। उनकी भेंट हमारे लिए सिर्फ आर्थिक मदद नहीं बल्कि मानवता की मिसाल है।”

मरीज आते हैं दर्द लेकर, लौटते हैं उम्मीद लेकर

इस सेंटर में दर्द प्रबंधन से लेकर बड़े न्यूरो केस तक इलाज मिलता है। कई बुजुर्ग जो घुटनों के दर्द में चलने की आशा छोड़ चुके थे, यहाँ महीनों की थैरेपी के बाद बिना सहारे टहलते दिख जाते हैं। स्टाफ के अनुसार एक महिला, जिनकी कमर सर्जरी के बाद झुकना मुश्किल था, कई सत्रों के बाद अब घरेलू कामकाज सहजता से कर पा रही हैं।

इसी तरह एक युवक, खेलते समय लगी गंभीर चोट के बाद पैर मोड़ नहीं पा रहा था। उसकी आँखों में टूटा सपना और भविष्य का डर साफ झलकता था। लेकिन सेंटर की स्पोर्ट्स फिजियोथैरेपी, व्यायाम थैरेपी और इलेक्ट्रोथेरेपी के सत्रों ने उसे धीरे-धीरे सामान्य चलने लायक बनाया। वह आज फिर मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है।

न्यूरो केसों में भी यहाँ उल्लेखनीय सुधार दिखे हैं। कुछ मरीज स्ट्रोक के बाद शरीर का आधा हिस्सा चलाने में असमर्थ होकर लाए गए। धीरे-धीरे नसों की थैरेपी, मोटर ट्रेनिंग, हाथ-पैर मूवमेंट एक्सरसाइज और रिहैब सेशंस के बाद उन्होंने फिर हाथ हिलाना, पकड़ बनाना और कदम बढ़ाना सीखा।

महेंद्र ढड्ढा  कहते हैं—“जब कोई मरीज पहली बार बिना सहारे चलता है या अपने हाथ उठाकर ‘धन्यवाद’ कहता है, तब लगता है हमारे प्रयास सफल हैं। यही पल हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा देते हैं।”

थैरेपी की विस्तृत सेवाएँ — सब मुफ्त में उपलब्ध

सेंटर में दर्द प्रबंधन (Pain Management), फ्रैक्चर व इंजरी रिहैबिलिटेशन, पोस्ट-सर्जरी रिहैब, न्यूरो व स्ट्रोक थैरेपी, स्पोर्ट्स फिजियो, पीठ व रीढ़ की समस्याओं का उपचार, कार्डियक व रेस्पिरेटरी फिजियो, बाल व बुजुर्गों के लिए विशेष कार्यक्रम जैसी सेवाएँ रोज प्रदान की जा रही हैं। उपचार में एक्सरसाइज थैरेपी, हीट/कोल्ड ट्रीटमेंट, अल्ट्रासाउंड, IFT, TENS, मैनुअल मसाज, ट्रैक्शन, ड्राय नीडलिंग, कपिंग जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है। महत्वपूर्ण बात यह कि इन सभी सेवाओं का कोई शुल्क नहीं लिया जाता। कोई पर्ची, कोई फीस, कोई एक्स्ट्रा खर्च नहीं। सिर्फ मानवता आधारित सेवा।

डॉक्टर्स की टीम — दो शिफ्ट में उपलब्ध

मरीजों की सुविधा को लेकर सेंटर दिन में दो शिफ्टों में चलता है।
सुबह 9 से 12 बजे तक और शाम 4 से 7 बजे तक।

सुबह की शिफ्ट में:

  • डॉ. सुरेंद्र सिंह

  • डॉ. ट्विंकल

  • डॉ. चेरिल

शाम की शिफ्ट में:

  • डॉ. कपिल अरोड़ा

  • डॉ. मूमल कल्ला

  • डॉ. छवि महेचा

सभी डॉक्टर न सिर्फ अपने पेशे से बल्कि सेवा-भाव से जुड़े हुए हैं। कई बार बुजुर्ग मरीज हाथ पकड़कर बताते हैं — “बेटा, यहाँ डॉक्टर इलाज नहीं देते… हमदर्दी देते हैं।” यह वाक्य इस सेंटर की असल पहचान है।

मानवता का केंद्र, सेवा का विस्तार

महेंद्र ढड्ढा आगे कहते हैं—“हमारी आकांक्षा सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं। हम चाहते हैं कि कोई भी दर्द से जूझता व्यक्ति निराश होकर घर न बैठे। आगे भी मशीनें बढ़ाने, सुविधाएँ विस्तारने और अधिक विशेषज्ञ जोड़ने की योजना है।” समिति की सोच स्पष्ट है — सेवा ही धर्म, उपचार ही पुण्य। यहाँ आने वाले हर व्यक्ति के लिए दरवाज़े हमेशा खुले हैं, चाहे वह आर्थिक रूप से सक्षम हो या नहीं।एक साल में यह सेंटर न जाने कितने परिवारों की मुस्कान लौटाने का कारण बना है। किसी के लिए पहला कदम खुशी बनकर आया, किसी के लिए बिना दर्द सो पाने की राहत। हर दिन 80-100 लोग यहाँ आते हैं और हर शाम कोई न कोई मरीज पहले से बेहतर हालत में घर लौटता है। ये सिर्फ आँकड़े नहीं, जीवन में लौटे विश्वास की गवाही हैं। इस तरह श्री भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति का फिजियोथैरेपी सेंटर निस्वार्थ सेवा का उदाहरण बन चुका है। शहर में ऐसे मानवीय प्रयास कम देखने को मिलते हैं, जहाँ आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ डॉक्टर और दान की भावना मिलकर एक नई सामाजिक ऊर्जा पैदा करते हैं। यह सिर्फ एक इलाज केंद्र नहीं — यह वह जगह है जहाँ दर्द खत्म नहीं तो कम जरूर होता है, जहाँ टूटे मन को सहारा मिलता है और जहाँ इंसान फिर से खुद पर भरोसा करना सीखता है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor