शिव वर्मा. जोधपुर
राजस्थान फार्मासिस्ट कर्मचारी संघ, एकीकृत शाखा जिला जोधपुर एवं फलोदी द्वारा राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी निशुल्क दवा योजना के प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण संचालन को सुनिश्चित करने हेतु जिला कलेक्टर महोदय, जोधपुर के माध्यम से मुख्यमंत्री जी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन के माध्यम से संघ ने बताया कि राज्य के विभिन्न राजकीय चिकित्सा संस्थानों में संचालित दवा वितरण केन्द्रों एवं सब-स्टोर्स में फार्मासिस्टों के स्वीकृत पदों की भारी कमी के कारण आम मरीजों को समय पर दवाइयाँ उपलब्ध कराने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इससे प्रतीक्षा समय (Waiting Time) बढ़ रहा है, टर्न अराउंड टाइम प्रभावित हो रहा है तथा रोगियों की समुचित काउंसलिंग भी नहीं हो पा रही है, जो उपचार अनुपालन (Patient Compliance) को सीधे प्रभावित करता है।
संघ ने यह भी अवगत कराया कि फार्मेसी एक्ट 1948 के प्रावधानों के अनुसार बिना फार्मासिस्ट के दवाओं का वितरण कानूनन अपराध है, इसके बावजूद कई दवा वितरण केन्द्र या तो बंद हैं अथवा बिना फार्मासिस्ट के संचालित हो रहे हैं, जिससे योजना का अपेक्षित लाभ आमजन तक पूर्ण रूप से नहीं पहुँच पा रहा है।
इस अवसर पर राजस्थान फार्मासिस्ट कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष नरेंद्र पाल सिंह ने कहा कि “निशुल्क दवा योजना आमजन के स्वास्थ्य से जुड़ी अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है। यदि दवा वितरण केन्द्रों पर पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित फार्मासिस्टों की नियुक्ति नहीं की गई, तो योजना का उद्देश्य प्रभावित होगा। फार्मासिस्ट न केवल दवा वितरण करता है, बल्कि मरीज को दवा के सही उपयोग, खुराक और सावधानियों की जानकारी देकर उपचार को सफल बनाता है।” ज्ञापन में बताया गया कि राजस्थान में स्वीकृत दवा वितरण केंद्रों एवं सबस्टोर की संख्या 8500 है लेकिन 4000 दवा वितरण केंद्र बिना फार्मासिस्ट के ही चल रहे है। राज्य सरकार द्वारा दवा वितरण केंद्र तो स्वीकृत कर रखे है, परंतु बढ़ते रोगी हर के अनुपात में फार्मासिस्ट के स्वीकृत पदों में आवश्यकतानुसार बढ़ोतरी नहीं हुए है,
अतः ज्ञापन में राज्य सरकार से आगामी बजट में फार्मासिस्ट के PHC, CHC, उपजिला चिकित्सालय , जिला अस्पतालों में कुल 10,032 पदों की मांग की है। संघ ने जिला प्रशासन से मांग की कि दवा वितरण केन्द्रों एवं सब-स्टोर्स में फार्मासिस्टों के रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए, अस्थायी रूप से बंद केन्द्रों को पुनः चालू किया जाए तथा योजना के सुचारु संचालन हेतु आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाए जाएं। जिला प्रशासन ने संघ की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया।




