पूर्व नरेश गजसिंह और महारानी हेमलता राज्ये के मुख्य संरक्षण में होगा सम्मेलन, देशभर के प्रसिद्ध 40 आईपीएससी विद्यालयों के प्राचार्य सहित 80 शिक्षाविद् होंगे शरीक
शिव वर्मा. दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
राजमाता कृष्णा कुमारी गर्ल्स’ पब्लिक स्कूल जोधपुर में तीन दिवसीय भारतीय पब्लिक स्कूल (IPSC) का 86 वां प्राचार्य सम्मेलन शनिवार 27 दिसंबर से आयोजित होगा। प्राचार्या श्रीमती नीरा सिंह ने बताया कि सम्मेलन का विषय “आरोहणम शिक्षा के माध्यम से आध्यात्मिक विकास की यात्रा” पर आधारित होगा ।
श्रीमती नीरा सिंह ने बताया कि राजमाता स्कूल द्वारा पूर्व नरेश गज सिंह व महारानी हेमलता राज्ये के मुख्य संरक्षण व सहयोग से तीन दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देश भर के लगभग 40 प्रतिष्ठित आईपीएससी विद्यालयों के प्राचार्यों सहित 80 से अधिक शिक्षाविद् भाग लेंगे। कार्यक्रम का शुभारंभ वेलकम आईटीसी होटल में कार्यकारी समिति की बैठक से होगा । उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि पूर्व उपाध्यक्ष योजना आयोग मोटेक सिंह अहलूवालिया होंगे
श्रीमती नीरा सिंह ने बताया कि अध्यक्षता पूर्व नरेश गज सिंह करेंगे । विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. अमृता दास, डॉ. रंजन बनर्जी, एजुकेशन वर्ल्ड के श्री भाविन शाह, तथा राजमाता स्कूल के बोर्ड सदस्य मेजर जनरल के वी एस लालोत्रा और श्रीमती लता वैदयनाथन उपस्थित होंगे। सम्मेलन में आई पी एस सी ट्रस्ट से प्रमोद शर्मा, बी.आर. दुबे, कैप्टन (आईएन) विनय कुमार वर्मा (सेवानिवृत), श्रीमती ज्योत्सना बरार, सुश्री सुनीति शर्मा, जोगिंदर सिंह मान, डॉ. सुमेर सिंह और कमांडर वी. के. बंगा (सेवानिवृत्त) भी भाग लेंगे।
प्राचार्या ने बताया कि इंडियन पब्लिक स्कूल्स कॉन्फ्रेंस (IPSC) के अध्यक्ष अनिल शर्मा तथा सचिव आर. सी. जोशी के मार्गदर्शन में आयोजित इस उच्चस्तरीय सम्मेलन में देशभर के आई पी एस सी सदस्य विद्यालयों के प्राचार्य एवं प्रतिनिधि अपनी सहभागिता दर्ज करायेंगे ।
देश के अनेक विद्यालयों के प्राचार्य होंगे शरीक
प्राचार्या ने बताया कि आर्मी पब्लिक स्कूल, दगशाई (हिमाचल प्रदेश),भारतीय विदया भवन वी. एम. पब्लिक स्कूल, वडोदरा (गुजरात),बिरला बालिका विदयापीठ, पिलानी (राजस्थान),बिरला पब्लिक स्कूल (विदया निकेतन), पिलानी (राजस्थान),बिरला विदया मंदिर, नैनीताल (उत्तराखंड),बी. के. बिरला सेंटर फॉर एजुकेशन, पुणे (महाराष्ट्र),डेली कॉलेज, इंदौर (मध्य प्रदेश),डोनियो पोलो विदया भवन, ईटानगर (अरुणाचल प्रदेश),जेनेसिस ग्लोबल स्कूल, नोएडा (उत्तर प्रदेश),एल. के. सिंघानिया एजुकेशन सेंटर, गोटन (राजस्थान),महारानी गायत्री देवी गर्ल्स’ स्कूल, जयपुर (राजस्थान),मेयो कॉलेज, अजमेर (राजस्थान),माइल्स ब्रॉन्सन रेसिडेंशियल स्कूल, गुवाहाटी (असम),मॉडर्न स्कूल, बाराखंभा रोड (नई दिल्ली),पाइनग्रोव स्कूल, धरमपुर (हिमाचल प्रदेश),राजकुमार कॉलेज, रायपुर (छत्तीसगढ़), राजमाता कृष्ण कुमारी गर्ल्स’ पब्लिक स्कूल, जोधपुर (राजस्थान),राष्ट्रीय भारतीय मिलिट्री कॉलेज, देहरादून (उत्तराखंड),सेलाक्वि इंटरनेशनल स्कूल, देहरादून (उत्तराखंड),सिंधिया कन्या विदयालय, ग्वालियर (मध्य प्रदेश),श्री दशमेश अकादमी, आनंदपुर साहिब (पंजाब),ताशी नमग्याल अकादमी, गंगटोक (सिक्किम),द दून स्कूल, देहरादून (उत्तराखंड),
द हैदराबाद पब्लिक स्कूल, बेगमपेट, हैदराबाद (तेलंगाना)द लॉरेंस स्कूल, लवडेल, ऊटी, नीलगिरि (तमिलनाडु),द लॉरेंस स्कूल, सनावर, सोलन (हिमाचल प्रदेश),द मान स्कूल, दिल्ली, द पेस्टल वीड स्कूल, देहरादून (उत्तराखंड),द पंजाब पब्लिक स्कूल, नाभा (पंजाब), द राजकुमार कॉलेज, राजकोट (गुजरात),द सागर स्कूल, तिजारा (राजस्थान),द संस्कार वैली स्कूल, भोपाल (मध्य प्रदेश),द सिंधिया स्कूल, ग्वालियर फोर्ट (मध्य प्रदेश),वल्लभ आश्रम एमजीएम अमीन एवं वी. एन. सवानी स्कूल, पारडी (गुजरात),वेल्हम बॉयज़’ स्कूल, देहरादून (उत्तराखंड),वेल्हम गर्ल्स’ स्कूल, देहरादून (उत्तराखंड),यादवेंद्र पब्लिक स्कूल, मोहाली (पंजाब),
यादवेंद्र पब्लिक स्कूल, पटियाला (पंजाब) अपनी भागीदारी निभाएंगे । राजमाता विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती नीरा सिंह ने बताया कि “आरोहणम्” केवल थीम नहीं, बल्कि शिक्षकों की सामूहिक चेतना, मूल्यों और उद्देश्य के उत्कर्ष की प्रतीकात्मक यात्रा है, जो शिक्षा को मानवता और आशा से जोड़ती है। राजमाता स्कूल की डीन एक्सचेंज प्रोग्राम्स, श्रीमती सपना गुप्ता के अनुसार यह कॉन्क्लेव वैश्विक सहयोग, विविधता, विचार-विनिमय और शैक्षिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने का अवसर है।
21वीं सदी की शिक्षा के संदर्भ में होगी सार्थक चर्चा
सम्मेलन के दौरान 21वीं सदी की शिक्षा के संदर्भ में नेतृत्व, शिक्षक कल्याण, सांस्कृतिक संवेदनशीलता और सतत विकास जैसे विषयों पर सेमिनार, पैनल चर्चा और थीम आधारित सत्र आयोजित होंगे। “आरोहणम्” शिक्षा के माध्यम से बुद्धि के जागरण और साझा उददेश्य के दवारा सीमाओं से परे ऊर्ध्वगामी यात्रा का प्रतीक बनकर इस सम्मेलन को केवल विचारों का नहीं, बल्कि आदर्शों का महोत्सव बनाएगा।





