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Thursday, July 9, 2026, 4:10 am

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राजमाता स्कूल में 86वाँ इंडियन पब्लिक स्कूल्स प्राचार्य सम्मेलन ( आई पी एस सी ) का हुआ शुभारंभ

प्रख्यात अर्थशास्त्री एवं नीति-विशेषज्ञ डॉ. मोंटेक सिंह आहलूवालिया ने अपने उद्बोधन में शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की धुरी बताते हुए कहा कि 21वीं सदी का विद्यालय वह है जो विद्यार्थियों के भीतर विचार, संवेदना और जिम्मेदारी—तीनों को समान रूप से विकसित करे।

शिव वर्मा. दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर 

राजमाता कृष्णा कुमारी गर्ल्स पब्लिक स्कूल में रविवार को 86 वें इंडियन पब्लिक स्कूल प्राचार्य सम्मेलन का बदन रंगशाला सभागार में विधिवत शुभारंभ हुआ । योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया, पूर्व नरेश गज सिंह व महारानी हेमलता राज्ये व विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर समारोंह का शुभारंभ किया ।

सम्मेलन के उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि प्रख्यात अर्थशास्त्री एवं नीति-विशेषज्ञ डॉ. मोंटेक सिंह आहलूवालिया ने अपने उद्बोधन में शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की धुरी बताते हुए कहा कि 21वीं सदी का विद्यालय वह है जो विद्यार्थियों के भीतर विचार, संवेदना और जिम्मेदारी—तीनों को समान रूप से विकसित करे। उनके संबोधन ने उपस्थित प्राचार्यों को इस दिशा में नव-विचार एवं नव-संकल्प के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि राजमाता स्कूल पूर्व नरेश गज सिंह देखरेख में संरक्षण में देश के श्रेष्ठ पब्लिक विद्यालयों में गिना जाता है । यह संस्थान बालिकाओं के बेहतर शिक्षा का संस्थान है । उन्होंने इस अवसर पर राजमाता कृष्णा कुमारी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके नाम से चल रहा विद्यालय देश में अपना नाम कर रहा है । अपनी एआई नीति तय करने से पूर्व दृष्टिकोणों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करना चाहिए स्वदेशी मार्ग खोजें जो समावेशी विकास सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि एआई के जटिल उपयोग से उत्पन्न एकाधिकारवादी प्रवृत्तियों पर नियंत्रण आवश्यक है; नीतिगत सुधारों द्वारा इसे समानता और नवाचार के लिए उपयोगी बनाना होगा। उन्होंने कहा कि एआई युग में उच्च शिक्षा को समानता के साथ विस्तार दें—’ज्ञान अर्थव्यवस्था’ के नारे से आगे बढ़कर, राजस्थान जैसे क्षेत्रों में लड़कियों को निकटवर्ती संस्थानों में एआई-सक्षम कौशल प्रदान करें । उन्होंने कहा कि एआई से उत्पन्न अवसरों का लाभ सभी को मिले, इसके लिए साहसी नीतिगत परिवर्तन आवश्यक हैं जो भारत को वैश्विक नेतृत्व की नई राह पर ले जाएँ । उन्होंने कहा कि स्टार्टअप्स और अनुसंधान को प्रोत्साहन दें, एआई एकाधिकार को नियंत्रित कर राष्ट्रीय क्षमता बढ़ाएँ। एआई के लाभों को सभी वर्गों तक पहुँचाएँ, विशेषकर ग्रामीण और महिलाओं को, ताकि असमानता न बढ़े।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए पूर्व नरेश गजसिंह ने कहां कि जोधपुर का यह प्राचीन नगर शिक्षा और संस्कृति का संगम है। राजमाता कृष्णा कुमारी गर्ल्स पब्लिक स्कूल ने इस कॉन्क्लेव के माध्यम से मारवाड़ की परंपराओं व संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुँचाया है। उन्होंने कहा कि आईपीएससी के प्रिंसिपल्स का यह एकत्रीकरण भारतीय शिक्षा को मजबूत बनाएगा। उन्होंने सम्मेलन में आए हुए सभी प्राचार्य व शिक्षाविदों का स्वागत किया व धन्यवाद व्यक्त किया ।

आईपीएससी चेयरपर्सन अनिल शर्मा ने भी अपने संबोधन में कहा कि 86वां प्रिंसिपल्स कॉन्क्लेव जोधपुर की युवा ऊर्जा और ऐतिहासिक गौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राजमाता स्कूल हर 80 वर्ष में एक बार मिलने वाले इस अवसर को प्राप्त करने वाला पहला संस्थान है। हम सभी पूर्व चेयरपर्सन्स के साथ मिलकर शिक्षा के भविष्य को आकार देंगे।

समारोह को शिक्षाविद् व सलाहकार डॉ. रंजन बनर्जी ने कहां कि आज के विद्यालयों को केवल अंकों तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों के स्वरूप-निर्माण और आत्मबोध की ओर उन्मुख होना होगा। उनकी चिंतनशील प्रस्तुति ने कॉन्क्लेव की वैचारिक धरातल को गहराई प्रदान की।

प्रसिद्ध कॅरियर व शिक्षा विशेषज्ञ तथा फाउंडर डायरेक्टर डॉ. अमृता दास ने प्रभावशाली विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी केवल श्रोता नहीं, बल्कि सह-निर्माता हैं; इसलिए विद्यालयों को ऐसे मंच प्रदान करने होंगे जहाँ छात्र अपनी आवाज़, दृष्टि और नेतृत्व क्षमता के साथ साझेदारी कर सकें। इस सत्र के बाद आयोजित पैनल डिस्कशन में स्टूडेंट वॉइस और एजेंसी पर सार्थक संवाद हुआ, जिसमें विभिन्न आईपीएससी विद्यालयों के प्राचार्यों ने अपने अनुभवों, चुनौतियों और सफल पहलों को साझा किया।
राजमाता कृष्णा कुमारी गर्ल्स पब्लिक स्कूल की प्राचार्या श्रीमती नीरा सिंह ने इस अवसर पर कहा कि, आरकेकेजीपीएस के लिए 86 वाँ आईपीएससी प्रिंसिपल्स’ कॉन्क्लेव की मेजबानी केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, विश्वास और साझी दृष्टि का प्रतीक है। ‘आरोहणम्’ के माध्यम से हम सबने मिलकर यह अनुभव किया कि शिक्षा तब अपने शिखर पर पहुँचती है जब वह मन, मस्तिष्क और आत्मा—तीनों को साथ लेकर चलती है।

प्राचार्यो व शिक्षाविदों ने की सराहना

इस अवसर पर सम्मेलन में आए हुए प्राचार्य व शिक्षाविदों ने सराहना करते हुए कहा कि कॉन्क्लेव को विचारों, अनुभवों और संबंधों के समृद्ध आदान-प्रदान का मंच है । राजमाता कृष्णा कुमारी गर्ल्स पब्लिक स्कूल की संगठन क्षमता, सूक्ष्म योजना, विद्यार्थी सहभागिता स्वागत योग्य है । उन्होंने जोधपुर की पारम्परिक आतिथ्य-संस्कृति की सराहना की। प्राचार्यो व शिक्षाविदो ने संकल्प लिया कि वे “आरोहणम्” की इसी प्रेरणा को आगे बढ़ाते हुए विद्यार्थियों को न केवल सफल पेशेवर, बल्कि संवेदनशील, जिम्मेदार और आध्यात्मिक रूप से सजग नागरिक के रूप में गढ़ने का प्रयत्न जारी रखेंगे। डॉ अमृत दास ने इस अवसर पर कहा कि स्कूलों को पूर्व-निर्धारित पाठ्यक्रमों से आगे बढ़कर एआई-सक्षम शिक्षा अपनानी होगी, जहाँ छात्र स्वायत्तता के साथ नई करियर पथ चुन सके ।डॉ रंजन बनर्जी ने कहा कि संस्थाएँ व्यक्तियों को परिवर्तित नहीं करतीं , वे वातावरण बनाती हैं जहाँ प्रौद्योगिकी मनोवैज्ञानिक सुरक्षा और नवाचार को बढ़ावा दे । उन्होंने कहा कि प्रिंसिपल्स, मनोवैज्ञानिक सुरक्षा, नवाचार पारिस्थितिकी तथा साहसी मानसिकता अपनाएँ—आपका नेतृत्व भारत की युवा पीढ़ी को परिवर्तनकारी उत्कृष्टता की ओर ले जाएगा ।

डॉ. पियूषी शुक्ला, विमल वर्मा, सपना गुप्ता, नवदीप परीहर, जितेंद्र सिंह, डॉ. नीतु परीहर, इन्द्रा शक्तावत, रीमा राठौड़, कृतीका सोलंकी, प्रवीण सिंह राठौड़, कुलदीप सिंह, मलिका चौहान, दीपक बोहरा, भवानी सिंह, विपुल, संध्या मुद्गल आरकेके के पूरे स्टाफ और सहायक स्टाफ ने प्रधानाचार्य श्रीमती नीरा सिंह के गतिशील नेतृत्व में लगातार मेहनत की। छात्र परिषद – मल्लिका सिंह हारीअंशिका शेखावत, ऋषिता भंसाली, नताशा मिश्रा, निहारिका चंपावत, चाबी सरन, मेहू सूनिल वर्मा, समृद्धि बांग, समृद्धि चरण, अद्वितीय सक्सेना, सौम्या सिंह ने कार्यक्रम का संचालन किया ।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor