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Sunday, August 23, 2026, 7:10 am

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सूरसागर में वरसी महोत्सव आयोजित, संतों ने बताया गुरु-निष्ठा व सत्संग का महत्व

सुनील वर्मा. जोधपुर 

सूरसागर स्थित संतों की तपोस्थली श्री बड़ा रामद्वारा में खेड़ापा पीठाधीश्वर पुरुषोत्तम दास महाराज एवं परमहंस डॉ. रामप्रसाद महाराज के पावन सान्निध्य में बरसी महोत्सव श्रद्धा व भक्ति भाव से संपन्न हुआ।

महोत्सव के अंतर्गत संत श्रवणराम महाराज ने गोपीचंद कथा का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि शिष्य यदि गुरु के प्रति निष्ठावान रहकर सेवा करता है तो उसे जीवन में सदैव सफलता प्राप्त होती है। उन्होंने बताया कि गोपीचंद द्वारा अपने गुरु की निंदा किए जाने के कारण उसे अनेक कष्टों का सामना करना पड़ा। इसलिए जीवन में सदैव गुरु की शरण में रहना चाहिए।

सत्संग की महिमा बताते हुए संत श्रवणराम महाराज ने कहा कि जब भगवान की विशेष कृपा होती है, तभी संत दर्शन और सत्संग सुनने का अवसर प्राप्त होता है। अतः जीवन में जब भी समय मिले, सत्संग अवश्य करना चाहिए। परमहंस रामप्रसाद महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है। यदि इस जीवन को सार्थक बनाना है तो राम भजन में मन लगाना चाहिए। समय का कोई भरोसा नहीं है और राम नाम ही इस भवसागर को पार करने का मुख्य साधन है। उन्होंने कहा कि भगवत कृपा से प्राप्त इस दुर्लभ अवसर का अधिक से अधिक उपयोग सत्संग में करना चाहिए। सायंकालीन सत्संग में प्रेमाराम महाराज के सान्निध्य में ग्रंथ करुणा सागर का सामूहिक पाठ किया गया, जिसमें रामस्नेही गुरुकुल विद्यापीठ, तिंवरी के विद्यार्थियों ने भाग लिया।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor