संत श्रवणराम महाराज ने कथा सुनाते हुए गुरु-शिष्य परंपरा की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु अपने तपोबल और राम नाम की गहन साधना से शिष्य को राम नाम मंत्र प्रदान करते हैं।
सुनील वर्मा. जोधपुर
रामस्नेही संप्रदाय की प्रमुख पीठ श्री बड़ा रामद्वारा सूरसागर में आयोजित बरसी महोत्सव के अंतर्गत भक्ति और श्रद्धा का अनुपम संगम देखने को मिला। परमहंस डॉ. रामप्रसाद महाराज के पावन सान्निध्य में संत श्रवणराम महाराज ने गोपीचंद-भारथरी की विरहपूर्ण कथा का मार्मिक वर्णन किया, जिससे उपस्थित हजारों श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
संत श्रवणराम महाराज ने कथा सुनाते हुए गुरु-शिष्य परंपरा की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु अपने तपोबल और राम नाम की गहन साधना से शिष्य को राम नाम मंत्र प्रदान करते हैं। शिष्य यदि गुरु वचनों पर अटल श्रद्धा रखकर उन्हें जीवन में उतारे, तो उसका जन्म सफल हो जाता है। कथा में मां मैनावती और राजा गोपीचंद के बीच हुए पावन विरह संवाद का बड़ा ही हृदयस्पर्शी चित्रण किया गया। इस संवाद में मां की ममता और पुत्र के वैराग्य की भावना ने श्रोताओं की आंखें नम कर दीं। अंत में गोपीचंद का गुरु गोरखनाथ जी की शरण में जाना और योग साधना अपनाना – यह प्रसंग सुनकर सभागार तालियों और जयकारों से गूंज उठा।
इसके पश्चात परमहंस डॉक्टर रामप्रसाद महाराज ने प्रवचन में कहा कि कई-कई जन्मों के संचित पुण्य उदय होने पर ही मनुष्य को संत दर्शन, ब्राह्मण दर्शन और सत्संग का दुर्लभ अवसर प्राप्त होता है। आज इस वरसी महोत्सव में इन तीनों का पावन संगम हो रहा है, जो सौभाग्य की पराकाष्ठा है। महाराज ने भक्तों से आह्वान किया कि राम नाम का जप निरंतर करें, क्योंकि यही मोक्ष का सरलतम मार्ग है।
रामस्नेही संप्रदाय की यह परंपरा सदियों से राम भक्ति और गुरु कृपा की अलख जगा रही है। ऐसे आयोजन न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करते हैं, बल्कि समाज को सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देते हैं। महोत्सव में पंडित रविदत्त अग्निहोत्री (सोमयाजी), नवरत्न, योगेश, राजशेखर अग्निहोत्री, विट्ठल, डॉ. विनीत, शुभम गोड़ आदि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।








