गीत : नाचीज बीकानेरी
आओ आज पतंग उड़ाएं
आओ आओ आज पतंग उड़ाएं ।
मेरी छत पर सब आ पतंग उड़ाएं ।।
आओ राम – जेम्स आओ रहमान ।
मकर संक्रांति है खूब पतंग उड़ाएं ।।
कोयल सी काली सादा डोर के संग ।
आकाश में आज पतंगों से करें जंग ।।
कभी ढील से या कभी खींच के करें ।
कटी पतंग को लूटने में भी होती जंग ।।
कटी पतंग इक घर से जाती दूजे घर ।
चांद् सितारों सी नभ में उड़े फर – फर ।।
ठुमकी दे गुड़क-गुड़क कर नभ में छाए ।
बच्चे बूढ़े मांझे संग उड़ाए सर-सर-सर ।।
जातपांत – धर्म से पतंग का नहीं नाता ।
भोलाराम की कटी पतंग जफर लूटता ।।
खान की पतंग पंडित की छत पर गिरे ।
पतंगबाजी से आपसी भाईचारा बढ़ता ।।
आओ मकर संक्रान्ति पे पतंग उड़ाएं ।
मन बहलाएं छत पे जा पतंग उड़ाएं ।।
नभ सारा भरा रंग – बिरंगी पतंगो से ।
अहद करें चाइनीज – मांझे से न उड़ाएं ।।
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मईनुदीन कोहरी ” नाचीज़ बीकानेरी “
मोहल्ला कोहरियान, पुरानी गिनाणी ,बीकानेर 334001
मो 9680868028





