लेखक : शिव सिंह
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राजस्थान की खान-पान संस्कृति अपनी सादगी और पौष्टिकता के लिए जानी जाती है। यहाँ के पारंपरिक व्यंजनों में ‘राब’ (जिसे राबड़ी भी कहा जाता है) का एक विशेष स्थान है। मुख्य रूप से बाजरे के आटे और छाछ (मट्ठा) से बनी यह डिश न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि थार रेगिस्तान की भीषण गर्मी और सर्दी दोनों में शरीर के लिए सुरक्षा कवच का काम करती है।
राब के मुख्य उपयोग और फायदे
राब का उपयोग राजस्थान के घरों में कई तरीकों से किया जाता है:
1. लू और गर्मी से बचाव (शीतलक के रूप में)
गर्मी के दिनों में राब को मिट्टी के बर्तन में बनाकर ठंडा किया जाता है। प्याज और जीरे के साथ इसका सेवन शरीर के तापमान को नियंत्रित रखता है और ‘लू’ (Heatstroke) से बचाता है। यह एक बेहतरीन नेचुरल प्रोबायोटिक है जो पेट को ठंडा रखता है।
2. रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity Booster)
सर्दियों में बाजरे की राब को गरम-गरम पिया जाता है। बाजरे में मौजूद मैग्नीशियम, आयरन और फाइबर शरीर को ऊर्जा देते हैं और सर्दी-खांसी जैसी मौसमी बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं।
3. पाचन तंत्र के लिए रामबाण
चूंकि राब को किण्वित (Fermented) करके बनाया जाता है, इसलिए यह आंतों के स्वास्थ्य (Gut Health) के लिए बहुत फायदेमंद है। यह सुपाच्य होती है और कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करने में सहायक है।
4. ऊर्जा का त्वरित स्रोत
खेतों में काम करने वाले किसानों के लिए राब सुबह के नाश्ते का मुख्य हिस्सा होती है। यह लंबे समय तक पेट भरा रखती है और दिनभर काम करने के लिए आवश्यक कैलोरी और हाइड्रेशन प्रदान करती है।
राब के विभिन्न प्रकार
* बाजरे की राब :बाजरा, छाछ, नमक, गर्मी और सर्दी दोनों में (सर्वश्रेष्ठ)
* मक्के की राब : मक्का, छाछ , मुख्य रूप से मेवाड़ क्षेत्र में प्रसिद्ध
* गुड़ की राब: सोंठ, गुड़, घी, बाजरा ,
प्रसव के बाद महिलाओं के लिए और जुकाम में
राजस्थानी राब केवल एक व्यंजन नहीं, बल्कि एक “सुपरफूड” है। आज के समय में जब लोग पैकेट बंद ड्रिंक्स की ओर भाग रहे हैं, राब जैसा पारंपरिक और शुद्ध पेय स्वास्थ्य के लिए सबसे बेहतर विकल्प है।
सलाह : राब का असली आनंद मिट्टी के कुल्हड़ में भुने हुए जीरे और बारीक कटे प्याज के साथ आता है।
पारंपरिक राजस्थानी बाजरे की राब (Recipe)
यह विधि राजस्थान के गाँवों में सदियों से अपनाई जा रही है।
आवश्यक सामग्री:
बाजरे का आटा: 1/2 कप
खट्टी छाछ (मट्ठा): 1 लीटर (हल्की खट्टी छाछ से स्वाद ज्यादा अच्छा आता है)
नमक: स्वादानुसार
जीरा: 1 छोटा चम्मच (भुना हुआ)
साबुत अनाज (वैकल्पिक): 1 बड़ा चम्मच मोटा कुटा हुआ बाजरा
बनाने की विधि:
1. मिश्रण तैयार करना (घोल):
सबसे पहले एक बड़े बर्तन में बाजरे का आटा लें। इसमें धीरे-धीरे छाछ डालें और मिलाते रहें ताकि कोई गुठली (Lumps) न रहे। एक स्मूथ घोल तैयार कर लें।
2. खमीर उठाना (सबसे महत्वपूर्ण स्टेप):
अगर आप इसे दोपहर के खाने के लिए बना रहे हैं, तो सुबह ही घोल तैयार कर लें। इसे 3-4 घंटे के लिए धूप में या किसी गरम जगह पर रख दें। इससे छाछ और बाजरा आपस में “फर्मेंट” हो जाते हैं, जिससे राब में विशिष्ट सोंधी खुशबू आती है।
3. पकाना:
अब इस मिश्रण को एक भारी तले वाले बर्तन (मिट्टी की हांडी हो तो सर्वश्रेष्ठ) में डालें।
इसे मध्यम आंच पर रखें और लगातार चलाते रहें। (चलाना न छोड़ें वरना छाछ फट सकती है)।
जब इसमें एक उबाल आ जाए, तब आंच धीमी कर दें और नमक डालें।
इसे 15-20 मिनट तक पकने दें जब तक कि यह थोड़ा गाढ़ा न हो जाए।
4. तड़का और परोसना:
पकने के बाद इसमें भुना हुआ जीरा डालें।
सर्दियों में: इसे गरमा-गरम प्याले में लेकर एक चम्मच घी डालकर पिएं।
गर्मियों में: इसे पूरी तरह ठंडा होने दें। फिर इसमें कटा हुआ प्याज, पुदीना और ठंडी छाछ मिलाकर पिएं।
कुछ जरूरी सुझाव:
मिट्टी का बर्तन: यदि संभव हो तो राब को मिट्टी की हांडी में पकाएं, इससे इसका स्वाद और स्वास्थ्य लाभ दोगुना हो जाता है।
निरंतरता: इसे बहुत ज्यादा गाढ़ा न करें, क्योंकि ठंडा होने के बाद यह अपने आप गाढ़ी हो जाती है।
सर्दियों के लिए बदलाव: यदि आप जुकाम के लिए बना रहे हैं, तो छाछ की जगह पानी और गुड़ का उपयोग करें और इसमें थोड़ी सोंठ (सूखा अदरक) डाल दें।





