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Thursday, July 9, 2026, 2:36 am

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Lifestyle

मैदा: स्वाद में लाजवाब, सेहत के लिए अभिशाप?

लेखक: शिव सिंह

मैदा असल में गेहूं का ही एक रूप है, लेकिन इसे बनाने की प्रक्रिया इसे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बना देती है। आइए जानते हैं कि यह हमारे शरीर को कैसे नुकसान पहुँचाता है:

​1. पोषक तत्वों का अभाव (Zero Nutrition)
​मैदा बनाने के लिए गेहूं को इतनी बार मिल में पीसा और रिफाइन किया जाता है कि उसके ऊपर का छिलका (Bran) और अंकुर (Germ) पूरी तरह निकल जाते हैं।

​नतीजा: गेहूं में मौजूद जरूरी फाइबर, विटामिन और मिनरल्स खत्म हो जाते हैं, और पीछे बचता है सिर्फ ‘खाली स्टार्च’।

​2. खतरनाक केमिकल और ब्लीचिंग
​बाजार में मिलने वाला मैदा इतना सफेद और चमकदार इसलिए होता है क्योंकि उसे केमिकल से ब्लीच किया जाता है।

* ​बेंज़ोयल पेरोक्साइड (Benzoyl Peroxide): इसे सफेद करने के लिए इस्तेमाल होता है।

* ​एलोक्सन (Alloxan): यह मैदे को चिकना और मुलायम बनाने के लिए डाला जाता है। शोध बताते हैं कि ‘एलोक्सन’ शरीर के पैनक्रियाज (Pancreas) की कोशिकाओं को नुकसान पहुँचा सकता है, जिससे डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।

​3. पाचन की समस्या (Digestive Issues)
​मैदे में फाइबर बिल्कुल नहीं होता। फाइबर न होने के कारण मैदा चिपचिपा हो जाता है।
​जब हम इसे खाते हैं, तो यह हमारी आंतों की दीवारों पर चिपक जाता है। इससे कब्ज (Constipation), गैस और अपच जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। इसे अक्सर ‘आंतों का दुश्मन’ भी कहा जाता है।

​4. वजन बढ़ना और मोटापा

​मैदा शरीर में जाते ही बहुत जल्दी ग्लूकोज में बदल जाता है। इससे खून में शुगर का स्तर तेजी से बढ़ता है।
​शरीर इस अतिरिक्त शुगर को फैब (Fat) के रूप में जमा करने लगता है। यही कारण है कि ज्यादा मैदा खाने वालों का पेट और वजन बहुत जल्दी बढ़ता है।

​5. कोलेस्ट्रॉल और दिल की बीमारी

​मैदे का नियमित सेवन शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) के स्तर को बढ़ाता है। इससे हाई ब्लड प्रेशर और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है।

​निष्कर्ष: कभी-कभी स्वाद के लिए मैदा खाना ठीक है, लेकिन इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना बीमारियों को न्योता देना है। बेहतर होगा कि आप मैदे की जगह चोकर युक्त आटा, रागी, बाजरा या मल्टीग्रेन आटे का चुनाव करें।

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor