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Thursday, July 9, 2026, 1:53 am

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जोधपुर : सेवा में पुन: बहाल करने के आदेश

90 दिन से अधिक व्यतीत होने पर आरोप पत्र नहीं देने का मामला, राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण

जोधपुर ने क्षेत्रीय वन अधिकारी ग्रेड प्रथम के पद पर कार्यरत शांतिलाल चावला की अपील को स्वीकार करते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल) जयपुर द्वारा पारित निलम्बन आदेश 26.08.2025 को अपास्त करते हुए पुनः सेवा में बहाल करने का आदेश पारित किया।
शांतिलाल चावला क्षेत्रीय वन अधिकारी ग्रेड प्रथम के पद पर डूंगरा जिला उदयपुर में कार्यरत है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में एक प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज होने के आधार पर उसे प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) राजस्थान जयपुर के आदेश दिनांक 26.08.2025 के द्वारा राजस्थान सिविल सेवाऐं (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1958 के नियम 13 के अन्तर्गत प्रदत शक्तियों के तहत उसे निलम्बित कर दिया गया। निलम्बित करने के पश्चात् उसका मुख्यालय भी मुख्य वन संरक्षक जयपुर कर दिया गया। निलम्बन आदेश के पश्चात् 90 दिन गुजर जाने पर भी प्रार्थी को न तो चार्जशीट जारी की गयी ना ही विभागीय जांच शुरू की गयी। विभाग के इस कृत्य से व्यथित होकर शांतिलाल चावला ने अपने अधिवक्ता प्रमेन्द्र बोहरा व नीता छंगाणी के माध्यम से एक अपील राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत की।
अधिकरण के समक्ष प्रार्थी के अधिवक्ता का तर्क था कि राज्य सरकार के परिपत्र 31.07.2018 व 12.04.2022 व सर्वोच्च न्यायालय के अनेकों न्यायिक दृष्टांत में यह प्रतिपादित किया गया है कि निलम्बन आदेश के 90 दिन के भीतर कर्मचारी को आरोप पत्र जारी करना अतिआवश्यक है, परन्तु वर्तमान प्रकरण में 90 दिन के अधिक समय व्यतीत हो जाने के उपरांत भी न तो चार्ज शीट दी गयी ना ही विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ भी गयी। अतः वन विभाग द्वारा 90 दिन के भीतर आरोप पत्र नहीं देना उच्चतम न्यायालय के न्यायिक दृष्टांतों व राज्य सरकार द्वारा निलम्बन के संदर्भ में समय-समय पर जारी परिपत्रों के विरूद्ध है। प्रार्थी के अधिवक्ता के तर्कों से सहमत होते हुए अधिकरण ने प्रार्थी शांतिलाल चावला के निलम्बन आदेश दिनांक 26.08.2025 को अपास्त करते हुए उसके द्वारा प्रस्तुत अपील को स्वीकार किया करते हुए उसे सेवा में पुनः बहाल करने एवं पुनः पदस्थापित करने का आदेश पारित किया।
Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor