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Lifestyle

​फ्री रेडिकल्स: शरीर के वे अदृश्य दुश्मन जो बढ़ाते हैं बुढ़ापा और बीमारियां

लेखक : शिव सिंह भाटी
9784092381

​हमारे शरीर में हर पल लाखों रासायनिक प्रतिक्रियाएं होती हैं। इनमें से कुछ प्रतिक्रियाएं हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी होती हैं, लेकिन कुछ ऐसे ‘बाय-प्रोडक्ट्स’ (उप-उत्पाद) भी पैदा करती हैं जो शरीर को नुकसान पहुँचा सकते हैं। इन्हीं में से एक मुख्य तत्व है— फ्री रेडिकल्स।

​क्या होते हैं फ्री रेडिकल्स?

​सरल शब्दों में कहें तो, फ्री रेडिकल्स वे अस्थिर परमाणु या अणु (Atoms or Molecules) होते हैं जिनके बाहरी घेरे में इलेक्ट्रॉनों की संख्या विषम (unpaired) होती है।
​रसायन विज्ञान के अनुसार, अणु स्थिर रहने के लिए इलेक्ट्रॉनों के जोड़े बनाना पसंद करते हैं। चूंकि फ्री रेडिकल्स के पास एक इलेक्ट्रॉन कम होता है, वे “अकेले” और बहुत अधिक क्रियाशील होते हैं। वे अपने आप को स्थिर करने के लिए शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं से इलेक्ट्रॉन छीनने की कोशिश करते हैं। इस छीना-झपटी की प्रक्रिया को ‘ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस’ (Oxidative Stress) कहा जाता है।

​फ्री रेडिकल्स शरीर में बनते कैसे हैं?

​फ्री रेडिकल्स का बनना एक स्वाभाविक प्रक्रिया भी है और बाहरी कारकों का परिणाम भी। इसके मुख्य कारण नीचे दिए गए हैं:

* ​चयापचय (Metabolism): जब हमारा शरीर भोजन से ऊर्जा बनाता है, तो उप-उत्पाद के रूप में फ्री रेडिकल्स निकलते हैं।

* ​प्रदूषण: हवा में मौजूद धुआं, धूल और जहरीले रसायन।

* ​धूम्रपान और शराब: ये शरीर में भारी मात्रा में फ्री रेडिकल्स पैदा करते हैं।

* ​सूर्य की UV किरणें: धूप में अधिक देर रहने से त्वचा की कोशिकाओं में ये पैदा होते हैं।

* ​तनाव और जंक फूड: अत्यधिक मानसिक तनाव और तले-भुने खाने से इनकी संख्या बढ़ जाती है।

​ये शरीर को कैसे नुकसान पहुँचाते हैं?

​जब शरीर में फ्री रेडिकल्स की संख्या बहुत अधिक हो जाती है और शरीर उन्हें नियंत्रित नहीं कर पाता, तो वे निम्नलिखित नुकसान कर सकते हैं:
* ​कोशिकाओं को नुकसान: ये कोशिका की दीवार (Cell Membrane) को तोड़ सकते हैं।

* ​DNA डैमेज: ये हमारे आनुवंशिक कोड (DNA) को बदल सकते हैं, जिससे कैंसर जैसी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।

* ​समय से पहले बुढ़ापा: चेहरे पर झुर्रियां, बालों का सफेद होना और त्वचा का ढीला पड़ना फ्री रेडिकल्स के कारण ही होता है।

* ​गंभीर बीमारियां: हृदय रोग, अल्जाइमर, गठिया (Arthritis) और मोतियाबिंद का सीधा संबंध ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से ह।

बचाव का रास्ता: एंटीऑक्सीडेंट्स (Antioxidants)

​फ्री रेडिकल्स से लड़ने के लिए प्रकृति ने हमें एंटीऑक्सीडेंट्स का हथियार दिया है। एंटीऑक्सीडेंट्स वे अणु होते हैं जो खुशी-खुशी अपना एक इलेक्ट्रॉन फ्री रेडिकल को दान कर देते हैं, जिससे वह शांत (स्थिर) हो जाता है और स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान नहीं पहुँचाता।

​मुख्य स्रोत:

* ​विटामिन C: संतरा, नींबू, आंवला और अमरूद।

* ​विटामिन E: बादाम, सूरजमुखी के बीज और पालक।

* ​बीटा-कैरोटीन: गाजर, शकरकंद और पपीता।

* ​ग्रीन टी: इसमें शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स (Catechins) होते हैं।

​फ्री रेडिकल्स को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है, क्योंकि ये जीवन की स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। हालांकि, एक स्वस्थ जीवनशैली, ताजे फल-सब्जियों का सेवन और प्रदूषण से बचकर हम इनके दुष्प्रभाव को कम कर सकते हैं। याद रखें, आपके शरीर की जंग सूक्ष्म स्तर पर जारी है, और सही खान-पान ही आपकी सबसे बड़ी ढाल है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor