राइजिंग भास्कर. जोधपुर
राजस्थान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के न्यायमूर्ति विनीत कुमार माथुर और न्यायमूर्ति चंद्र शेखर शर्मा ने नाबालिग से दुष्कर्म के एक मामले में दोषी आरोपी को उम्रकैद की सज़ा सुनाई।
यह मामला हनुमानगढ़ ज़िले का है, जहां आरोपी ने अपने ही करीबी रिश्ते की नाबालिग बच्ची के साथ घर में घुसकर दुष्कर्म किया था। सुनवाई के दौरान पीड़िता की ओर से अधिवक्ता उर्वशी कल्ला और जयंत जैन ने प्रभावी पैरवी करते हुए आरोपी की अपील को पूरी तरह खारिज करने की मांग की, जिसे अदालत ने स्वीकार किया। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता की गवाही विश्वसनीय है और मेडिकल व एफएसएल साक्ष्य उसका ठोस समर्थन करते हैं, जबकि एफआईआर में हुई देरी को मानसिक आघात और पारिवारिक दबाव के चलते स्वाभाविक बताया। डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि POCSO कानून के तहत नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों में किसी भी प्रकार की नरमी स्वीकार्य नहीं है। न्यायालय ने अपनी टिप्पणी में कहा कि पारिवारिक रिश्तों की आड़ में किए गए ऐसे अपराध समाज के लिए अत्यंत घातक हैं तथा ऐसे मामलों में कठोर दंड ही न्याय का वास्तविक स्वरूप है। इस निर्णय को महिला एवं बाल सुरक्षा के पक्ष में एक महत्वपूर्ण और मिसाल कायम करने वाला कदम माना जा रहा है। अतः सत्य ही कहा गया है – “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।; यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वा स्तत्राफलाः क्रियाः।।.” अर्थात “जहाँ नारी का सम्मान और पूजा होती है, वहाँ देवता निवास करते हैं; और जहाँ नारी का सम्मान नहीं होता, वहाँ किए गए सभी कर्म निष्फल हो जाते हैं।”



