लेखक शिव सिंह
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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम बड़ी-बड़ी बीमारियों के लिए महंगी दवाओं और डॉक्टरों के पीछे भागते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ईश्वर ने हमारे शरीर के भीतर ही एक ऐसी औषधि दी है, जो न केवल घावों को भरती है, बल्कि हमारे स्वास्थ्य की रक्षा कवच भी है? वह अनमोल रत्न है—हमारी लार।
एक माँ की ममता जैसा अहसास
याद कीजिए बचपन के वो दिन, जब खेलते वक्त घुटने पर चोट लगती थी, तो हम अनजाने में ही उस पर अपनी लार लगा लेते थे। वह कोई वैज्ञानिक प्रयोग नहीं था, बल्कि एक सहज प्रवृत्ति (Instinct) थी। जैसे एक माँ अपने बच्चे के घाव को चूमकर ठीक कर देती है, वैसे ही लार हमारे शरीर की अपनी ‘ममता’ है। यह संकेत है कि प्रकृति ने हमें लावारिस नहीं छोड़ा; उसने हमें खुद को ठीक करने की शक्ति दी है।
क्यों है यह सर्वश्रेष्ठ औषधि?
* प्राकृतिक एंटीसेप्टिक: लार में Lyzosyme जैसे एंजाइम होते हैं जो कीटाणुओं को नष्ट करते हैं। यही कारण है कि जानवर अपने घावों को चाटकर ठीक कर लेते हैं।
* पाचन का आधार: भोजन का असली स्वाद और उसका पोषण हमारे शरीर को तभी मिलता है जब वह लार के साथ घुलता है। ‘लार’ के बिना भोजन केवल पेट भरने का साधन है, पोषण का नहीं।
* मुँह का रक्षक: यह दांतों की सड़न को रोकती है और मुँह के छालों को प्राकृतिक रूप से ठीक करने की क्षमता रखती है।
* सुबह की पहली लार: एक ‘जादुई’ अर्क: आयुर्वेद के अनुसार, सुबह की बासी लार (बिना कुल्ला किए) सबसे अधिक गुणकारी होती है। इसे ‘सोना’ माना गया है।
* आंखों की रोशनी: इसे काजल की तरह आंखों में लगाने से चश्मे का नंबर कम होने और आंखों की जलन दूर होने के किस्से सदियों से मशहूर हैं।
* त्वचा के रोग: मुँहासे, काले घेरे और पुराने दागों पर सुबह की लार का नियमित उपयोग किसी भी महंगी क्रीम से ज्यादा असरदार साबित हो सकता है।
एक भावनात्मक सच्चाई
हम अक्सर अपनी ही चीजों की कद्र नहीं करते। हम भूल जाते हैं कि हमारे भीतर बहने वाला यह तरल पदार्थ हमारे जीवित होने और स्वस्थ रहने का प्रमाण है। जब हम तनाव में होते हैं, तो हमारा गला सूख जाता है—यह शरीर का चीख-चीख कर कहना है कि उसे शांति और हाइड्रेशन की जरूरत है।
निष्कर्ष:
लार केवल थूक नहीं है, यह जीवन का रस है। यह याद दिलाती है कि समाधान हमेशा बाहर की दुकानों पर नहीं मिलता, कुछ उपचार हमारे भीतर भी छिपे होते हैं। अपनी जीवनशैली को सुधारें, पानी भरपूर पिएं और प्रकृति के इस ‘अमृत’ का सम्मान करें।
स्वस्थ रहे सुरक्षित रहे आयुर्वेद अपनाये।








