बजट में हो प्रावधान : अधिस्वीकृत-गैर अधिस्वीकृत पत्रकारों का लफड़ा खत्म हो, जेडीए (जर्नलिस्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी ) का गठन हो, आईएएस-आरएएस अफसर और राजनीतिज्ञों का प्राधिकरण में कोई स्थान नहीं हो, संचालन पत्रकार ही करें और दो-तीन रिटायर्ड जज मार्गदर्शक बनें, एक ऐसा मंच जहां पत्रकारों के हर मुद्दे का एक ही छत के नीचे निस्तारण खुद पत्रकार करें
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
9783414079 diliprakhai@gmail.com
मारवाड़ प्रेस क्लब। एक मंच। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल मीडिया या अन्य प्लेटफॉर्म। पिछले दिनों क्लब की कार्यकारिणी और कमेटियों के गठन के बाद एक व्यवस्थित कार्यप्रणाली की आधारभूमि तैयार हो चुकी है। सबसे बड़ी बात राजीव गौड़ दूसरी बार क्लब के निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए। राजीव एक सरल व्यक्तित्व के धनी है और आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। उनमें पत्रकारिता की समझ है और समस्याओं पर गहरी पकड़ है। मैंने राजीव में एक ऐसा नेतृत्व देखा है जो सबको साथ लेकर चलता है और सबकी बात सुनने में विश्वास रखता है। राजीव गौड़ के साथ ही समस्त कार्यकारिणी और कमेटियों में योग्य और उनकी कार्यशौली के अनुसार जिम्मेदारी दी गई है, यह क्लब की सबसे बड़ी विशेषता है। राजीव की सक्रियता का उदाहरण इस बात से देखा गया कि जब बजट से पूर्व ही उन्होंने पत्रकारों के हितों की पैरवी करनी शुरू कर दी। जिस अंदाज में उन्होंने एक ही दिन में सभी साथियों से सुझाव मंगवाएं और उसे व्यवस्थित रूप दिया। इतनी सक्रियता देखकर प्रसन्नता हुई। यह आलेख मैं किसी को खुश करने के लिए नहीं लिख रहा, बल्कि जो मेरे मन के भाव थे, उसे प्रकट करना चाहता था।
मारवाड़ प्रेस क्लब जहां बिना किसी भेदभाव के हर वर्ग को मिला प्रतिनिधित्व :
मारवाड़ प्रेस क्लब एक ऐसा मंच है, जहां बिना किसी भेदभाव के हर वर्ग को प्रतिनिधित्व मिला है। भाई राजीव की यह पहल प्रशंसनीय है। मैं चाहता हूं मारवाड़ प्रेस क्लब जोधपुर ही नहीं समूचे मारवाड़ के अधिस्वीकृत और गैर अधिस्वीकृत पत्रकारों की आवाज बने। मैं हिन्दुस्तान का 10 साल रिपोर्टर रहा। दैनिक भास्कर में 5 फरवरी 2003 से निरंतर जोधपुर में सीनियर सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। फिलहाल कुछ कारणों से छह माह से अवकाश पर हूं, पर अभी तक इस्तीफा नहीं दिया है, इसलिए यह भी नहीं कह सकता कि भास्कर छोड़ दिया है। पर हां, अब सारा ध्यान राइजिंग भास्कर डॉट कॉम पर है। भाई राजीव गौड़ हमेशा मेरा सम्मान करते रहे हैं और पत्रकारों को पैसे से ज्यादा सम्मान प्रिय होता है। राजीव हमेशा खुद भी बेबाक पत्रकारिता करते रहे है और निर्भीक पत्रकारिता को संरक्षण भी देते हैं। मैं चाहता हूं मारवाड़ प्रेस क्लब पत्रकार संगठनों के बीच अपने नाम से जाना जाए और एक अपने आप में ब्रांड नेम बने। पत्रकार साथी इस मंच के साथ जुड़कर अपने को गौरवान्वित और सुरक्षित समझें। आज का समय ऐसा है कि बड़े मीडिया घरानों का आतंक बढ़ता जा रहा है। वहां मालिकों और कर्मचारियों के बीच झगड़े और अहं की लड़ाई आम बात हो गई है। ऐसे में मठाधीश पत्रकार भी अपने साथियों को अपमानित और जूते की नौक पर रखना चाहते हैं। मैं चाहता हूं कि जब भी कभी पत्रकारिता ओर रोजगार पर आंच आए तो मारवाड़ प्रेस क्लब ऐसे पत्रकार साथियों के साथ खड़ा रहे और बड़ा आंदोलन भी खड़ा करना पड़े तो तैयार रहे। क्योंकि जब हम कोई संगठन लेकर चलते हैं तो सबको साथ लेकर चलना बड़ी जिम्मेदारी होती है।
बड़ा सवाल : 30-30 साल से पत्रकारिता कर रहे, पर अधिस्वीकृत नहीं, ऐसे पत्रकारों को भी योजनाओं का लाभ मिले :
मैं भाई राजीव को बताना चाहूंगा कि कई पत्रकार ऐसे भी हैं जो 30 साल से अधिक समय से पत्रकारिता कर रहे हैं, पर अधिस्वीकृत नहीं हो पाए। इसके बहुत से कारण रहे हैं, जिसमें एक बड़ा कारण मीडिया हाउस के संपादकों की मनमानी और कुछ खुद पत्रकारों की उदासनीता और कुछ कड़े नियम। खैर मैं चाहतां कि ऐसे पत्रकारों को अधिस्वीकृत मानते हुए उन्हें सभी सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए। क्योंकि ऐसे कई पत्रकार है जो 30-30 साल तक राष्ट्रीय मीडिया हाउस में काम कर चुके हैं, मगर अधिस्वीकृत नहीं है। अधिस्वीकृत होना कोई माथे का टीका नहीं है जिससे पत्रकार होने का प्रतीक माना जाए। 30-30 साल से पत्रकारिता करने वाला अपने आप में योग्यता रखता है।
बजट में जेडीए (जर्नलिस्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी) के गठन का प्रस्ताव रखें :
मेरा भाई राजीव से आग्रह है कि प्रदेश के आगामी बजट में प्रावधान करवा सकें तो संभाग स्तर पर या प्रदेश स्तर पर जर्नलिस्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी के गठन का प्रस्ताव रखें। इस जर्नलिस्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी का काम पत्रकारों की आवास योजना, पत्रकार संगठनों के भवन, पत्रकारों की समस्याओं, पत्रकारों के लीगल मेटर आदि देखे। इस अथॉरिटी का काम पत्रकारों के आर्थिक हितों की रक्षा करना भी हो। इस अथॉरिटी का संचालन कोई आईएएस या आरएएस द्वारा नहीं किया जाकर खुद पत्रकारों द्वारा किया जाए। इसमें किसी प्रकार का कोई पॉलिटिकल या प्रशासनिक हस्तक्षेप नहीं हो। हां न्यायिक क्षेत्र से एक दो रिटायर्ड जजों को शामिल किया जा सकता है। इस जर्नलिस्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी को व्यापक अधिकार दिए जाएं और अधिस्वीकृत और गैर अधिस्वीकृत पत्रकारों का भेदभाव खत्म कर सभी पत्रकारों को इस अथॉरिटी का सदस्य बनाया जाए और यह अथॉरिटी ही पत्रकारों के यात्रा पास, पत्रकारों के बच्चों की उच्च शिक्षा अनुदान, विज्ञापन नीति, स्वास्थ्य पॉलिसी, पेंशन पॉलिसी और तमाम मुद्दों को देखे। कहने का मतलब यह है कि यह अथॉरिटी पत्रकारों की सभी समस्याओं और सभी मुद्दों को देखे और इसी अथॉरिटी में उनकी सुनवाई हो। अगर ऐसा हो जाता है तो सरकारी भ्रष्टाचार और लालफीताशाही खत्म हो सकती है। एक यह अथॉरिटी बन जाए तो पत्रकारों की सारी समस्याओं का हल हो सकता है। सवाल यह है कि इस अथॉरिटी में किन पत्रकारों को लिया जाए तो यह आसान है। जो 20 साल से अधिक राष्ट्रीय मीडिया हाउस में पत्रकारिता कर चुके हैं, वे इसके पात्र हो और उनका समय भी निर्धारित हो। यानी एक समय के बाद दूसरे पत्रकारों को अथॉरिटी के संचालन का मौका दिया जाए। इस अथॉरिटी का अगर बजट में प्रावधान हो जाए तो प्रिंट, डिजिटल, इलेक्ट्रॉनिक और सभी तरह के मीडिया हाउस का भला हो जाएगा।
मारवाड़ प्रेस क्लब के उत्तरोत्तर विकास की शुभकामना :
मैं भाई राजीव गौड़ को धन्यवाद देना चाहूंगा कि उन्होंने मुझे एडवाइजरी बोर्ड में लिया। यह उनका मेरे प्रति सम्मान का भाव है। पत्रकार संगठन तो खूब बनते हैं मगर लेटरहैड पर बनते हैं और उनका काम ज्ञापन देने तक सीमित रह जाता है। मारवाड़ प्रेस क्लब ने साबित किया है कि वह लेटरहेड के रूप में संगठन नहीं है और कुछ करने में विश्वास रखता है। इसके लिए ऊर्जावन नेतृत्व के धनी भाई राजीव और पूरी टीम मारवाड़ प्रेस क्लब को बधाई देता हूं ओर मेरी शुभकामनाएं संगठन के साथ है। मैंने मेरी 33 साल की पत्रकारिता यात्रा में देखा है कि कई पत्रकार संगठन स्वार्थ से प्रेरित रहे हैं और आईएएस और आईपीएस की हाजिरी लगाने में अपनी शान समझते हैं और जब कभी ईमानदार और सत्य के लिए कलम चलाने वाले पत्रकार पर संकट आता है तो ऐसे पत्रकार से किनारा कर लेते हैं और उसे अकेला छोड़ देते हैं। मैं नहीं चाहता कि किसी भी पत्रकार भाई को मारवाड़ प्रेस क्लब अकेला छोड़े। यह हमारा परिवार है। हम सभी एक ही परिवार के सदस्य हैं। विश्वास और आस्था ही हमारी आपसी शक्ति है। हमें किसी के बहकावे में नहीं आकर संगठन की मजबूती और सदस्यों के हितों के लिए काम करने में विश्वास करना होगा।



